Module 3

Module Three – Cottage Industry

कुटीर उद्योग

Cottage Industry

Nirma Group

Module 3.1

कुटीर उद्योग -1

निरमा समूह


परिचय

निरमा समूह पश्चिमी भारत के अहमदाबाद शहर में स्थित है जो सौंदर्य प्रसाधन, साबुन, डिटर्जेंट, नमक, सोडा राख, प्रयोगशाला और चिकित्सकीय इंजेक्टिबल्स से लेकर विभिन्न उत्पादों के  विनिर्माण पर आधारित कंपनियों का एक समूह है। आज निरमा के 15000 से अधिक कर्मचारी हैं और 3550 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार है। 2004 में एक एकल ब्रांड निरमाके अंतर्गत निरमा र्डिटर्जेंट की बिक्री 800,000 टन तक पहुँच गई जो विश्व में अधिकतम बिक्री का रिकार्ड माना जाता है। वर्ष 2000 में निरमा  टॉयलेट साबुन के बाज़ार का 15% से ज्यादा और डिटर्जेंट बाजार में 30% का हिस्सा था। मार्च 2000  की समाप्ति तक निरमा के कारोबार में पिछले वित्त वर्ष से 17% अधिक की वृद्धि हुई थी जो 12.17 बिलियन रुपये थी।

निरमा कैसे शुरू हुआ?

निरमा 1969 में एक व्यक्ति और एक उत्पाद के रूप में 100 वर्ग फुट के एक कमरे में शुरू हुआ और तीन दशकों के भीतर वह एक बहुत ही सफल कंपनी बन गई। कंपनी का उद्देश्य था , “बेहतर उत्पाद, बेहतर मूल्य, बेहतर जीवन“ प्रदान करना जिसने  इसकी  सफलता में महत्वपूर्ण योगदान किया।

1969 में डॉ. करसनभाई पटेल ने, जो गुजरात सरकार के खनन और भूविज्ञान विभाग में एक रसायनज्ञ थे, फॉस्फेट मुक्त सिंथेटिक डिटर्जेंट पाउडर निर्मित  किया और स्थानीय स्तर पर उसे बेचना  शुरू कर दिया। नए पीले पाउडर की कीमत 3.50 रु. प्रति किलो थी जबकि हिन्दुस्तान लीवर के उतने ही सर्फ़ की कीमत 15 रुपये थी। जल्द ही, गुजरात में उनके गृहनगर में निरमा की मांग बढ़ गई। अपने घर के एक 10x10ft कमरे में इस पाउडर की पैकिंग शुरू की और अपने इस पाउडर का नाम निरमा अपनी बेटी निरुपमा के  नाम पर रखा था। शुरुआत में पटेल साइकिल पर घर से कार्यालय जाते हुए एक दिन में 15-20 पैकेट ही बेच पाते थे लेकिन 1985 तक निरमा वाशिंग पाउडर देश के कई भागों में सब से लोकप्रिय बन गया था।

बाज़ारी प्रतिस्पर्धा

निरमा ने सफलतापूर्वक हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड से कड़ा  मुकाबला किया और टॉयलेट साबुन के बाजार में खुद के लिए एक विशिष्ट जगह बना ली। निरमा ब्रांड कम कीमतवाले डिटर्जेंट और टॉयलेट साबुन के लिए लगभग एक पर्यायवाची नाम बन गया। हालांकि निरमा ने महसूस किया कि बाजार के उच्च आयवर्ग के लिए नए उत्पादों को लांच करना होगा ताकि वह अपने मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के साथ साथ ऊपरी आय वर्ग में भी अपनी जगह बना सके। इस दृष्टि से निरमा ने कंपनी के प्रीमियम सेगमेंट के लिए टॉयलेट साबुन का शुभारंभ किया। हालांकि विश्लेषकों को अनुमान था कि निरमा प्रीमियम सेगमेंट में अपनी सफलता की कहानी को दोहराने में सक्षम नहीं होगा पर उनका अनुमान सच नहीं निकला।   

  1999 से निरमा एक ऐसा प्रमुख उपभोक्ता ब्रांड बन गया जो डिटर्जेंट, साबुन, और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों की एक शृंखला का निर्माण कर बाज़ार में स्थापित हो गया था। कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद की अपनी सोच के तहत भारत में अपनी विनिर्माण सुविधाओं के लिए निरमा ने छ्ह स्थानों में नवी नतम प्रौद्योगिकी का उपयोग शुरू किया। साबुन और डिटर्जेंट बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धी ब्रांड के होते हुए भी निरमा की सफलता का श्रेय इसके वितरण की पहुंच और बाजार में इसकी पैठ के कारण संभव हो सका था। जल्दी ही निरमा के नेटवर्क में 400 वितरक और देश भर में 2 लाख से अधिक खुदरा दुकानें शामिल हो गईं। इस विशाल नेटवर्क के कारण निरमा अपने उत्पादों को छोटे छोटे गांवों तक उपलब्ध कराने में सक्षम हो सका है। 

वैश्विक परिदृश्य

  अपने आपको भारत में स्थापित करने के बाद निरमा ने अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में अपने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए और सब से पहले बांग्लादेश में एक संयुक्त उद्यम प्रारंभ किया। फिर मध्य दक्षिण चीन, अफ़्रीका और बाकी एशियन देशों की तरफ कदम बढ़ाए। नवम्बर 2007 में निरमा ने अमेरिकी कच्चे माल की कंपनी Searles  Valley Minerals Inc. खरीद ली और दुनिया के सात शीर्ष सोडा ऐश निर्माताओं के बीच स्थान बना लिया।

            निरमा उन कुछ नामों में से है जो एक सच्चे भारतीय ब्रांड की तरह पहचाना जाता है, जिसने  शक्तिशाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर विजय हासिल की और विपणन नियमों को अपने ढंग से बनाया ताकि उपभोक्ताओं का दिल जीत सके। निरमा  डॉ. करसन भाई पटेल की गरीबी से अमीरी “ की गाथा और  कड़ी प्रतिस्पर्धा में भारतीय उद्यमशीलता की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

पुरस्कार

निरमा की इस अपार सफलता के पीछे जिस आदमी का हाथ रहा वे हैं इसके संस्थापक डॉ0 करसन भाई पटेल। उन्हें समय समय पर विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। सबने उनकी क्षमता, कौशल, उद्यमिता और  विभिन्न क्षेत्रों में की गई उनकी सेवाओं को मान्यता दी।

साबुन और डिटर्जेंट के लिए निर्मित भारत सरकार की  विकास परिषद के वे दो बार अध्यक्ष चुने गए। गुजरात डिटर्जेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। फेडरेशन ऑफ गुजरात, नई दिल्ली के लघु स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा उद्योग रत्न की उपाधि से विभूषित हुए। गुजरात के वाणिज्य और उद्योग चैंबर, अहमदाबाद द्वारा 1990 में उत्कृष्ट  उद्योगपति के सम्मान से और 1998 में गुजरात व्यवसायी पुरस्कार से नवाजे गए। रोटरी इंटरनेशनल जिला 2000 द्वारा कॉर्पोरेट गवर्नेंस में उत्कृष्टता पुरस्कार मिला। वर्ष 2001 में  श्री करसन भाई को फ्लोरिडा अटलांटिक विश्वविद्यालय, फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा एक समाजसेवी और व्यापारी के रूप में उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।

उपयोगी शब्दार्थ

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कुटीर उद्योग m

सौंदर्य प्रसाधन m

प्रयोगशाला f

विनिर्माण m

वित्त वर्ष m

खनन और भूविज्ञान विभाग m

रसायनज्ञ m/f

स्थानीय स्तर m

गृहनगर m

पर्यायवाची नाम m

शुभारंभ m

विश्लेषक m/f

सक्षम

शृंखला f

गुणवत्ता f

नवीनतम प्रौद्योगिकी f

श्रेय m

वितरण  m

खुदरा

वैश्विक परिदृश्य m

संयुक्त उद्यम m

गाथा f

कड़ी प्रतिस्पर्धा f

उद्यमशीलता f

उत्कृष्ट उदाहरण f

कौशल m

उद्यमिता f

मान्यता f

उपाधि f

विभूषित होना

वाणिज्य और उद्योग चैंबर m

नवाज़ा जाना

असाधारण उपलब्धि f

cottage industry

makeup (for beauty enhancement)

laboratory

manufacturing

financial year

mining and geology department

chemist

local level

home town

synonym

auspicious beginning

analyst

competent

chain

quality

latest technology

credit

distribution

retail

global scenario

joint venture

story

stiff competition

industrious nature

excellent example

expertise/skill

industrial expertise

recognition

degree

to be decorated

Business and Industry Chamber

to be awarded

extraordinary achievement

Linguistic and Cultural Notes

1. निरमा ने कंपनी के प्रीमियम सेगमेंट के लिए टॉयलेट साबुन का शुभारंभ किया – The word शुभारंभ deserves a comment here. Linguistically it is composed of two words शुभ and आरंभ. The word शुभ means good, auspicious, or promising success. It is also seen in usages like आपका शुभ नाम क्या है? which is sometimes translated in Indian English as ‘what’s your good name?’. Other collocations are शुभ विवाह, शुभ अवसर, शुभ समय, शुभ तिथि, शुभ लाभ, etc.

2.  .  As the word ‘cottage’ implies, cottage industry is essentially a small scale industry that originates in a home with domestic labor. It starts with a small capital, is generally low-tech and producing everyday consumer goods. India has seen the transformation of many cottage industries into big businesses.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.  

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

सौंदर्य

पर्यायवाची

सक्षम

शृंखला

वितरण

खुदरा

वैश्विक

गाथा

प्रतिस्पर्धा

उदाहरण

कौशल

असाधारण

सुंदरता, ख़ूबसूरती

समानार्थक

समर्थ

कड़ी

बांटना

परचून

सार्वभौमिक

कथा, कहानी

स्पर्धा, मुकाबला, प्रतियोगिता, प्रतिद्वन्द्विता

मिसाल, दृष्टांत

कुशलता, प्रवीणता, प्रावीण्य

विशेष, विशिष्ट

Structurally Related Words (Derivatives)

साधन, प्रसाधन, संसाधन

निर्माण, विनिर्माण

भाग, विभाग, प्रभाग, भागीदारी

स्थान, स्थानीय

विश्लेषण, विश्लेषक, विश्लेषणात्मक

क्षम, अक्षम, क्षमता, सक्षम

दृश्य, दृश्यता, परिदृश्य

स्पर्धा, प्रतिस्पर्धा, प्रतिस्पर्धी

पुरस्कार, पुरस्कृत

कुशल, कुशलता, कौशल

भूषण, आभूषण, विभूषित

Comprehension Questions

1. Which of the following statements is inconsistent with the text?

a. Nirma had started a joint venture in Bangladesh.

b. Initially Nirma did not capture the upperclass market.

c. Nirma merged with the American company Searles.

d. Dr. Patel named his product after his daughter.

2. How many times was Dr. Patel honored with an award?

a. 4

b. 5

c. 6

d. 7

Amul Dairy

Module 3.2

कुटीर उद्योग -2

अमूल डेयरी

परिचय

अमूल भारत का एक दुग्ध सहकारी आन्दोलन है। यह एक ब्रान्ड नाम है जो गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड नाम की सहकारी संस्था के प्रबन्धन में चलता है। गुजरात के लगभग 26 लाख दुग्ध उत्पादक सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड के अंशधारी (मालिक) हैं।

अमूल, संस्कृत के अमूल्य का अपभ्रंश है; अमूल्य का अर्थ है – जिसका मूल्य न लगाया जा सके। अमूल, गुजरात के आणंद नामक नगर में स्थित है। यह सहकारी आन्दोलन की दीर्घ अवधि में सफलता का एक श्रेष्ठ उदाहरण है और विकासशील देशों में सहकारी उपलब्धि के श्रेष्ठतम उदाहरणों में से एक है। अमूल ने भारत में श्वेत क्रान्ति  की नींव रखी जिससे भारत संसार का सर्वाधिक मात्रा वाला दुग्ध उत्पादक देश बन गया। अमूल ने ग्रामीण विकास का एक सम्यक मॉडल प्रस्तुत किया है।

अमूल (आणंद सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ) की स्थापना 14 दिसंबर,1946 में एक डेयरी यानी दुग्ध उत्पाद सहकारी आंदोलन के रूप में हुई थी। इसे गुजरात सहकारी दुग्ध वितरण संघ के द्वारा प्रचारित और प्रसारित किया गया। अमूल के प्रमुख उत्पाद हैं: दूध, दूध का पाउडर, मक्खन, घी, चीज़,पनीर, दही, चॉकलेट, श्रीखण्ड, आइसक्रीम, गुलाब जामुन, न्यूट्रामूल आदि।

अमूल डेयरी के जन्म की कहानी

किसानों की जिन्दगी गुजरात के खेडा जिले में बहुत ही मुश्किल और दयनीय हुआ करती थी जैसे भारत के कुछ हिस्सों में अभी भी है। फिर उनकी मेहनत का जो पैसा हुआ करता था वह कमीशन की तरह दलाल खा जाया करते थे। इस मुश्किल  को कम करने के लिए किसानों ने सोचा कि हम खुद अपना उत्पादन करें और फिर उसको जाकर बाजार में बेचें। इस क्रान्तिकारी सोच ने ही अमूल को जन्म दिया।

अमूल तब शुरू हुआ था जब हमारा देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे  दूरदर्शी और क्रान्तिकारी नेता ने सोचा कि  किसानों को आर्थिक मजबूती तभी प्रदान की जा सकती है जब वे दलालों की मजबूत पकड़ से बाहर आ सकेंगे। 4 जनवरी 1946 में स्मारखाँ (खेडा जिला) गुजरात में एक मीटिंग में इस पर विचार किया गया कि हमको सहयोगी गाँवों में दुग्ध उत्पादन केंद्र  बनाने चाहिए। फिर पहली सहकारी संस्था आनंद में बनाई गई जहाँ छोटे किसानों ने साथ में आकर हाथ मिलाया और एक गाँव का एक सहकारी समूह तैयार किया जिसने अमूल के नाम से पूरे देश में सफलता प्राप्त की। इसका पंजीकरण दिसम्बर 1946 में किया गया और फिर मुम्बई योजना के अन्दर दुग्ध उत्पादन की सप्लाई 1948 में शुरू की गई। 1973 में यह गुजरात सहकारी दुग्ध मार्केटिंग फ़ेडरेशन लि. में तबदील हो चुकी थी और अमूल के नाम से लोकप्रिय हुई।

अमूल के काम का मॉडल

अमूल 6 मिलियन लीटर दूध रोज 10,755 गाँवों से एकत्रित करता है और ये गाँव पूरे गुजरात में फैले हुए हैं। लोगों तक एक अच्छा उत्पाद पहुँचाने के लिए अमूल द्वारा इसमें एक 3 टीयर मॉडल का इस्तेमाल किया जाता था – जिसमें पहले गाँव में एक संस्था से दूध लिया जाता था (जो प्राइमरी प्रोडयूसर हुआ करते थे)। फिर यह दूध जिले के सहयोगी दुग्ध भंडार के पास जाता था। वे दूध को पर्याप्त तापमान पर रखते थे और उसको रखने के लिए उसमें रासायनिक पदार्थ डाले जाते थे और फिर तीसरे चरण में वह दूध फेडरेशन (जो दूध की प्रोसेसिंग और उसको बाजार में बेचने का काम करता था) तक पहुँचता था। इस माडल में से दलाल/ बिचौलिए को पूरी तरह हटाया जा चुका था और यही गाँव के लोगों के मुनाफ़े का स्रोत बना।

एक क्रांतिकारी परिवर्तन

अपनी एक मीटिंग में अमूल के चेयरमैन वी. कुरियन ने कहा – “सहयोग से काम करना और सबके साथ काम करना” उनकी सबसे पहली सोच है । यह उन इंसानों का विश्वास है कि जब लोग साथ में काम करते हैं तो वे अपने खुद के बारे में कम सोचते हैं और अपनी टीम के बारे में ज़्यादा सोचते हैं। इसी सोच ने यह चमत्कार और जादू कर दिखाया है कि अमूल कम्पनी आर्थिक और व्यापारिक रूप से एक मजबूत कम्पनी बन गयी।

            2004 तक अमूल 20 लाख  किसानों का, जो पूरे गुजरात में फैले हुए थे, रोज़ी- रोटी का बहुत बड़ा ज़रिया बना हुआ था और ग्राहकों को भी कम पैसों में एक अच्छा उत्पाद पहुँचता था। बाजार में इतनी प्रतिस्पर्धा के होते हुए भी ब्रांड अमूल हर रोज सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करता रहा। इसमें उनकी पैकेजिंग तकनालोजी और नई तकनीकें अपनाने का राज़ था। अमूल की केंद्रीय टीम आज भी वही है जो पहले हुआ करती थी और विज्ञापन एजेंसी भी वही है उसमें भी कोई बदलाव लाया नहीं गया। 

अमूल पूरे देश  की पहचान बन गया है। अमूल का “ Utterly Butterly campaign”  सबसे ज्यादा चलने वाला विज्ञापन था और इसको गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड  में भी शामिल किया गया था क्योंकि कम्पनी का मानना था कि हम एक बहुत  ‘‘सीधी, आसान, एक नई सोच के साथ और अपने ग्राहकों को एक सा उत्पाद प्रदान करने वाली कम्पनी  हैं। “ अमूल ने कभी कोई बड़ी अभिनेत्री को अपने विज्ञापन में इस्तेमाल नहीं किया  क्योंकि वह अपने आप को आम आदमी से जोड़ना चाहते थे। अमूल की सफलता उसकी सोच और उसकी मार्केटिंग पर रही जिसमें उसने ऐसे उत्पाद बनाए जहाँ भारतीय या गाँव के लोगों को एहसास था कि अगर हम अपने घरों  में भी दूध मक्खन का उत्पादन करेंगे तो हमको इससे सस्ता नहीं पड़ने वाला। लोगों  को उन पर एक विश्वास था कि अगर यह हमारे जैसे किसानों के घरों से ही निकल कर बाजार में उपलब्ध हो रहा है तो यह गलत चीज़ नहीं हो सकती। आज पूरे देश में अमूल के 50 विक्रय कार्यालय हैं, 3000 थोक डीलर्स  और 5,000 से भी ज्यादा  खुदरा विक्रेता हैं।

उपयोगी शब्दार्थ

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दुग्ध सहकारी आन्दोलन m

दुग्ध विपणन संघ m

प्रबन्धन m

उत्पादक m/f

अंशधारी m/f

अमूल्य

अपभ्रंश m

दीर्घ अवधि f

श्रेष्ठ उदाहरण m

विकासशील देश m

श्वेत क्रान्ति f

स्थापना f

दयनीय

दलाल m/f

क्रान्तिकारी सोच f

दूरदर्शी

आर्थिक मजबूती f

पंजीकरण m

एकत्रित करना

पर्याप्त तापमान m

रासायनिक पदार्थ m

स्रोत m

परिवर्तन m

चमत्कार m

ज़रिया m

प्रतिस्पर्धा f

कीर्तिमान m

विज्ञापन m

अभिनेत्री f

एहसास m

उपलब्ध होना

विक्रय कार्यालय m

खुदरा विक्रेता m/f

milk cooperative movement

milk marketing organization

management

producer

stock holder

invaluable

colloquial form

long duration

best example

developing country

white revolution

establishment

pitiable

broker

revolutionary thinking

far sighted

economic strength

registration

to collect

enough temperature

chemical material

source

change

miracle

means

competition

record

advertisement, commercial

actress

awareness

to be available

sale office

retail seller

Linguistic and Cultural Notes

1. Hindi, like other Indian languages, distinguishes between a formal and informal style. This phenomenon is known as diglossia. For example, let’s look at the sentence from this unit – जो गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड नाम की सहकारी संस्था के प्रबन्धन में चलता है. Few Hindi speakers are likely to use words like सहकारी दुग्ध विपणन संघ and प्रबन्धन in their informal daily speech. Such uses are seen more often in written texts and sometime in formal spoken style. Addtionally, spoken style words can be used in formal style (spoken and written) but the reverse is not as common.

2. In the Indian state of Gujarat, Amul was a revolutionary cooperative movement by farmers which eliminated intermediaries from selling their cattle’s milk in the open market. Although Amul soon developed into a huge high-tech industry which produces a variety of milk products, its cooperative character continues to remain in place.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

दुग्ध

प्रबन्धन

अमूल्य

सोच

लोकप्रिय

पदार्थ

विश्वास

ज़रिया

प्रतिस्पर्धा

दूध

आयोजन

अनमोल, मूल्यवान

विचार, चिन्तन

प्रसिद्ध, मशहूर

वस्तु

यकीन

साधन

स्पर्धा, मुकाबला, प्रतियोगिता, प्रतिद्वन्द्विता

Structurally Related Words (Derivatives)

मूल्य, मूल्यवान, मूल्यांकन, मोल, अनमोल

विकास, विकसित, अविकसित, विकासशील

दया, दयनीय, दयालु, दयावान, निर्दय, निर्दयी

रस, रसिक, रसायन, रसायनिक, रासायनिक

ज्ञापन, विज्ञापन

अभिनेता, अभिनेत्री, अभिनय

उपलब्ध, उपलब्धि, उपलब्धता, सुलभ, दुर्लभ

क्रय, विक्रय, विक्रेता, बिक्री

Comprehension Questions

1. Which of the following statements is not based on the text?

a. Amul had its genesis in a cooperative movement.

b. Amul processed its milk with the addition of chemicals.

c. Amul used farmers for its ads and commercials.

d. Amul established a record success in the market.

2. What was the reason for not using glamorous personalities for their ads and commercials?

a. promoting their own farmers

b. saving money

c. connecting with common people

d. all of the above

Lijjat PapaR

Module 3.3

कुटीर उद्योग -3

लिज्जत पापड़

परिचय

श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़लिज्जत ब्रांड  के रूप में जाना जाता है। यह एक भारतीय महिला सहकारी संगठन है जो विभिन्न खाद्य उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन से संबद्ध  है। लिज्जत  प्रमुखतया अपने मूल रूप में एक  कुटीर उद्योग था जो अब दूर दूर तक फैल गया है। महिलाओं के द्वारा संचालित इस संगठन का मुख्य उद्देश्य रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ साथ महिला सशक्तीकरण पर भी बल देना है। लिज्जत का मुख्यालय मुंबई में है और पूरे भारत में इसकी 35 डिवीजन में 67 शाखाएं है। इस उद्योग का व्यापार 70 देशों में है और लगभग 44,000 महिलाएं इससे रोज़गार पा रही हैं।  

संगठन का इतिहास

मुंबई के मध्यवर्ग की 7 अनपढ़ स्त्रियों ने एक इमारत की छत पर 80 रुपये के क़र्ज़ से पापड़ बेलना शुरू किया। जसवंतीबेन पोपट, जो इस समूह की अकेली जीवित सदस्य हैं, कहती है – “घर के पुरुष काम पर चले जाते थे और बच्चे स्कूल। घर के काम पूरे कर लेने के बाद हम दिन भर खाली रहते थे। धनी औरतों की तरह शॉपिंग या किटी पार्टी नहीं कर सकते थे। तब हमें पापड़ बनाने का विचार आया।इन सात औरतों ने मिलकर उधार लिए गए अस्सी रुपये से पहली बार अपना सपना साकार किया और आज यह उनका संगठन पापड़ ही नहीं मसाले और डिटर्जेंट जैसे तमाम उत्पाद बनाता है।

लिज्जत जिन सात गुजराती गृहिणियों के दिमाग की उपज था वे गिरगाम के एक पांच मंजिला भवन में रहती थीं । स्थायी आजीविका के लिए एक उद्यम शुरू करने के प्रयास में वे अपने केवल एकमात्र कौशल खाना पकाने की कला का उपयोग करना चाहती थीं। ये उद्यम इन सात महिलाओं के नाम से जाना जाता है – जसवंतीबेन जमनादास पोपट, पार्वतीबेन रामदास थोडानी, उजमाबेन नारानदास कुंडलिया, बानुबेन एन तन्ना, लगुबेन अमृतलर गोकानी, जयाबेन वी. विठलानी, और एक औरत का नाम अज्ञात है। इन महिलाओं ने भारत सोसायटी के एक सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता छगन लाल करमसी पारेख  से 80 रुपए उधार लेकर पापड़ बनाने वाला एक डूबता हुआ उद्यम लक्ष्मीदास भाई से खरीदा। 15 मार्च, 1959 को वे अपनी इमारत की छत पर एकत्र हुईं और पापड़ के चार पैकेट के साथ उत्पादन शुरू कर दिया। सबसे पहले भूलेश्वर में एक व्यापारी को पापड़ बेचना शुरू किया। प्रारंभ से ही इन महिलाओं का अटल फैसला था कि वे किसी से दान या मदद नहीं लेंगी, भले ही संगठन को कितना भी नुकसान उठाना पड़े।

छगन लाल करमसी पारेख, जो लोकप्रिय छगन बापा के रूप में जाना जाता है, उनका मार्गदर्शक बन गया।  शुरू में इन महिलाओं ने दो तरह के पापड़ बनाए इनमें एक कम दर पर बेचने के लिए था। छगन बापा ने उन्हें सिर्फ मानक किस्म के पापड़ बनाने और गुणवत्ता से कोई समझौता न करने की सलाह दी। बापा ने उनसे इसे एक व्यावसायिक उद्यम के रूप में चलाने और खातों को उचित रूप में बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। लिज्जत का एक सहकारी प्रणाली के रूप में विस्तार किया गया। तीन महीने के भीतर 25 महिलाएँ पापड़ बनाने लगीं। जल्दी ही महिलाओं ने व्यापार के लिए बर्तन, अलमारी, स्टोव जैसे कुछ उपकरण खरीदे। पहले वर्ष इस  संगठन की वार्षिक बिक्री 6,196 रुपये थी।

लिज्जत का प्रचार-प्रसार

इस समूह को मौखिक चर्चा से और स्थानीय भाषा के समाचारपत्रों में लेख के माध्यम से काफी प्रचार मिला। इस प्रचार ने उन्हें अपनी सदस्यता में वृद्धि करने में मदद की। अपने गठन के दूसरे वर्ष तक 100 से 150 महिलाएँ इस  समूह में शामिल हो गई थीं, और तीसरे वर्ष के अंत तक यह सदस्य संख्या 300 से अधिक हो गई। इस समय के अंत तक सात महिला संस्थापकों वाले इस नए समूह के लिए एक छत काफ़ी नहीं थी जो इतने सदस्यों और सामग्री को समायोजित कर सकती, तो गुँथा हुए आटा सदस्यों को अपने घरों को ले जाने और पापड़ बनाने के लिए वितरित किया गया। बाद में पापड़ वजन और पैकेजिंग के लिए वापस लाए जाने लगे। 1962-63 में पापड़ की वार्षिक बिक्री ने 182,000 रुपए के आंकड़े को छुआ।

जुलाई 1966 में लिज्जत सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत हुआ। उसी महीने छगन बापा की सिफारिश पर यू.एन. देवधर, जो खादी ग्रामोद्योग और ग्रामीण आयोग (KVIC) के अध्यक्ष थे, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से लिज्जत का निरीक्षण किया। सितम्बर 1966 में के.वी.आई.सी ने औपचारिक रूप से एक इकाई के रूप में लिज्जत को खादी और ग्रामोद्योग अधिनियम के तहत अनाज और दालों के प्रसंस्करण से संबंधित “ग्रामोद्योग” के रूप में मान्यता प्रदान की और 8 लाख रुपये की कार्यशील पूंजी और करों में छूट भी दी।

1987 में, बांद्रा, मुंबई के एक उपनगर में कमल अपार्टमेंट्स के नए परिसर में लिज्जत के लिए नया केंद्र खरीदा और पंजीकृत कार्यालय जुलाई 1988 से बांद्रा में स्थानांतरित कर दिया। 1988 में लिज्जत ने  ससा डिटर्जेंट और साबुन के साथ साबुन बाजार में प्रवेश किया। ससा की वार्षिक बिक्री 500 करोड़ रुपये की थी, जो  लिज्जत के 1998 में कुल कारोबार का 1  7 प्रतिशत था। मार्च 1996 में लिज्जत की 50 वीं शाखा मुंबई में खोली गई। जब भी लिज्जत की एक नई शाखा  खोली जाती है, तब एक पड़ोसी लिज्जत शाखा उसका मार्गदर्शन करती है और नए सदस्यों के प्रशिक्षण में मदद करती है।

विदेशों में प्रसार

1980 के दशक और 1990 के दशक में लिज्जत ने  विदेशी अतिथियों और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया। युगांडा की उपराष्ट्रपति डा.वांदिरा काजिब्वे स्पेसिओसा ने जनवरी 1996 में केंद्रीय कार्यालय का दौरा किया। क्योंकि वह युगांडा में एक ऐसी ही संस्था शुरू करना चाहती थीं। लिज्जत ने यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, मध्यपूर्व, सिंगापुर, नीदरलैंड, थाईलैंड, और अन्य देशों में व्यापारी आयातकों की मदद से अपने उत्पादों का निर्यात शुरू कर दिया।  2001 में अमेरिका को वार्षिक निर्यात 2.4 मिलियन डालर था। अपनी लोकप्रियता बढ़ने पर लिज्जत को नकली लिज्जत पापड़ की समस्या का भी सामना करना पड़ा।

संगठन संरचना और प्रबंधन
लिज्जत सर्वोदय के दर्शन और सामूहिक स्वामित्व में विश्वास रखता है। यह लाभ और हानि दोनों स्थितियों में मालिकों के रूप में  अपने सभी सदस्यों को  एक सहभागी के रूप में स्वीकार करता है। सदस्य सहमालिक हैं और प्यार से उन्हें “बहनें” कहा जाता है। सभी निर्णय आम सहमति पर आधारित हैं और किसी भी सदस्य बहन को एक निर्णय वीटो करने का अधिकार है। पुरुष केवल वेतनभोगी कर्मचारी  (एकाउंटेंट, ड्राइवर या सुरक्षा गार्ड), हैं। वे संगठन के सदस्य नहीं है। संगठन का संचालन 21 सदस्यीय प्रबंध समिति को दिया जाता है जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, दो सचिव और दो कोषाध्यक्ष हैं। विभिन्न शाखाओं और प्रभागों का प्रभार संचालिकाओं के पास है।

संगठन का सामाजिक कार्यों में योगदान

संगठन ने सदस्य बहनों और उनके परिवारों के लिए कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए है। बहनों के लिए एक साक्षरता अभियान गिरगाम में जून 1999 को शुरू हुआ। बाद में प्रबंध समिति ने अपनी सभी शाखाओं में ऐसी कक्षाओं को शुरू करने का फैसला किया। 1980 के बाद से लिज्जत सदस्य बहनों की बेटियों को छगन बापा स्मृति छात्रवृत्ति  देना शुरू कर दिया गया।

सदस्य बहनों  ने वलोद केंद्र में ग्रामीण महिलाओं के लिए एक शैक्षिक केंद्र की स्थापना की। टाइपिंग, खाना पकाना, ओरिएंटेशन कोर्स सिलाई, बुनाई और खिलौना बनाने के रूप में प्रशिक्षण की व्यस्था की गई  इसी  तरह से बच्चों के कल्याण, प्राथमिक चिकित्सा और स्वच्छता जैसे अन्य पाठ्यक्रमों को भी चलाया जाता था। वलोद में पहली पक्की सड़क लिज्जत की मदद से बनाई गई और1979 में वलोद शाखा द्वारा उसका उद्घाटन किया गया।

कई अवसरों पर लिज्जत की सदस्य बहनों ने गरीब बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन का वितरण और सामुदायिक शादी का आयोजन करने के लिए पैसे दान किए। प्राथमिक शिक्षा के प्रसार के लिए गठित रक्तदान ड्राइव उपक्रम, स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, वृक्षारोपण जैसे सामाजिक सेवा की गतिविधियों शुरू कीं। लिज्जत ने  महाराष्ट्र के लातूर जिले में भूकंप से प्रभावित गांव का पुनर्वास कार्यक्रम चलाया। उनके लिए संस्थागत वित्तीय सहायता प्रदान की और गांव के लोगों के लिए पचास-साठ घरों के निर्माण के काम की देखरेख की। मदर टेरेसा के निर्देश पर सदस्य बहनों ने आशा-धन नामक एक संस्था की कुछ गतिविधियों में भाग लिया जो बेसहारा महिलाओं के कल्याण का काम करती थीं।

उपयोगी शब्दार्थ

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

 

महिला गृह उद्योग m

खाद्य उपभोक्ता वस्तुएं f.pl.

स्थायी आजीविका f

मार्गदर्शक m/f

व्यावसायिक उद्यम m

सहकारी प्रणाली f

उपकरण m

मौखिक चर्चा f

समायोजित करना

वितरित करना

निरीक्षण करना

औपचारिक रूप से

अधिनियम m

प्रसंस्करण m

मान्यता f

कार्यशील पूंजी f

उपनगर m

स्थानांतरित करना

प्रशिक्षण  m

दशक m

संगठन संरचना f

प्रबंधन m

सामूहिक स्वामित्व m

वेतनभोगी कर्मचारी m/f

प्रभार m

साक्षरता अभियान m

छात्रवृत्ति f

प्राथमिक चिकित्सा f

पाठ्यक्रम m

उद्घाटन  m

पौष्टिक भोजन m

रक्तदान ड्राइव उपक्रम m

वृक्षारोपण m

पुनर्वासm

women’s home industry

edible consumer goods

stable livelihood

guide

business-related venture

cooperative system

instrument

oral discussion

to arrange/adjust

to distribute

to inspect

formally

regulation

processing

recognition

working capital

suburb

to transfer

training

decade

organization structure

management

collective ownership

salaried employee

charge, official responsibility

literacy campaign

scholarship

first aid

curriculum

inauguration

nutritious food

launching of blood donation drive

tree planting

rehabilitation

Linguistic and Cultural Notes

1. Thousands of new words have been coined in Hindi to meet demands of the modern day. Many have been laboriously coined by scholars while others are invented by language users. Examples of new words coined by scholars are सशक्तीकरण, मुख्यालय, गुणवत्ता, वेतनभोगी, अधिनियम, प्रसंस्करण and examples of words coined by users of the language are (बिजली का) गरम तार, (बिजली का) ठंडा तार, सहभागी, सहमालिक, रक्तदान, वृक्षारोपण. Both these processes are continuous and complementary processes in language development. 

2. Cooperative movements for business ventures are a relatively recent phenomenon in India’s business history. There have been many of them since India’s independence in 1947. The idea of collective effort and management gains relevance mostly in areas where there is a dearth of capital and management.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

महिला

वस्तु

आजीविका

व्यावसायिक

छात्रवृत्ति

चिकित्सा

भोजन

उपक्रम

औरत, स्त्री, नारी

चीज़, पदार्थ

रोज़ी, रोज़ी-रोटी

व्यवसायिक, व्यवसाय-संबंधी, व्यापारिक

वज़ीफ़ा

इलाज, उपचार

खाना, खाद्य

आरंभ, शुभारंभ, प्रारंभ, शुरुआत

Structurally Related Words (Derivatives)

उद्योग, उद्योगपति, औद्योगिक, औद्योगिकीकरण, प्रौद्योगिकी

उपभोग, उपभोक्ता

स्थायी, स्थायित्व

मार्गदर्शन, मार्गदर्शक, मार्गदर्शिका

मुख, मौखिक, मुख्य, मुख्यतः

आयोजन, आयोजित, समायोजित, प्रायोजित

निरीक्षण, निरीक्षक, परीक्षा, परीक्षण, अन्वीक्षण, सर्वेक्षण

उपचार, औपचारिक, औपचारिकता, औपचारिकीकरण, अनौपचारिक, अनौपचारिकीकरण

नियम, नियमित, नियामक, अधिनियम, विनियम

शिक्षण, प्रशिक्षण

प्रबंध, प्रबंधन, प्रबंधक

अक्षर, साक्षर, साक्षरता, निरक्षर, निरक्षरता

पुष्ट, पुष्टि, पुष्टिकारक, पौष्टिक

Comprehension Questions

1. Which of the following is not mentioned or implied in the text?

a. There are some men in this women’s organization.

b. Women empowerment was Lijjat’s primary goal.

c.Lijjat’s products are exported to many countries.

d. Lijjat received some support from other organizations.

2. What kind of charities did Lijjat make contributions to?

a. orphanages

b. schools for the blind

c. widows assistance

d. medical help

Tiffin Box Carrier

Module 3.4

कुटीर उद्योग – 4

डब्बा-वाला


डब्बावाला कौन है?

डब्बावाला का शाब्दिक अर्थ है डिब्बे लिए हुआ व्यक्ति। यह व्यक्ति भारत के मुंबई  शहर में एक ऐसी अनोखी रोजगार सेवा में कार्यरत है  जिसका व्यवसाय है उपनगरों के आवासों से दोपहर के ताजा पकाये भोजन के डिब्बे एकत्र करना  और  संबंधित व्यक्तियों के कार्यस्थलों तक पहुंचाना और फिर खाली डिब्बे वापस ग्राहक के निवास पर लौटाना ।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

“टिफ़िन” एक पुराने ज़माने की अंग्रेज़ी में दोपहर के भोजन या दोपहर के नाश्ते के लिए शब्द है। डिब्बेवाला कभी कभी टिफ़िनवाला भी कहा जाता है । यह वास्तव में मुंबई में एक अति विशिष्ट सेवा है जो एक सदी से भी अधिक पुरानी है और इस शहर के सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है।

डिब्बेवाला की अवधारणा तब उत्पन्न हुई थी जब भारत और पाकिस्तान ब्रिटिश शासन के अधीन था। कई ब्रिटिश लोग जो कॉलोनी स्थापित करने आए थे, उन्हें स्थानीय खाना पसंद नहीं था अतः उनके घर से सीधे कार्यस्थल में दोपहर का भोजन लाने के लिए एक सेवा की स्थापना की गई। हालांकि आजकल भारतीय पुरुष व्यवसायी ही डिब्बावालों के मुख्य ग्राहक हैं, पर अमीर परिवारों के स्कूल जानेवाले बच्चों के लिए भी दोपहर के भोजन के वितरण के लिए इनकी सेवाएँ  ली जा रही हैं। कुछ स्थितियों में इन सेवाओं में खाना पका कर ले जाना भी शामिल हो सकता है। यह मुख्य रूप से या तो घर का बना खाना या कुछ मामलों  में एक रेस्तरां से भोजन लेकर पहुंचाना भी हो सकता है। यह काम आम तौर पर एक मासिक शुल्क पर किया जाता है।

यह सेवा 1880 में प्रारंभ हुई थी । 1890 में, महादेव हवाजी बच्छे ने 100 पुरुषों के साथ दोपहर के भोजन के वितरण की सेवा शुरू की।1930 में उन्होंने अनौपचारिक डब्बावाला यूनियन बनाने  का प्रयास किया। बाद में 1956 में एक धर्मार्थ ट्रस्ट के अंतर्गत नूतन मुंबई टिफिन डिब्बा सप्लायर्स ट्रस्ट नाम से इसे पंजीकृत किया गया। इस ट्रस्ट की वाणिज्यिक शाखा 1968 में मुंबई टिफिन डिब्बा सप्लायर्स एसोसिएशन के रूप में पंजीकृत की गई । संघ के वर्तमान अध्यक्ष सोपान लक्ष्मण मारे हैं।

कार्यविधि

एक डिब्बेवाला आमतौर पर साइकिल पर डिब्बे या तो एक कार्यकर्ता के घर से या डिब्बे तैयार करने वाले रेस्तराँ से इकट्ठे करता है। हर डिब्बे पर कुछ विशेष प्रकार के पहचान चिह्न होते हैं। हर डिब्बेवाला उन्हें एक निश्चित छँटाई की जगह ले जाता है, जहां वह और अन्य डिब्बेवाले दोपहर के भोजन के डिब्बे कई प्रकार के समूहों को बांटते हैं। ये समूहीकृत डिब्बे गंतव्य डिब्बों की पहचान-चिह्नों के साथ रेलगाड़ियों के डिब्बे में डाले जाते हैं । आम तौर पर वहाँ रेलगाड़ी में डिब्बे के लिए एक नामित कार होती है। इन चिह्नों में रेल से डिब्बे उतारने के लिए स्टेशन का नाम और उस इमारत का पता शामिल होता है जहां डिब्बा वितरित किया जाना है। प्रत्येक स्टेशन पर एक स्थानीय डिब्बेवाले को डिब्बे सौंप दिए जाते हैं। खाली डिब्बे दोपहर के भोजन के बाद फिर से एकत्र कर उनके घरों को वापस पहुँचा दिए जाते हैं ।

            यह सेवा लगभग हमेशा निर्बाध होती है, मानसून जैसे गंभीर मौसम के दिनों में भी। स्थानीय डिब्बेवाला और जनता के लोग एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं  और इनमें आपस में विश्वास का अटूट रिश्ता है । डिब्बेवाले  आम तौर पर स्थानीय क्षेत्रों से अच्छी तरह परिचित होते हैं, और शॉर्टकट और अन्य कम व्यस्त मार्गों का उपयोग करके  समय पर अपना माल देने में सफल होते हैं।

प्रौद्योगिकी का प्रयोग

अब डिब्बेवालों ने अब नई प्रौद्योगिकी को गले लगाना शुरू कर दिया है, और अब इन्हें एस.एम.एस. के माध्यम से वितरण के लिए बुकिंग की अनुमति भी है। वेबसाइट पर ग्राहक की ऑनलाइन प्रतिक्रिया को अहम स्थान  दिया जाता है। इस प्रणाली की सफलता सामूहिक कार्य और समय प्रबंधन पर निर्भर करती है। इस व्यापक वितरण-शृंखला में समर्पण और प्रतिबद्धता इतनी है कि वहाँ किसी तरह के दस्तावेज़ीकरण की कोई ज़रूरत नहीं है। एक साधारण रंग की कोडिंग प्रणाली गंतव्य स्थान और प्राप्तकर्ता के लिए एक आई.डी. प्रणाली के रूप में काम करता है। प्रत्येक डिब्बेवाले को एक न्यूनतम पूंजी के योगदान की आवश्यकता है – दो साइकिल, टिफिन के लिए एक लकड़ी की टोकरी,सूती सफ़ेद कुर्ता – पाजामा, सफ़ेद ट्रेडमार्क और गांधी टोपी।

आर्थिक विश्लेषण

प्रत्येक डिब्बेवाला को उसकी भूमिका की परवाह किए बिना दो से चार हजार रुपये प्रति माह का भुगतान किया जाता है। एक अनुमान के अनुसार हर दिन  175,000 या 200,000 दोपहर के भोजन के डिब्बे लगभग 5,000 डिब्बेवालों  द्वारा ले जाए जाते हैं वह भी एक अत्यंत मामूली शुल्क के साथ और अत्यंत समय की पाबंदी के साथ। हाल के सर्वेक्षण के अनुसार वितरण के सभी कर्मचारियों के अनपढ़ होने के बावजूद हर 6 लाख डिब्बों के वितरण में एक प्रतिशत से भी कम गलती की संभावना देखने में आई है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान

प्रिंस चार्ल्स ने अपनी भारत यात्रा के दौरान डिब्बेवालों के साथ मुलाकात को अपने कार्यक्रम में नियोजित किया जिस पर बीबीसी ने एक वृत्तचित्र बनाया। लंदन में अप्रैल 2005 में प्रिंस चार्ल्स ने केमिला पार्कर बाउल्स के साथ अपनी शादी में उन्हें भी आमंत्रित किया था। जबरदस्त प्रचार के कारण कुछ डिब्बेवालों को भारत के कुछ शीर्ष बिजनेस स्कूलों में अतिथि-व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जाता है, जोकि एक असामान्य बात है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट है कि 125 साल पुराना डिब्बेवाला उद्योग प्रतिवर्ष 5-10% की दर से बढ़ने की दिशा में प्रयासरत है।

उपयोगी शब्दार्थ

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शाब्दिक अर्थ m

अनोखी रोजगार सेवा f

कार्यरत

संबंधित व्यक्ति m/f

कार्यस्थल m

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि f

अति विशिष्ट सेवा f

अभिन्न अंग m

अवधारणा m

मासिक शुल्क m

वाणिज्यिक शाखा f

कार्यविधि f

छँटाई की जगह f

समूहीकृत

नामित

गंतव्य m

निर्बाध

अटूट रिश्ता m

प्रौद्योगिकी f

प्रतिक्रिया f

अहम स्थान m

समर्पण m

प्रतिबद्धता f

दस्तावेज़ीकरण m

न्यूनतम पूंजी f

आर्थिक विश्लेषण m

भूमिका f

समय की पाबंदी f

सर्वेक्षण m

संभावना f

वृत्तचित्र m

अतिथि-व्याख्यान m

असामान्य

प्रयासरत

literal meaning

unique employment service

busy

concerned person

work place

historical background

very special service

integral part

concept

monthly fee

commercial branch

working method

sorting place

collected

assigned

destination

without obstruction

solid relationship

technology

reaction

important place

dedication

commitment

documenting

minimum capital

economic analysis

role

time restriction

survey

probability

documentary film

guest lecture

special, extraordinary

engaged, busy

Linguistic and Cultural Notes

1.Although English avoids use of passive, In Hindi the passive is used to avoid mentioning mentioning the logical subject of the sentence. Although suh a need exists in many social situations it is especially true of jouranism where writers want to mention something without attributing it to the source of information. The current unit contains plenty of such examples. Some examples are – एक सेवा की स्थापना की गई, दोपहर के भोजन के वितरण के लिए इनकी सेवाएं ली जा रही हैं, यह काम आम तौर पर एक मासिक शुल्क पर किया जाता है, इस ट्रस्ट की वाणिज्यिक शाखा 1968 में मुंबई टिफिन डिब्बा सप्लायर्स एसोसिएशन के रूप में पंजीकृत की गई.

2 Necessity is the mother of invention. India’s population is almost four times the population of the United States while its area is only about one-third the area of the United States. Among other reasons, the population density of India has caused stiff competition to earn livelihood and has compelled people to think of new ideas for their survival. One such idea evolved into the huge business of tiffin carriers in Mumbai. This well-organized indigenous business provides employment to approximately 5000 workers.

3. Words and affixes from Sanskrit and Perso-Arabic sources are often not mixed to create new words. But it may be due to communicative needs or due to the developing composite culture of India  we do see some mixing across borders. One such example in theis unit is दस्तावेज़ीकरण.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

विशिष्ट

कार्यरत

अवधारणा

कार्यविधि

रिश्ता

स्थान

पूंजी

खास, विशेष

व्यस्त

विचार

कार्यप्रणाली

संबंध

जगह, स्थल

संपत्ति, पैसा

Structurally Related Words (Derivatives)

शब्द, शब्दावली, शब्दसूची, शाब्दिक, शब्दशः

संबंध, संबंधी, संबंधित, संबद्ध

इतिहास, ऐतिहासिक, ऐतिहासिकता

विशेष, विशेषता, विशेषज्ञ, विशेषज्ञता, विशिष्ट, विशिष्टता, वैशिष्ट्य

भिन्न, भिन्नता, भिन्न भिन्न, विभिन्न, अभिन्न, अभिन्नता

धारणा, अवधारणा

मास, मासिक

वनिक्, वाणिज्य, वाणिज्यिक

नाम, नामित

बाधा, बाधक, निर्बाध

क्रिया, प्रक्रिया, प्रतिक्रिया, प्रतिक्रियात्मक, सक्रिय, सक्रियता, निष्क्रिय, निष्क्रियता

अर्पण, समर्पण

Comprehension Questions

1. Which of the following is not stated or implied in the text?

a. Tiffin service started more than 125 years ago.

b. People have great confidence in tiffin carriers.

c. Tiffin carriers receive high-profile attention.

d. The tiffin system operates with computers and vans.

2. Who are the tiffin-carriers’ main customers for whom they carry the meals?

a. business men

b. school children

c. all  professionals

d. rich people

Supplementary Material Module 3

Reading

1. NIRMA

Original article available at

http://en.wikipedia.org/wiki/Nirma http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BE

Listening

1.TEDxSSN – Dr. Pawan Agrawal – Mumbai Dabbawala

http://www.youtube.com/watch?v=N25inoCea24

DabbaWalas – Amazing Meal Delivery in India (Dabbawalas)

http://www.youtube.com/watch?v=fTkGDXRnR9I

2. Lijjat

Uploaded on Mar 15, 2009

स्वाद का लंबा सफर                            

http://www.youtube.com/watch?v=CN2p8j13kuM

Things  you didn’t know about lijjat papad

3. Nirma

http://www.youtube.com/watch?v=wrl_T_llU4o

4. Nirma Situation Analysis

http://www.youtube.com/watch?v=hzt9NxYNAoA

uploaded on Sep 7, 2010

SItuation Analysis Report of Nirma as a declining brand

Discussion Ideas Module 3

1.  In groups of 2 or3, discuss what lessons can be learned from India’s Tiffin Box carriers and how these lessons can be applied to improve logistics and transportation industries in India.

2.  Perform a role play between Lijjit पापड़ management and female cooperative members. The members are seeking more income as the cost of living rises. At the same time the company is facing greater competition from other food manufacturers. Within 5-7 minutes, each party should present its point of view and then try to reach agreement.

3.  What is going to be the effect on cottage industries as multinationals enter India? Will they benefit and flourish? Will the competition between them destroy the local industry?

4.  Develop a product for a cottage industry and create a marketing campaign which explains why it is better through your small local business than through the MNCs.

5.  Debate the value of preserving cottage industries versus allowing full competition from multinationals.  What should be the regulatory role of the government?  What level of protectionism may be detrimental?

6.  Discussion:  Family business is an important component of the Indian economy.  What strengths and challenges does that bring, especially in the face of globalization?

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