Module 5

Module Five – Business Culture

व्यावसायिक संस्कृति

Business Culture

a. Family-based Business

Module 5.1

 

व्यावसायिक संस्कृति

Business  Culture

 

 

 

व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत

Welcoming a Business Delegation

 

Text Level

 

Advanced

Modes

Presentational

Interactive

Interpretive

 

What will students know and be able to do at the end of this lesson?

Welcoming a foreign delegation and explaining local business enviroment


Text

(मॉरिशस का एक व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल भारत आया हुआ है। नेशनल चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स इंडस्ट्री द्वारा उनके स्वागत में एक समारोह का आयोजन किया जा रहा है जिसमें चैम्बर के अध्यक्ष श्री अनिल अग्रवाल द्वारा उक्त प्रतिनिधिमंडल को भारतीय व्यापार-जगत की प्रमुख विशेषताओं से अवगत कराया जा रहा है)

अनिल अग्रवाल – मॉरिशस से आए व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स की तरफ से हार्दिक स्वागत करता हूँ। वैसे तो प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्य पहले से ही हमारे साथ व्यापारिक और पारिवारिक रूप से जुड़े हैं लेकिन कई सदस्यों की यह पहली भारत-यात्रा है। अतः उन्हें भारत की  व्यावसायिक संस्कृति के बारे में विस्तार से बताने की ज़िम्मेवारी मुझे सौंपी गई है। आपसे अनुरोध है कि अगर आपके  मन में कोई जिज्ञासा हो तो ज़रूर पूछिएगा और मैं उसे शांत करने का  भरसक प्रयत्न करूँगा।

एक सदस्य – अग्रवाल जी ! भारत के व्यावसायिक जगत की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है जो इसे दुनिया के अन्य देशों से अलग करती है?

अनिल अग्रवाल – भारत के व्यावसायिक जगत की प्रमुख विशेषता है उसका व्यक्ति या खानदानपरक होना। दूसरे देशों में जैसा उत्पाद के ब्रांडों का बोलबाला होता है वैसा भारत में कम ही है। यहाँ सबसे बड़ा ब्रांड है टाटा, बिरला, अंबानी, गोदरेज और न कि इन व्यक्तियों के समूहों के उत्पाद। अमेरिका में बिल गेट्स और माइक्रोसॉफ़्ट दोनों समान रूप से प्रसिद्ध हैं जब कि भारत में व्यक्तिपरक उत्पाद को ही प्रमुखता मिलती है जैसे गोदरेज का फ्रिज़ या टाटा का नमक। यह भारत के व्यापारिक जगत की सबसे अनूठी बात है। कई एक बहुदेशीय कंपनियों ने इस को तोड़ने की कोशिश की पर वे आयातित मामलों में ही कुछ कर पाए, जैसेकि सोनी ने की पर घरेलू उत्पाद की स्थिति नहीं बदली ।

दूसरा सदस्य – यह तो वाक़ई एक अनूठी बात है लेकिन इसके पीछे कोई तो ठोस कारण होगा।

अनिल अग्रवाल – बात यह है कि जनाब, भारत के इन प्रतिष्ठित घरानों में कुछ का व्यापारिक इतिहास एक शताब्दी से ज़्यादा पुराना है और इस कालावधि में उनका ग्राहकों के साथ विश्वास का जो रिश्ता बना और वह निरंतर प्रगाढ़ ही होता गया।  हमारे यहाँ यह कहना कि फ़लाँ वस्तु टाटा या गोदरेज की बनी है उसकी उत्कृष्टता की गारंटी होती है और मज़े की बात यह है कि ग्राहक आँख मूँदकर उसे खरीद लेता है। 

एक अन्य सदस्य – अद्भुत ! वाक़ई अद्भुत !

अनिल अग्रवाल- इसके अतिरिक्त भारत के व्यापारिक जगत में नियोक्ता-मज़दूर का संबंध भी अपने-आप में अनूठा है। वैसे तो संगठित क्षेत्र में संबंध वैश्विक सिद्धांतों पर चलता ही है लेकिन असंगठित क्षेत्र में नियोक्ता-मज़दूरों में एक विशेष किस्म का अनुराग देखने को मिलता है और शायद यही कारण है कि वैधानिक दाव-पेंचों से दूर यह क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत है। यहाँ मालिक-मज़दूर के संबंध कुछ अलग भी हैं और यह मालिक मज़दूरों की हारी-बीमारी में आर्थिक और भावनात्मक सहयोग करता है। कभी-कभी ये संबंध पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहने से मालिक के नफ़े और नुकसान में भी मज़दूर सहभागी होते हैं।

पहला सदस्य – यह तो एक अनोखी बात है पर इन सबके बावज़ूद भारत वैश्विक बाज़ार में कैसे प्रतियोगी बना हुआ है?

अनिल अग्रवाल – बात यह है कि भारत के संगठित क्षेत्र में अनेकों ऐसी कंपनियाँ हैं जोकि वैश्विक स्तर बनाए हुए हैं और पुरानी कंपनियों ने भी वैश्विक बाज़ार के लिए अपने मानदंडों को बदला है। आज विश्व के परिदृश्य में भारत की भागीदारी बढ़ी है। साथ ही साथ भारत का बाज़ार आज अमेरिका की जनसंख्या के बराबर पहुँच गया है। ऐसे में भारत की आर्थिक ताक़त को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है।

दूसरा सदस्य – अग्रवाल जी, आपकी बातों ने हमारी आँखें खोल दी हैं। यह मेरी पहली भारत यात्रा थी और पहली यात्रा में ही मैं भारत के बारे में अपनी धारणा बदलने को मज़बूर हो गया हूँ।

अनिल अग्रवाल – बहुत बहुत धन्यवाद ! उम्मीद है मैंने जो जानकारियाँ दी हैं वे भारत के साथ आपके व्यापारिक संबंध बढ़ाने में सहायक होंगी और भारत के बारे में जो मिथ हैं वे भी काफ़ी हद तक दूर हो गए होंगे।

कई सदस्य- (एक साथ ) हाँ , हाँ . बिल्कुल बिल्कुल !!!

अनिल अग्रवाल- अंत में मैं आप सबको चैम्बर के इस कार्यक्रम में पधारने व उसकी शोभा बढ़ाने के लिए दिल से धन्यवाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि हमारे द्विपक्षीय संबंध सुदृढ़  होंगे। नमस्कार !

सब एक साथ – नमस्कार !

(सब अनिल जी को धन्यवाद देते हैं। सब एक दूसरे का अभिवादन करते हैं और अनिल अग्रवाल सबको विदा करते हैं) 

Glossary

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल m business delegation
समारोह m celebratory event
व्यावसायिक संस्कृति f business culture
अनुरोध m प्रार्थना f, विनती f, request
जिज्ञासा f जानने की इच्छा f, desire to know
खानदानपरक related to the extended family, खानदानी, पारिवारिक
प्रतिष्ठित मान्य, सम्माननीय, respected
शताब्दी f सदी f, century
कालावधि f duration
फ़लाँ वस्तु f certain thing
उत्कृष्टता f excellence
हारी-बीमारी f mental or physical sickness
पीढ़ी-दर-पीढ़ी generation after generation
वैश्विक सार्वभौमिक, global
प्रतियोगी m/f प्रतिद्वंद्वी m/f, प्रतिस्पर्धी m/f, competitor
संगठित क्षेत्र m organized sector
मानदंड m criterion
परिदृश्य m scenario
अंदाज़ करना to overlook
द्विपक्षीय संबंध m bilateral relations

Structural Review

1. Use of passive voice constructions in Hindi Use of passive voice constructions is much more common in Hindi than in English. Structurally, the verb phrase consists of the perfective form of the main verb followed by the passive marker जाना, which is conjugated in the appropriate tense and number. This unit has multiple examples of passive voice constructions.
2. जिज्ञासा

 

With the help of different suffixes we can derive many new words from जिज्ञासा. For example, we can derive जिज्ञासु, जिज्ञासावान, जिज्ञासापूर्वक, जिज्ञासाजनक, जिज्ञासापरक, जिज्ञासाहीन, जिज्ञासित (व्यक्ति)
3. Generation of new words

 

 

Sanskrit provides linguistic tools to coin and derive new words. Besides prefixes and suffixes, compounds also generate new words. See the following compound words from this unit –प्रतिनिधिमंडल, व्यापार-जगत, शताब्दी, परिदृश्य, बहुदेशीय, द्विपक्षीय. We can also generate new words like मित्रमंडल, मित्र-जगत, त्रिदेशीय, पंचपक्षीय, etc.

Cultural Notes

1. इस कार्यक्रम में पधारने व उसकी शोभा  बढ़ाने के लिए पधारना व शोभा  बढ़ाना is a ritual formulaic expression used in invitation cards and other formal contexts to welcome guests.
2. नियोक्ता-मज़दूरों में एक विशेष किस्म का अनुराग देखने को मिलता है

 

This is a traditional context where a hierarchical relationship is well-established on both sides, of employer and employee, and where both respect and care about each other. This situation is found in homes of some people who employ help at home, and in some family-owned commercial establishments. If the employee is older in age, members of the younger generation in the family would address him using a kinship term, such as ‘uncle’.

Practice Activities (all responses should be in Hindi)

1. From your own research and experience make a short statement about the business culture in India and how it is gradually changing with the new generation.
2. Write five bullet-points that you would like to provide for cultural orientation of American workers in India.
3. A discussion: to what extent the knowledge of both English and Hindi is important for success in India’s business world.
4.  What are American perceptions about doing business in India?
5. उनका ग्राहकों के साथ विश्वास का जो रिश्ता बना और वह निरंतर प्रगाढ़ ही होता गया

What are some of your ideas for creating a loyal clientele for any product?

6. भारत के बारे में जो मिथ हैं वे भी काफ़ी हद तक दूर हो गए होंगे

Make three sentences with a presumptive verb with होगा, होंगे, होगी, होंगी. An example of the presumptive verb usage can be seen in the Hindi sentence above.

Comprehension Questions

1. How many major characteristics of Indian business did Anil Agrawal elaborate?

a. one

b. two

c. three

d. four

2.Which option is the best description of the delegates’ reaction to Mr. Agrawal’s presentation?

a. enthusiastic

b. partially complimentary

c. critical

d. unenthusiastic

b. Employer-Employee Relationships

Module  5.2

 

व्यावसायिक संस्कृति

Business  Culture

 

 

 

नियोक्ता-श्रमिक संबंध

Employer-Labor Relations

Text Level

 

Advanced

Modes

Interactive

Interpretive

 

What will students know and be able to do at the end of this lesson?

Participating  in a radio or TV conversation and verbalizing local labor issues


Text

(आकाशवाणी के साप्ताहिक कार्यक्रम उद्योग जगत सेकी रिकॉर्डिंग हो रही है। वार्ता का विषय है वैश्वीकरण के दौर में नियोक्तामज़दूर संबंध । वार्ता में ऐंकर धीरज पचौरी के अलावा नियोक्ताओं की ओर से श्री पारितोष लधानी जोकि कोकाकोला की एक फ्रेंचाइज़ के डॉयरेक्टर हैं, उपस्थित हैं। श्रमिक जगत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं एटक के ज़िला महामंत्री श्री जगदीश प्रसाद)

धीरज पचौरी नमस्कार श्रोताओ! उद्योग जगत में आज की वार्ता का विषय है वैश्वीकरण के दौर में नियोक्तामज़दूर संबंध। वार्ता में भाग ले रहे हैं श्री पारितोष लधानी , जोकि एक शीतल पेय  बनानेवाली कंपनी के निदेशक हैं और यहां नियोक्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। श्री जगदीश प्रसाद जोकि एक श्रमिक संगठन से संबद्ध हैं, श्रमिकों के हितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आप दोनों का इस कार्यक्रम में स्वागत है।

दोनों नमस्कार !  

धीरज पचौरी मेरा पहला प्रश्न है श्री जगदीश प्रसाद जी से। सर ! बताएँ कि क्या वैश्वीकरण ने नियोक्ताश्रमिक संबधों को पुनः परिभाषित किया है या फिर श्रमिकों की स्थिति यथावत् ही है।

जगदीश प्रसाद  धीरज जी ! मुझे नहीं लगता है कि वैश्वीकरण से मज़दूरों की स्थिति में कोई सुधार हुआ है। वैश्वीकरण के पश्चात् जो उद्योगधंधे शुरू हुए हैं उनमें अधिकतर आई.टी व जन-संचार क्षेत्र से संबंधित हैं और इनमें काम करनेवाले अधिकतर व्हाइट कॉलरवाले व्यक्ति हैं न कि ब्लू कॉलरवाले श्रमिक। व्हाइट कॉलरवालों को अपने नियोक्ताओं से न तो पहले कोई विशेष शिकायत थी न आज है और न भविष्य में रहेगी। वे तो शिकायत करने के बजाए अपना नियोक्ता ही बदल लेते हैं। न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।

धीरज पचौरी पारितोष जी ! आप जगदीश जी की इस टिप्पणी से कहाँ तक सहमत हैं?

पारितोष लधानी- श्रोताओं को एक बार पुनः मेरा यानी पारितोष लधानी का नमस्कार ! मैं श्री जगदीश प्रसाद जी के विचारों से पूरी तरह असहमत हूँ। वैश्वीकरण के पश्चात हमारा निर्यात बढ़ा है। उद्योगों की वार्षिक दर 8% के आसपास रही है और सेवापरक उद्योगों के साथ-साथ निर्माणपरक उद्योगों का भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अगर ये सब आँकड़े सही हैं तो देश में तथाकथित ब्लू कॉलरवाले श्रमिकों का भी उद्योगों और निर्यात बढ़ाने में उतना ही योगदान है जितना कि व्हाइट कॉलरवालों का। श्री जगदीश प्रसाद जी सारे परिदृश्य का बड़ी ही संकुचित दृष्टि से आकलन कर रहे हैं। आज प्रत्येक निर्यातक इकाई चाहे वो सेवा का निर्यात कर रही हो या फिर किसी वस्तु का, बिना स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट के अपना निर्यात नहीं कर सकती। ऐसे में इन इकाइयों में काम करनेवाले मज़दूरों को सारे वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।

धीरज पचौरी क्या आप कुछ कहना चाहेंगे जगदीश प्रसाद जी?

जगदीश प्रसाद  पारितोष जी का यह आकलन भी निरे हवाई-किले बनाने से कम नहीं है। अगर एक बार इनकी बातों को सच भी मान लिया जाए तो उन उद्योगों का क्या जो बाज़ार के लिए सेवा व वस्तुओं का निर्माण कर रहे हैं। उनमें तो श्रमिकों की स्थिति यथावत् है।

धीरज पचौरी लीजिए, पारितोष जी ! अब आपके आकलन की बारी है।

पारितोष लधानी देखिए धीरज जी !  जगदीश प्रसाद जी ने कम से कम मेरी एक बात का समर्थन तो कर ही दिया है। जहाँ तक घरेलू बाज़ार की माँग-पूर्ति —-

जगदीश प्रसादपारितोष जी ! रुकिए ! रुकिए ! मैंने अभी आपकी बात मानी नहीं। सिर्फ़ एक परिदृश्य की कल्पना की है आपसे एक सवाल करने के लिए।

पारितोष लधानी- देखिए, जगदीश प्रसाद जी ! मैंने निर्यातपरक उद्योगों में मज़दूरों की स्थिति के बारे में जो कहा उससे आप कहाँ तक सहमत हैं?

जगदीश प्रसाद  सिर्फ आंशिक रूप से। देखिए निर्यात में भी सेवापरक उद्योगों की स्थिति दूसरी है और उत्पादक इकाइयों की इतर है। हाँ, निर्यातक इकाइयों में घरेलू इकाइयों की तुलना में श्रमिक ज़्यादा संतुष्ट हैं। यह बात तो मैं भी मानता हूँ।

पारितोष लधानी चलिए , कोई तो बात मानी आपने ! धीरज जी आज संचार-क्रांति का युग है अतः श्रमिकों को अपने अधिकारों के बारे में पहले से बहुत अधिक चेतना है। ऐसे में शोषण आदि बीते युग की बातें हैं।

जगदीश प्रसाद  पारितोष जी ! आप स्थिति को जितनी  सुखद समझ रहे हैं उतनी है नहीं।   

पारितोष लधानी – जगदीश प्रसाद जी ! एक बात बताइए, आपका अनुभव तो मेरी उम्र से दुगुने से भी ज़्यादा है। क्या आपको नहीं लगता कि आजकल हड़ताल, तालाबंदी की खबरें उतनी सुनने में नहीं आतीं जितनी शायद 10-15 साल पहले आम थीं।

जगदीश प्रसाद  बेटा ! बात यह है कि आज मँहगाई इतनी बढ़ गई है कि मज़दूर एक दिन की हड़ताल में ही टूट जाता है ऐसे में लंबे आंदोलनों का सवाल ही नहीं उठता।

धीरज पचौरी वाह ! मँहगाई से होनेवाली परेशानियों के बारे में तो सुना था लेकिन उससे उद्योगों को लाभ हो रहा है – ऐसा पहली बार सुन रहा हूँ।

                 (तीनों मुस्करा देते हैं )

तो श्रोताओ! अभी तक आपने दोनों पक्षों के विचार सुने लेकिन यह एक ऐसा विषय नहीं है जिसमें एक राय बन सके। आप दोनों हमारे कार्यक्रम में आए इसके लिए हम आपके आभारी हैं।

दोनों धन्यवाद ! नमस्कार !

धीरज पचौरी तो आज के लिए इतना ही। फिर मिलते हैं अगले सप्ताह आज ही के दिन, इसी समय। नमस्कार!

Glossary

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

वार्ता f बातचीत f, talk
नियोक्ता m employer
श्रमिक m मज़दूर m/f, laborer
प्रतिनिधित्व m representation
वैश्वीकरण m globalization
दौर m period
हित m benefit, good, interest
परिभाषित करना to define
यथावत् as it was
न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी (idiom) no cause no consequence
टिप्पणी f comment
सहमत in agreement, consentient
आँकड़े m statistics
परिदृश्य m scenario
वैधानिक अधिकार m constitutional right(s)
हवाईकिले बनाना to build castles in the air
आकलन m evaluation, estimate
संचार-क्रांति f communication – revolution
तालाबंदी f lock-out
आभारी grateful

Structural Review

1. प्रतिनिधित्व प्रतिनिधि, प्रतिनिधित्व, प्रतिनिधिमंडल are some additional words generated with the base word प्रतिनिधि
2. संबद्ध Similarly, संबंध, संबद्ध, संबंधित
3. सुखद Here the final letter means देने वाला. One can also generate many more monosyllabic words with this suffix. Examples – दुःखद, जलद, धनद, मानद, बलद. etc. Such words are not used in the spoken language but are found more in poetry and other literary texts.
4. Formal Hindi – Informal Hindi

 

 

Many formal words are not often used in informal contexts but the reverse is not true. In other words, informal words can be used in formal contexts. The gap between formal and informal is much more distinct in Hindi than in English.
5. श्रोताओ

 

This is in vocative plural form. This form is spelled correctly but the final syllable is often nasalized both in spoken and written Hindi, especially on the internet. Thus many people write such a vocative form as श्रोताओं. Other vocative plural forms like दोस्तो, मित्रो, भाइयो are also being written and spoken with nasalization. Maybe this is a linguistic change in progress.

Cultural Notes

1. बेटा !

 

Use of such terms is not common in formal contexts but it seems that one cannot completely rule it out. It depends on how comfortable the two interlocutors feel with each other. In this unit, when one invokes the other’s extensive experience on the basis of age, it allows the second person to take the opportunity to address the former in personal terms as बेटा. This maybe a way of accepting the compliment of having much greater experience.

Practice Activities (all responses should be in Hindi)

1. What are your views about organized labor in India? How has far the situation changed over years?
2. A role-play between three participants – one assumes the role of an anchor, the second represents employers’ viewpoint and the third represents workers’ viewpoint. The topic of discussion is the necessity of having a respectable benefit package for all workers.

 

3.  आज हड़ताल, तालाबंदी की खबरें उतनी सुनने में नहीं आतीं जितनी शायद 10-15 साल पहले आम थीं

To what extent do you agree with the above statement in the context of India and the United States?

4. न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी

Write one short text using the above idiom.

5. Review the following related words and construct a sentence for each.

नियुक्त, नियुक्ति, नियोक्ता

श्रम, श्रमिक, परिश्रम

Comprehension Questions

1.With how many issues were the presenters in agreement?

a. o

b. 1

c. 2

d. 3

2.Who was aggressive in presenting his argument?

a.  Jagdish Prasad

b.  Paritish Ladhani

c.  Both of them

d.  Neither of them

c. Child Labor issues

Module 5.3

 

व्यावसायिक संस्कृति

Business  Culture

 

 

एक सफल व्यवसायी का

टी.वी. पर साक्षात्कार

TV Interview of a Successful Business Person

 

Text Level

 

Advanced

Modes

Interactive

Interpretive

 

What will students know and be able to do at the end of this lesson?

Having a TV interview to project your and your company’s persona before the public


Text

(डॉ. रंजना बंसल टाटा मोटर्स के अधिकृत विक्रेता अशोक ऑटो सेल्स लिमिटेड की मैंनेजिंग डॉयरेक्टर हैं। स्थानीय टीवी चैनल डीज़ी न्यूज़ के कार्यक्रम सफल व्यक्तित्व में उनका इंटरव्यू रिकॉर्ड किया जा रहा है। प्रोग्राम की ऐंकर सुश्री कविता शर्मा से उनकी  वार्ता का सारांश प्रस्तुत है)

कविता शर्मा- प्यारे दर्शको! आप सभी को आपकी अपनी कविता शर्मा का प्यार भरा नमस्कार ! आज के हमारे कार्यक्रम सफल व्यक्तित्व के इस एपिसोड की मेहमान हैं शहर की जानी मानी हस्ती, सफल या यूँ कहिए सफलतम व्यवसायी, जोकि पेशे से मूलतः एक डॉक्टर भी हैं, डॉ. रंजना बंसल।

रंजना बंसल नमस्कार, कविता जी ! नमस्कार प्यारे दर्शको !

कविता शर्मा- डॉ. रजना जी ! जैसाकि अधिकांश श्रोता जानते हैं कि आपके व्यक्तित्व के कई आयाम हैं। आप अपने समय की एक सफल डॉक्टर हैं और आज एक सफल व्यवसाय की कर्ता-धर्ता। कौनसा रूप आपके व्यक्तित्व का सही आइना है?

रंजना बंसल- देखिए कविताजी ! जैसेकि आप जानती हैं कि जब तक मेरे भाई अशोक बंसल ज़िंदा थे तब तक मैं सिर्फ़ एक डॉक्टर ही थी। बचपन से मैंने डॉक्टर बनने का सपना देखा था और जब मेरा चयन डॉक्टर की पढ़ाई के लिए हुआ तब से ही मैं इस चिकित्सा के पेशे से ही जन-सामान्य की सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य मानती थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी मैं इसी लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर थी। तभी अचानक मेरे भाई भाभी की कार-दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु ने मेरे जीवन के चिंतन व दिशा दोनों को बदल दिया। भाई के छोटे छोटे बच्चों का लालन-पालन व परिवार के जमे जमाए व्यवसाय को चलाए रखने की ज़िम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई थी और ऐसी विषम परिस्थितियों  में मुझे अपने लक्ष्य को छोड़कर जीवन में एक बिल्कुल नए क्षेत्र में उतरना पड़ा। लेकिन भाई के आशीर्वाद से नामुमकिन सा लगनेवाला कार्य भी मैंने सहजता से निभा लिया और आगे भी निभाती रहूँगी ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।

कविता शर्मा क्यों नहीं ! बेशक ! पर डॉ.बंसल डॉक्टरी के पेशे में मानवीय मूल्यों का बड़ा महत्व है लेकिन व्यवसाय को सफल बनाने में वे मूल्य निरर्थक से हो जाते हैं। ऐसे में आपने अपने मानवीय मूल्यों के साथ-साथ व्यावसायिक जगत के गला-काट मूल्यों के साथ कैसे तालमेल बिठाया?

रंजना बंसल बहुत अच्छा प्रश्न किया आपने कविता जी ! मेरी डॉक्टरी शिक्षा तो सिर्फ़ मेरे भतीजों के लालन-पालन में काम आई। मैंने व्यवसाय में उन मूल्यों को कभी अपनी कमज़ोरी बनने नहीं दिया। कविता जी, वैसे भी व्यावसायिक जगत में बड़ी गला-काट प्रतिस्पर्धा है। एक छोटी सी गलती आपको बिज़नेस से बाहर कर सकती है। और तो और एक महिला के लिए तो यह क्षेत्र बिल्कुल जंग के मैदान की तरह है। व्यवसायी वैसे भी किसी अन्य को अपने से आगे निकलता नहीं देख सकते और अगर वह महिला है तो समझिए कि उसकी निजी ज़िंदगी व निजता पर ही प्रहार किया जाता हो। ऐसे में कोई कमज़ोर महिला टिक कर काम नहीं कर सकती। यह अहसास मुझे पहले दिन से ही था इसीलिए मैंने शुरू से ही बड़ा आक्रामक रुख अख्तियार किया। जिसका मुझे फ़ायदा भी हुआ पर कभी कभी नुकसान भी।

.शर्मा वह कैसे ?

रंजना बंसल वह ऐसे कि आधे से ज़्यादा आलोचक तो डर के मारे मैदान छोड़ गए। बाकियों को मैंने समय के साथ ठीक कर दिया। आज मेरे भाई का कार का व्यवसाय कई गुना बढ़ गया है। आज मेरे कई शहरों में फैले व्यवसाय में भतीजों ने भी पढ़ाई पूरी करके मेरा हाथ बँटाना शुरू कर दिया है। यूँ कहा जा सकता है कि मैं अब अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट हूँ।

कविता शर्मा – डॉ.बंसल ! आपकी जीवन यात्रा तो त्याग और तपस्या का अनूठा संगम है।

रंजना बंसल – मैं तो कहूँगी कि श्रम और सेवा का संगम है। कोई  अपनों के लिए जो कुछ करता है उसे मैं त्याग नहीं मानती। मैंने कभी कुछ भी  किसी के दबाव में आकर नहीं किया। जो भी किया पूरी निष्ठा से किया, मन से किया।

कविता शर्मा – एक अंतिम प्रश्न डॉ. बंसल ! दस साल बाद आप अपने को कहाँ पाती हैं?

रंजना बंसल – अपना प्रयत्न तो प्रगति की दिशा में ही है। बच्चे भी पढ़ लिख कर नए नए विचार ले कर आ रहे हैं। मुझे तो नए नए शिखर दिखाई दे रहे हैं। बाकी तो समय बताएगा।

                (दोनों हँस पड़ते हैं)

कविता शर्मा – तो दर्शको ! यह थीं डॉ. रंजना बंसल ! एक सफल व्यवसायी व एक सफल महिला जिसने परिवार के व्यवसाय को संकट से निकाला और बुलंदियों पर पहुँचाया। डॉ.बंसल, आपने अपना अमूल्य समय हमें दिया इसके लिए हम आपके आभारी हैं। आप और अधिक बुलंदियों को छूएँ ऐसी हमारी हार्दिक इच्छा है।

रंजना बंसल धन्यवाद, कविताजी ! मुझे आपके टीवी शो में आकर बहुत अच्छा लगा। नमस्कार, कविता जी ! प्यारे दर्शको, आपको भी मेरा नमस्कार !

कविता शर्मा धन्यवाद ! अगले एपिसोड  में हम फिर से उपस्थित होंगे शहर के किसी सफल व्यक्तित्व  को लेकर। तब तक के लिए नमस्कार ! अलविदा ! शब्बा ख़ैर !

Glossary

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

अधिकृत विक्रेता m authorized dealer
सुश्री Ms.
व्यक्तित्व m शख़्सियत f, personality
सारांश m सार m, summary
जानीमानी हस्ती f मशहूर, प्रसिद्ध, well-known personality
श्रोता m audience
आयाम m dimension
चयन m चुनाव m, selection
जमा-जमाया well-established
विषम परिस्थितियां f difficult circumstances
सहजता से effortlessly
तालमेल m coordination
प्रतिस्पर्धा f मुकाबला m, प्रतिद्वंद्विता f, competition
निजता f privacy
आक्रामक रुख m आक्रामक रवैया m, aggressive attitude
अनूठा संगम m distinctive convergence
अलविदा good-bye!
शब्बा ख़ैर good night!

Structural Review

1. व्यवसायी ….. अपने से आगे निकलता नहीं देख सकते In negative sentences in the present tense, the tense marker है or हैं becomes optional. The speaker Dr. Ranjna Bansal could have said – व्यवसायी ….. अपने से आगे निकलता नहीं देख सकते हैं।
2. मैंने कभी कुछ भी  किसी के दबाव में आकर नहीं किया The two elements in the adverbial expression आकर can also be written separately. The structure of this form is verb stem + कर. The other two variants used in colloquial speech are के or करके. So colloquially one could say आके or आ करके.

 

3. Hyphenated words There is no standardized usage for hyphenated words. We see over-use, under-use and little use of hyphens. Writers have individual ways of dealing with the use of hyphens.

Cultural Notes

1. Reflection of composite culture

 

The use of words from Urdu and English in Hindi mirrors the composite culture of Indian society. The text in this unit is predominantly in formal Hindi but the use of some Urdu words आइना, नामुमकिन, अख्तियार करना, बुलंदियां, अलविदा, शब्बा ख़ैर serves a sociolinguistic purpose. It draws an audience from different backgrounds. Hindi words could have been used instead –  दर्पण, असंभव, स्वीकार करना, ऊंचे शिखर, नमस्ते, शुभ रात्रि. Something similar can be said about the use of English words used in this unit.

Practice Activities (all responses should be in Hindi)

1. Role-play the above dialogue in your own words and with your own story – real or imagined.
2. To what extent are professional skills transferrable from one profession to the other?
3. What are some new ideas that the younger generation is eager to introduce? Where do you find conflict between the new and old ideas?
4. We see some collocations like the following: जानी मानी हस्ती, कर्ता-धर्ता, जन-सामान्य, आकस्मिक मृत्यु, लालन-पालन, जमे जमाए, दृढ़ विश्वास, आक्रामक रुख, जीवन यात्रा, अमूल्य समय

Think of ten more such collocations used anywhere in Hindi.

5. What is the vocative plural form of the following?

मित्र, दोस्त, छात्र, साथी, बच्चा, लड़का, लड़की, सहयोगी, खिलाड़ी, कार्यकर्ता

Comprehension Questions

1.What is Dr. Ranjana Bansal’s current status?

a. After her brother and his wife died, she is assisting their sons in the business.

b. She is a practicing doctor but is also helping her nephew in the business.

c. She left her medical practice and is solely running her brother’s business.

d. She is ready to retire after entrusting her brother’s businee to her nephews.

3. Dr. Bansal’s dedication is foremost in

a. medical practice

b. Ashok auto sales

c. family matters

d. money

d. Business culture in general

Module  5.4

 

व्यावसायिक संस्कृति

Business Culture

 

 

 

बाल-श्रमिक संबंधी मुद्दे

Child Labor Related Issues

Text Level

 

Advanced

Modes

Interactive

Interpretive

 

What will students know and be able to do at the end of this lesson?

Understanding and expressing views on child labor


Text

(समाजविज्ञान संस्थान में  मास्टर्स इन सोशलवर्क के कोर्स में प्रवेश के लिए छात्रों को बुलाया गया है। लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण छात्र ही अंतिम साक्षात्कार के लिए चुने गए हैं। गजेंद्र वर्मा ने लिखित परीक्षा में बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए हैं और अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं। इसी बीच एक छात्रा सुकन्या अग्रवाल साक्षात्कार के बाद भीतर से बाहर आती है)

गजेंद्र वर्मा कैसा रहा  इंटरव्यू ?

सुकन्या अग्रवालकैसा क्या रहा? जो ज्ञान हम दो साल में हासिल करने आए हैं उस पर ये लोग पहले से ही हमसे पांडित्य की उम्मीद कर रहे हैं।

गजेंद्र वर्मा क्या किसी कठिन विषय पर प्रश्न पूछे जा रहे हैं?

सुकन्या अग्रवालवैसे तो सभी सदस्य बुज़ुर्ग हैं पर बाल-श्रम के पीछे पड़ गए हैं।

(यह सुन कर गजेंद्र वर्मा मुस्करा देता है और सुकन्या अग्रवाल खीजती हुई बाहर चली जाती है तभी एक सहायक गजेंद्र वर्मा का नाम पुकारता है। गजेंद्र भीतर प्रवेश करता है और भीतर आने की अनुमति माँगता है)

गजेंद्र वर्मा क्या मैं भीतर आ सकता हूँ?

(कमरे में डॉ. राजेश्वर प्रसाद , डॉ.बी.एल. गुप्ता एवं  श्रीमती मृदुला सिन्हा आदि पैनल के माननीय सदस्य बैठे हुए हैं)

राजेश्वरप्रसाद आइए, आइए।  बैठिए !

गजेन्द्रवर्मा – धन्यवाद सर !

                     (कुर्सी पर बैठ जाता है)

मृदुला सिन्हा अपने बारे में संक्षेप में बताइए।

गजेन्द्रवर्मा सर! मेरा नाम गजेन्द्र वर्मा है। मैंने बी.एस.सी. आर.बी.एस. से किया।

राजेश्वरप्रसाद आर.बी.एस?

गजेन्द्रवर्मा सर ! राजा बलवंत सिंह डिग्री कॉलेज़ से। इंटरमीडिएट और हाईस्कूल केंद्रीय विद्यालय से पास किया। तीनों ही में मैंने प्रथम श्रेणी प्राप्त की।

राजेश्वरप्रसाद- बहुत अच्छे ! वर्मा जी  बाल-श्रम उन्मूलन कितना संभव कितना असंभव विषय  पर आपके क्या विचार हैं?

गजेन्द्रवर्मा- सर ! बाल मज़दूरी सारी दुनिया के समाज में फैली एक बहुत पेचीदा समस्या है। ऐसे बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते और उनका मानसिक विकास नहीं हो पाता क्योंकि उन्हें बचपन में ही व्यवसायिक और मेहनत-मज़दूरी के कामों में खींच लिया जाता है। आज दुनिया भर में, 10 से 14 वर्ष की उम्र के करीब 7 करोड़ 30 लाख बच्चे  मेहनत-मज़दूरी के कामों में लगे हुए हैं। बाल-श्रम एक सामाजिक समस्या है। यह भारत की भी एक गंभीर समस्या है। यहाँ 14 वर्ष से कम के लगभग 2 से 3 करोड़ बच्चे कालीन बनानेवाली, ग्लास ब्लोइंग यूनिटों और पटाखे बनानेवाली कंपनियों में अपने छोटे छोटे हाथों से काम कर रहे हैं। इसलिए इसे ढेर सारे कानूनों के बावज़ूद यह कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।

बी.एल.गुप्ता यह तो हम भी जानते हैं मिस्टर वर्मा ! लेकिन आप मूल विषय पर ही केंद्रित रहें और बताएँ कि क्या बाल-श्रम उन्मूलन संभव है या नहीं?

गजेन्द्रवर्मा – मैं इसी पर आ रहा था सर ! सामान्य राय यह है कि बाल-श्रम इसीलिए बढ़ा है कि सस्ते में श्रम उपलब्ध हो सके लेकिन वास्तविकता यह है कि बाल-श्रम की वजह से सारा श्रम सस्ता हो गया है।

मृदुला सिन्हा क्या कहना चाहते हैं ? स्पष्ट करें !

गजेन्द्रवर्मा मैडम ! मैं कहना चाहता हूँ कि आम राय यह है कि उद्योगों में बाल-श्रम के  सस्ता होने की वजह से उसे प्राथमिकता मिलती है और इसीलिए इसका उन्मूलन नहीं हो पा रहा है । होता यह है कि बाल-श्रम उपलब्ध होने की वजह से जो वयस्क हैं उन्हें भी कम वेतन दिया जाता है और वयस्क बाल-श्रमिकों के डर से कम मज़दूरी पर काम करने लग जाते हैं। अगर बाल-श्रमिक पूर्ण रूप से हट जाएँ तो वयस्क श्रमिकों का वेतन अपने आप बढ़ जाएगा।

राजेश्वरप्रसाद बड़ा ही तथ्यात्मक आकलन है तुम्हारा। पर बेटा ! क्या इससे इस समस्या  का उन्मूलन संभव है या नहीं इस पर कुछ कहना चाहोगे?

गजेन्द्रवर्मा सर ! जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि यह एक सामाजिक समस्या है और इसका उन्मूलन बिना समाज में जागरूकता आए संभव नहीं है।

बी.एल.गुप्ता कैसी सामाजिक पहल की अपेक्षा है आपको ?

गजेन्द्रवर्मा एक ऐसी पहल जो सरकार व समाज मिलकर लें न कि सिर्फ़ सरकार जैसाकि आज तक होता आया है। बिना समस्या के मूल में जाए सिर्फ़ कानून बना कर इसका उन्मूलन संभव नहीं है। सर ! होता यह आया है कि कानून इसके मानवीय पक्ष को तो छूते हैं पर इसके आर्थिक पक्ष की अनदेखी करते हैं। कोई माँ-बाप यह नहीं चाहता कि उसका बच्चा स्कूल के बजाए कारख़ाने में काम करे लेकिन आर्थिक विषमता उन्हें बच्चों से ऐसा कराने पर मजबूर करती है। अतः ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति जब तक ठीक नहीं होगी तब तक समस्या को समूल नष्ट करने की सोचना अकल्पनीय है।

मृदुला सिन्हा छोटीसी उम्र में ही बहुत परिपक्व विचार हैं आपके।

राजेश्वरप्रसाद बहुत अच्छे ! तुम आगे जाकर एक अच्छे सामाजिक चिंतक बन सकते हो।

गजेन्द्रवर्मा सर, धन्यवाद ! पर पहले मेरा इस कोर्स में दाखिला तो हो जाए।

बी.एल.गुप्ता- वह तो हो ही जाएगा।

          ( तीनों आपस में विचार करते हैं )

राजेश्वरप्रसाद अच्छा ! अब आप जा सकते हैं .

गजेन्द्रवर्मा सर, नमस्कार !

     (गजेंद्र तीनों का अभिवादन कर बाहर निकल जाता है)

Glossary

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

पांडित्य m विद्वत्ता f,  scholarship, learning
बाल-श्रम m child labor
उन्मूलन m abolition
पेचीदा समस्या f complicated problem
प्राथमिकता f priority
वयस्क बालिग़, adult
तथ्यात्मक आकलन m fact-based evaluation
जागरूकता f awareness
अकल्पनीय unimaginable
मानवीय पक्ष m मानवीय पहलू m, human aspect
आर्थिक विषमता f economic disparity
समूल नष्ट करना to uproot
परिपक्व ripe, mature

Structural Review

1. व्यवसायिक The correc spelling is व्यावसायिक but व्यवसायिक is also frequently used in Hindi. Some similar words are संप्रदायिक/ सांप्रदायिक, व्यपारिक/ व्यापारिक.
2. तथ्यात्मक तथ्य+आत्मक; This is a productive device for creating many modifiers of this kind provided the first word ends in or . Examples: भावात्मक, हिंसात्मक, कलात्मक, काव्यात्मक, गद्यात्मक, चयनात्मक, धनात्मक, निंदात्मक, संशयात्मक, etc.
3. क्या किसी कठिन विषय पर प्रश्न पूछे जा रहे हैं

 

 

This is a passive construction. The structure of the passive construction is as follows – (subject-के द्वारा) – x – perfect form of main verb – passive marker जाना. The subject within parenthesis implies that it is optional. The subject is often left out in such constructions both in Hindi and English and that is one of the main reasons that a passive construction is used. In the verb phrase the passive marker is conjugated in the appropriate tense, gender and number.
4. होता यह आया है

 

The basic word order in Hindi is Subject – object – verb and hence this sentence in its unmarked word order would be with the subject first (यह होता आया है). However, Hindi word order is more flexible than in English. A general rule is that any component moved from its basic word order to the left is for emphasis and any component moved to the right is for de-emphasis.  In the current sentence  होता यह आया है the emphasis is on the word होता. In another sentence in the unit (छोटीसी उम्र में ही बहुत परिपक्व विचार हैं आपके) the word आपके has been moved to the right for less emphasis as the person referred to by आपके was obvious in the context).
5. बहुत अच्छे ! The word अच्छा can have different meanigs depending on the intonation and the context. A rising intonation, अच्छा? means “really?”, while a flat intonation बहुत अच्छा !  or बहुत अच्छे ! implies approval or a compliment meaning ‘that’s great!’.

Cultural Notes

1. Cultural differences in the presentation of arguments In the context of responding to a question, one often sees some difference between Hindi speakers and American speakers. Generally speaking, Hindi speakers like to first provide a background contextualizing their main point, and then the main response whereas Americans usually prefer to respond to the main point first and then provide additional information if needed.
2.  

बहुत अच्छे !

 

There are also some cultural differences in the use of ‘thank you’ as well as in the use of giving and accepting compliments. Both are much more frequent in English than in Hindi. Expressions of gratitude and responses to compliments may take different forms depending upon the relationship of interlocutors and the context (informal/formal).

Practice Activities (all responses should be in Hindi)

1. Do you think that the problem of child labor exists in Western countries? Are summer-jobs for school children in the United States an example of this?
2. Is there a relationship between poverty and child labor? If so, give some facts and figures in support of your response.
3. Can we consider children working in factories as a part of vocational training for their future?
4. बड़ा ही तथ्यात्मक आकलन है

How do you explain the formation of the word तथ्यात्मक? Suggest at least five other similar formations and use them in meaningful sentences.

5. उन्हें भी कम वेतन दिया जाता है

What will be the active voice version of the above sentence?

Comprehension Questions

1.Who was unhappy about questions about child labor?

a. Gajendra Verma

b. Mridula Sinha

c. Rajeshwar Prasad

d. Sukanya Agrawal

2.Who is most impressed with Gajendra’s performance?

a.B.L. Gupta

b.Rajeshwar Prasad

c.Mridula Sinha

d. All of them

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