Module 5

Previous | Next

Module Five – Business Culture

व्यावसायिक संस्कृति

Business Culture

a. Family-based Business

Module 5.1

 

व्यावसायिक संस्कृति

Business  Culture

 

 

 

व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत

Welcoming a Business Delegation

 

Text Level

 

Advanced

Modes

Presentational

Interactive

Interpretive

 

What will students know and be able to do at the end of this lesson?

Welcoming a foreign delegation and explaining local business enviroment

Text

(मॉरिशस का एक व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल भारत आया हुआ है। नेशनल चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स इंडस्ट्री द्वारा उनके स्वागत में एक समारोह का आयोजन किया जा रहा है जिसमें चैम्बर के अध्यक्ष श्री अनिल अग्रवाल द्वारा उक्त प्रतिनिधिमंडल को भारतीय व्यापार-जगत की प्रमुख विशेषताओं से अवगत कराया जा रहा है)

अनिल अग्रवाल – मॉरिशस से आए व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स की तरफ से हार्दिक स्वागत करता हूँ। वैसे तो प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्य पहले से ही हमारे साथ व्यापारिक और पारिवारिक रूप से जुड़े हैं लेकिन कई सदस्यों की यह पहली भारत-यात्रा है। अतः उन्हें भारत की  व्यावसायिक संस्कृति के बारे में विस्तार से बताने की ज़िम्मेवारी मुझे सौंपी गई है। आपसे अनुरोध है कि अगर आपके  मन में कोई जिज्ञासा हो तो ज़रूर पूछिएगा और मैं उसे शांत करने का  भरसक प्रयत्न करूँगा।

एक सदस्य – अग्रवाल जी ! भारत के व्यावसायिक जगत की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है जो इसे दुनिया के अन्य देशों से अलग करती है?

अनिल अग्रवाल – भारत के व्यावसायिक जगत की प्रमुख विशेषता है उसका व्यक्ति या खानदानपरक होना। दूसरे देशों में जैसा उत्पाद के ब्रांडों का बोलबाला होता है वैसा भारत में कम ही है। यहाँ सबसे बड़ा ब्रांड है टाटा, बिरला, अंबानी, गोदरेज और न कि इन व्यक्तियों के समूहों के उत्पाद। अमेरिका में बिल गेट्स और माइक्रोसॉफ़्ट दोनों समान रूप से प्रसिद्ध हैं जब कि भारत में व्यक्तिपरक उत्पाद को ही प्रमुखता मिलती है जैसे गोदरेज का फ्रिज़ या टाटा का नमक। यह भारत के व्यापारिक जगत की सबसे अनूठी बात है। कई एक बहुदेशीय कंपनियों ने इस को तोड़ने की कोशिश की पर वे आयातित मामलों में ही कुछ कर पाए, जैसेकि सोनी ने की पर घरेलू उत्पाद की स्थिति नहीं बदली ।

दूसरा सदस्य – यह तो वाक़ई एक अनूठी बात है लेकिन इसके पीछे कोई तो ठोस कारण होगा।

अनिल अग्रवाल – बात यह है कि जनाब, भारत के इन प्रतिष्ठित घरानों में कुछ का व्यापारिक इतिहास एक शताब्दी से ज़्यादा पुराना है और इस कालावधि में उनका ग्राहकों के साथ विश्वास का जो रिश्ता बना और वह निरंतर प्रगाढ़ ही होता गया।  हमारे यहाँ यह कहना कि फ़लाँ वस्तु टाटा या गोदरेज की बनी है उसकी उत्कृष्टता की गारंटी होती है और मज़े की बात यह है कि ग्राहक आँख मूँदकर उसे खरीद लेता है। 

एक अन्य सदस्य – अद्भुत ! वाक़ई अद्भुत !

अनिल अग्रवाल- इसके अतिरिक्त भारत के व्यापारिक जगत में नियोक्ता-मज़दूर का संबंध भी अपने-आप में अनूठा है। वैसे तो संगठित क्षेत्र में संबंध वैश्विक सिद्धांतों पर चलता ही है लेकिन असंगठित क्षेत्र में नियोक्ता-मज़दूरों में एक विशेष किस्म का अनुराग देखने को मिलता है और शायद यही कारण है कि वैधानिक दाव-पेंचों से दूर यह क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत है। यहाँ मालिक-मज़दूर के संबंध कुछ अलग भी हैं और यह मालिक मज़दूरों की हारी-बीमारी में आर्थिक और भावनात्मक सहयोग करता है। कभी-कभी ये संबंध पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहने से मालिक के नफ़े और नुकसान में भी मज़दूर सहभागी होते हैं।

पहला सदस्य – यह तो एक अनोखी बात है पर इन सबके बावज़ूद भारत वैश्विक बाज़ार में कैसे प्रतियोगी बना हुआ है?

अनिल अग्रवाल – बात यह है कि भारत के संगठित क्षेत्र में अनेकों ऐसी कंपनियाँ हैं जोकि वैश्विक स्तर बनाए हुए हैं और पुरानी कंपनियों ने भी वैश्विक बाज़ार के लिए अपने मानदंडों को बदला है। आज विश्व के परिदृश्य में भारत की भागीदारी बढ़ी है। साथ ही साथ भारत का बाज़ार आज अमेरिका की जनसंख्या के बराबर पहुँच गया है। ऐसे में भारत की आर्थिक ताक़त को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है।

दूसरा सदस्य – अग्रवाल जी, आपकी बातों ने हमारी आँखें खोल दी हैं। यह मेरी पहली भारत यात्रा थी और पहली यात्रा में ही मैं भारत के बारे में अपनी धारणा बदलने को मज़बूर हो गया हूँ।

अनिल अग्रवाल – बहुत बहुत धन्यवाद ! उम्मीद है मैंने जो जानकारियाँ दी हैं वे भारत के साथ आपके व्यापारिक संबंध बढ़ाने में सहायक होंगी और भारत के बारे में जो मिथ हैं वे भी काफ़ी हद तक दूर हो गए होंगे।

कई सदस्य- (एक साथ ) हाँ , हाँ . बिल्कुल बिल्कुल !!!

अनिल अग्रवाल- अंत में मैं आप सबको चैम्बर के इस कार्यक्रम में पधारने व उसकी शोभा बढ़ाने के लिए दिल से धन्यवाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि हमारे द्विपक्षीय संबंध सुदृढ़  होंगे। नमस्कार !

सब एक साथ – नमस्कार !

(सब अनिल जी को धन्यवाद देते हैं। सब एक दूसरे का अभिवादन करते हैं और अनिल अग्रवाल सबको विदा करते हैं) 

Glossary

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल m business delegation
समारोह m celebratory event
व्यावसायिक संस्कृति f business culture
अनुरोध m प्रार्थना f, विनती f, request
जिज्ञासा f जानने की इच्छा f, desire to know
खानदानपरक related to the extended family, खानदानी, पारिवारिक
प्रतिष्ठित मान्य, सम्माननीय, respected
शताब्दी f सदी f, century
कालावधि f duration
फ़लाँ वस्तु f certain thing
उत्कृष्टता f excellence
हारी-बीमारी f mental or physical sickness
पीढ़ी-दर-पीढ़ी generation after generation
वैश्विक सार्वभौमिक, global
प्रतियोगी m/f प्रतिद्वंद्वी m/f, प्रतिस्पर्धी m/f, competitor
संगठित क्षेत्र m organized sector
मानदंड m criterion
परिदृश्य m scenario
अंदाज़ करना to overlook
द्विपक्षीय संबंध m bilateral relations

Structural Review

1. Use of passive voice constructions in Hindi Use of passive voice constructions is much more common in Hindi than in English. Structurally, the verb phrase consists of the perfective form of the main verb followed by the passive marker जाना, which is conjugated in the appropriate tense and number. This unit has multiple examples of passive voice constructions.
2. जिज्ञासा

 

With the help of different suffixes we can derive many new words from जिज्ञासा. For example, we can derive जिज्ञासु, जिज्ञासावान, जिज्ञासापूर्वक, जिज्ञासाजनक, जिज्ञासापरक, जिज्ञासाहीन, जिज्ञासित (व्यक्ति)
3. Generation of new words

 

 

Sanskrit provides linguistic tools to coin and derive new words. Besides prefixes and suffixes, compounds also generate new words. See the following compound words from this unit –प्रतिनिधिमंडल, व्यापार-जगत, शताब्दी, परिदृश्य, बहुदेशीय, द्विपक्षीय. We can also generate new words like मित्रमंडल, मित्र-जगत, त्रिदेशीय, पंचपक्षीय, etc.

Cultural Notes

1. इस कार्यक्रम में पधारने व उसकी शोभा  बढ़ाने के लिए पधारना व शोभा  बढ़ाना is a ritual formulaic expression used in invitation cards and other formal contexts to welcome guests.
2. नियोक्ता-मज़दूरों में एक विशेष किस्म का अनुराग देखने को मिलता है

 

This is a traditional context where a hierarchical relationship is well-established on both sides, of employer and employee, and where both respect and care about each other. This situation is found in homes of some people who employ help at home, and in some family-owned commercial establishments. If the employee is older in age, members of the younger generation in the family would address him using a kinship term, such as ‘uncle’.

Practice Activities (all responses should be in Hindi)

1. From your own research and experience make a short statement about the business culture in India and how it is gradually changing with the new generation.
2. Write five bullet-points that you would like to provide for cultural orientation of American workers in India.
3. A discussion: to what extent the knowledge of both English and Hindi is important for success in India’s business world.
4.  What are American perceptions about doing business in India?
5. उनका ग्राहकों के साथ विश्वास का जो रिश्ता बना और वह निरंतर प्रगाढ़ ही होता गया

What are some of your ideas for creating a loyal clientele for any product?

6. भारत के बारे में जो मिथ हैं वे भी काफ़ी हद तक दूर हो गए होंगे

Make three sentences with a presumptive verb with होगा, होंगे, होगी, होंगी. An example of the presumptive verb usage can be seen in the Hindi sentence above.

Comprehension Questions

1. How many major characteristics of Indian business did Anil Agrawal elaborate?

a. one

b. two

c. three

d. four

2.Which option is the best description of the delegates’ reaction to Mr. Agrawal’s presentation?

a. enthusiastic

b. partially complimentary

c. critical

d. unenthusiastic

Previous | Next

Skip to toolbar