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Module 12

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Module Twelve – Globalization

Module 12

भूमंडलीकरण

Globalization

Globalization and World Trade Organization (1)

Module 12.1

भूमंडलीकरण -1

भूमंडलीकरण और विश्व व्यापार संगठन (1)

 

मेरे भूमंडलीकरण के संबंध में साफ विचार हैं। अर्थशास्त्र में एक पुरानी बात बतलाई जाती है । यदि व्यापार और पूंजी निवेश के आधार पर गरीब देश का संबंध अमीर देश के साथ स्थापित हो जाता है तो कालांतर में दोनों देशों का जीवन स्तर समान हो जाता है । इसे थ्योरम आफ कंवर्जेंसकहा जाता है। यह एडम स्मिथ का विचार है। 20वीं सदी के नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पाल सैमुअलसन ने  इस सिद्धांत को सिद्ध भी कर दिया था।

यह विचार सीधा सा है; जीवनस्तर उत्पादकता पर निर्भर करता है और उत्पादकता प्रौद्योगिकी पर निर्भर करती है। यह स्वत:सिद्ध है। अब हमें यह समझ लेना चाहिए कि गरीब देश अमीर देश से प्रौद्यौगिकी प्राप्त कर लेते हैं। उन्हें इसका पुनर् आविष्कार नहीं करना पड़ता। इससे गरीब देशों को काफी लाभ होता है। उदाहरण के लिए आज हमारे यहां कंप्यूटर, टेलीफोन और दूरसंचार प्रणाली जैसी वस्तुएं हैं । इनका हम लोगों ने आविष्कार नहीं किया है बल्कि अमीर देशों से प्राप्त प्रौद्यौगिकी के माध्यम से विकसित किया है। इन वस्तुओं के प्रयोग से हमारा जीवन स्तर बदला है। ऊंचा उठा है। मैं समझता हूं कि यह परिवर्तन भूमंडलीकरण का प्रतीक है।

पिछले 50 वर्षों में गरीब देश एक प्रकार के बंद समाज थे। वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े हुए नहीं थे। व्यापार बहुत सीमित था। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बहुत क्रांति हुई है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के दो विद्वान हुआ करते थे। एक थे जेफरी सैक्स और दूसरे थे एनड्रू वाफ। इन दोनों ने करीब 87 गरीब देशों की अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया था। अध्ययन काल था 1965 से 1990। इस 25 साल की अवधि के अध्ययन  में इन दोनों अर्थशास्त्रियों का निष्कर्ष था कि 87 में से 74 देश बंद देश हैं । ये भूमंडलीकरण की प्रक्रिया से जुड़े नहीं थे। इनका व्यापार सीमित था। इसके विपरित 13 देश खुले देश थे वे वैश्विक व्यापार प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन खुले देशों की विकास दर बंद देशों की विकास दर से सात गुना अधिक थी। ये देश पूर्वी एशिया के थे। इसे कहते हैं  कंवर्जेस। तीसरी दुनिया के 74 देशों का कंवर्जेंस नहीं हुआ था। इसलिए वे दूसरे देशों से विकास दर में पिछड़ गए। अत: पूर्वी एशियाई देशों ( दक्षिण कोरिया, ताईवान, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया आदि) की विकास दर पाने के लिए विश्व व्यापार के साथ सहमत होना जरूरी है। संक्षेप में खुले समाज भूमंडलीकरण का हिस्सा हैं जबकि बंद समाज इससे बाहर हैं। पूर्व समाजवादी देश बंद समाज थे। वे भूंडलीकरण में शामिल नहीं थे। इसलिए उनकी अर्थव्यवस्थाएं पिछड़ती चली गईं।

1970 में विश्व आबादी का 20 प्रतिशत भाग खुले समाज का हिस्सा था और भूमंडलीकरण से जुड़ा हुआ था। आज नब्बे प्रतिशत आबादी इस प्रक्रिया से जुड़ चुकी है। चीन और भारत के इसमें शामिल होने से इसका प्रतिशत जबरदस्त ढंग से बढ़ा है। इसे सही ढंग का भूमंडलीकरण कहा जा सकता है। जबसे साम्यवाद का अंत हुआ है तबसे इस प्रक्रिया में तेजी आई है। आज बिजनेस प्रोसेस आउट-सोर्सिंग ‘ (बीपीओ) का सिलसिला चल रहा है, जिसके प्रतीक काल-सेंटर जैसे संस्थान हैं। इससे सभी को लाभ हो रहा है। इन काल-सेंटरों को भूमंडलीकरण के बच्चेकहा जा सकता है। अत: मेरी दृष्टि में थ्योरम आफ कंवर्जेंस भूमंडलीकरण का सबसे अच्छा उदाहरण है।

आज भारत की विकास दर छह प्रतिशत है । पिछले 24 वर्षों में यह स्तर बना हुआ है। इससे पहले हमारी कम वार्षिक विकास दर 1950 से 1980 के बीच बनी हुई थी। पश्चिमी देशों में जबसे औद्योगिकीकरण की शुरुआत हुई है उस समय वहां की विकास दर तीन प्रतिशत थी। करीब एक सदी तक यह प्रतिशत लगभग स्थिर रहा। अत: यदि हमारी विकास दर छह प्रतिशत की दर से जारी रहती है और जनसंख्या दर में कमी बनी रहती है तो भविष्य में  भारत की प्रति व्यक्ति आय दर में वृद्धि होगी। वर्तमान में क्रयशक्ति समानता’ (परचेसिंग पावर पैरिटी) के आधार पर वार्षिक आय 2600 यू एस डालर है जो वर्ष 2020 में 5700 डालर हो जाएगी। इसके बाद 2040 में 16600 डालर और 2066 में बढ़कर 37500 हो जाएगी। संक्षेप में वह वर्तमान में अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय दर के समान हो जाएगी। क्योंकि अमेरिका की वार्षिक विकास दर तीन है और हमारी छह। दोनों देशों की आय कंवर्जेंस होकर रहेगी। अभी मैं यह कह सकने की स्थिति में नहीं हूं कि यह कब होगी?  इसका हिसाब अभी लगाया जा रहा है। लेकिन मेरा मत है कि इसी सदी में कंवर्जेस होकर रहेगा। लेकिन चीन का कंवर्जेस हमसे बीस साल पहले होगा क्योंकि उसकी विकास दर आठ प्रतिशत वार्षिक है जो भारत से दो प्रतिशत अधिक है। भूमंडलीकरण के कारण हमारी छह प्रतिशत की यह विकास दर सात तक पहुंचने वाली है। यदि भारत में नेहरू-कालीन समाजवादी अर्थव्यवस्था नहीं होती तो असमानता और पहले दूर हो सकती थी।

एक बात और समझ लीजिए। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबद्ध होने के कारण ही देशों में समृद्धि आई है। कोई भी देश यह दावा नहीं कर सकता कि उसने स्वयं के बल पर ही समृद्धि अर्जित की है। अमेरिका भी जिसका अपवाद नहीं है। 19 वीं सदी में अमेरिका में ब्रिटिश पूंजी निवेश ने काफी बदलाव किया था। इसे भी निरंतर व्यापार की जरूरत रही है। अमेरिका का दक्षिणी हिस्सा उत्तरी भाग की तुलना में काफी गरीब था। लेकिन द्वितीय महायुद्ध के दौरान एयर कंडीशनिंग के आविष्कार के कारण दक्षिणी हिस्से में काफी बदलाव आया। इसी तरह योरोप में इटली और स्पेन बहुत गरीब देश हुआ करते थे। लेकिन दूसरे महायुद्ध के बाद इनकी अर्थव्यवस्थाएं भी बदलीं। 1970 तक इन देशों में काफी समृद्धि आई। कंवर्जेस प्रक्रिया शुरू हो गई। जीवन स्तर में समानता आने लगी। मैं मानता हूं कि अमेरिका और योरोप के देशों में काफी हद तक आय-समानता आ चुकी है। यह सब कंवर्जेस की बदौलत है। यही कारण है कि हांगकांग की प्रति व्यक्ति आय इंग्लैण्ड  से अधिक है। 1951 में भारत और कोरिया की प्रति व्यक्ति आय 100 डालर थी लेकिन कंवर्जेंस के कारण कोरिया की प्रति व्यक्ति आय 12 हजार डालर हो गई है और हमारी वास्तविक आय 550 डालर तक ही पहुंच सकी है क्योंकि भारत कंवर्जेस की प्रक्रिया से दूर रहा है।

(जारी)

(समयांतर द्वारा प्रकाशित और रामशरण जोशी द्वारा संपादित पुस्तक वैश्वीकरण के दौर में’  से साभार। यह लेख गुरचरण दास के साक्षात्कार पर आधारित है,पुस्तक का प्रकाशन वर्ष 2006)

–   गुरचरणदास

उपयोगी शब्दार्थ

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

भूमंडलीकरण m

अर्थशास्त्र m

निवेश m

जीवनस्तर m

सिद्धांत  m

उत्पादकता f

प्रौद्योगिकी f

स्वत:सिद्ध

पुनर् आविष्कार m

दूरसंचार प्रणाली f

प्रतीकm

वैश्विक अर्थव्यवस्था f

विश्वयुद्ध m

अंतर्राष्ट्रीय

क्रांति f

निष्कर्ष m

प्रक्रिया f

विकास दर f

साम्यवाद m

औद्योगिकीकरण m

समृद्धि f

अपवाद m

globalization

economics

investment

standard of living

theory

productivity

technology

self-proven

re-invention

telecommunication system

symbol

global economy

world war

international

revolution

conclusion

process

rate of development

communism

industrialization

prosperity

exception

Linguistic and Cultural Notes

1. Hindi has evolved from Sanskrit and it still depends on the latter for satisfying its many linguistic needs, particularly in the area of lexical expansion to accommodate new products and concepts. However, Hindi diverges from Sanskrit slightly in three areas. The first is Sandhi. Long words like पुनर् आविष्कार would be written in Sanskrit as पुनराविष्कार (by joining the two words together) but in Hindi many would write them separately as above to make them easier to read. The second area is in the use of short and long vowels. Many Sanskrit (but certainly not all) words like धर्मच्युति+करण would be written in Sanskrit with a long as in धर्मच्युतीकरण but many Hindi writers are likely to write it as धर्मच्युतिकरण. Words like भूमण्डलीकरण will not be written with a short in Hindi as there was no short in भूमण्डल to begin with. The third area of divergence is semantic change. Many newly coined words are fixed in a certain meaning, which is not necessarily what their etymology would suggest. For example – the word उद्योग has the meaning of ‘effort’ in Sanskrit but the word is now conventionalized in the sense of ‘industry’ in Hindi.

2. The author of the above article is Gurcharan Das who is a well-known thinker in the field of economics. He was the CEO of Proctor & Gamble in India and now writes columns regularly in multiple newspapers. His well- known books are India Unbound and The Difficulty of Being Good.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

भूमंडलीकरण

जीवन

वैश्विक

अंतर्राष्ट्रीय

निष्कर्ष

वैश्वीकण

ज़िंदगी

सार्वभौमिक, सांसारिक               

अंतरराष्ट्रीय

परिणाम

Structurally Related Words (Derivatives)

सिद्धांत. सैद्धांतिक

उत्पाद, उत्पादन, उत्पादक, उत्पादकता, उत्पाद्य

उद्योग, उद्योगपति, औद्योगिक, औद्योगिकीकरण, प्रौद्योगिकी

आविष्कार, आविष्कृत, आविष्कारक

प्रतीक, प्रतीकात्मक

युद्ध, महायुद्ध, विश्वयुद्ध

राष्ट्र, राष्ट्रीय, राष्ट्रीयता, अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीयता अंतरराष्ट्रीय, अन्तरराष्ष्ट्रीयता, बहुराष्ट्रीय

क्रांति, क्रांतिकारी, क्रांतिकारक

क्रिया, प्रक्रिया, प्रतिक्रिया, प्रतिक्रियात्मक, सक्रिय, सक्रियता, निष्क्रिय, निष्क्रियता

विकास, विकसित, अविकसित, विकासशील

समृद्ध, समृद्धि

Comprehension Questions

1. According to the author, globalization process has brought greater benefits to

a. rich nations

b. poor nations

c. all nations

d. some nations

2. Based on the text, what is about the growth rate?

a.  Western countries’ growth rate is increasing.

b.  India’s growth rate will catch up with the U.S.

c.  India’s growth rate will surpass China in 20 years.

d.  India and China will surpass the United States.