Module 5

Module Five – Advertisement Industry

विज्ञापन उद्योग

Advertisement Industry

 

Ads Makes the Market Move

Module 5.1

विज्ञापन उद्योग -1

बाज़ार को रफ्तार देते विज्ञापन


विज्ञापन कितने और कैसे?

नीलसन कंपनी द्वारा कराए गए एक सर्वे से पता चलता है कि भारत में 2010 के पहले 4 महीनों में टीवी, अखबारों और मैगजीनों में दिए गए विज्ञापनों पर खर्च करीब 32 प्रतिशत बढ़ गया था। बढ़त पर नज़र डालें तो मार्च 2010 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि जहां अखबारों में विज्ञापनों पर खर्च करीब 30 प्रतिशत  बढ़ा, वहीं टेलीविजन इंडस्ट्री में 26% का इजाफ़ा हुआ, जो एशिया पैसेफिक की 12 मार्केट्स में सब से ज्यादा है। एक कंपनी अपना विज्ञापन या कैंपेन मीडिया में लांच करने से पहले महीनों का सफ़र तय करती है। कभी कभी तो साल भी लग जाता है। विज्ञापन लांच करने के पीछे कई कारण होते हैं। उत्पाद की बिक्री घट जाना, उत्पाद पर कोई नया ऑफ़र या छूट, अक्सर ऐसे कारणों से जब कोई कंपनी विज्ञापन लांच करती है, तो उस से पहले मार्केट सर्वे या रिसर्च भी कराती है। रिसर्च के निष्कर्ष के मुताबिक फैसला लिया जाता है। भारत में वे विज्ञापन ज्यादा पसंद किए जाते हैं, जिन्हें लोग अपने परिवार के साथ बैठ कर देख सकें। रिसर्च से ऐसी बातें भी सामने आती हैं कि भारतीय किसी भी तरह की बरबादी को उचित नहीं समझते। शायद यही वजह है कि री-फ़िल या री-चार्ज वाली पैकिंग्ज़ एक बार इस्तेमाल कर फेंकने वाले पैकिंग्ज़ से ज्यादा बिकती हैं।

पैकेजिंग का कमाल

कभी कभी रिसर्च से कुछ नए तरह के उपाय भी सामने आते हैं। कंपनियां अपनी सेल बढ़ाने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाती हैं। कंपीटिशन में बने रहने के लिए लाखों रुपए भी खर्च करने पड़ते हैं। ऐसा ही कुछ साल पहले कैडबरी के साथ हुआ। कुछ पैकेट्स में कीड़े निकलने की वजह से कंपनी की काफ़ी  बदनामी हुई। बिक्री भी घट गई। तब कंपनी ने अपने विज्ञापनों में अमिताभ बच्चन को लिया। अमिताभ बच्चन के कैडबरी चौकलेट के विज्ञापन इतने मशहूर हुए कि लोग कंपनी के विवाद को भूल गए और बिक्री पहले की तरह सामान्य हो गई। ऐसे ही टूथपेस्ट बनाने वाली एक नामी कंपनी की बिक्री उतनी नहीं थी जितनी कंपनी को उम्मीद थी। बिक्री बढ़ाने के लिए रिसर्च के बाद किसी ने यह सुझाया कि टूथपेस्ट की पैकेजिंग थोड़ी बदल दी जाए और ट्यूब में जहां से पेस्ट निकलता है उस का मुंह बड़ा कर दिया जाए, इस से उत्पाद का इस्तेमाल बढ़ गया और बिक्री भी बढ़ गई।

विज्ञापनों में सर्जनात्मकता

कुछ कंपनियां अपने बेहतरीन विज्ञापनों के लिए हमेशा प्रसिद्ध रहती हैं। अपनी अपनी तरह से एक ढर्रे को पकड़ कर चलने वाली कंपनियां भी हैं। कैडबरी हर बार एक नए आइडिया के साथ आती है। उन्होंने आज पहली तारीख है, जी, पहली तारीख हैके करीब 2 विज्ञापन बनाए और दोनों ही पहली या 30 तारीख के आसपास खूब प्रसारित होते हैं। इसी तरह भारतीय पारंपरिक मिठाइयों की जगह लेने की कोशिश उन के नए विज्ञापन शुभ आरंभमें खूब नज़ाकत के साथ की गई है। बसस्टैंड पर खड़ा लड़का लड़की से थोड़ी सी चौकलेट मांगता है, क्योंकि मां कहती है कोई शुभ काम करने से पहले मुंह मीठा कर लेना चाहिए, खासी नज़ाकत के साथ बना यह विज्ञापन विनिल मैथ्यू ने बनाया है, जिन्हें आज के समय में विज्ञापनों का सब से बेहतरीन निर्देशक माना जा रहा है।

डाबर, वीको जैसे कुछ ब्रांड हैं, जो खासे देशीपन के साथ अपने विज्ञापन पेश करते हैं। इन के विज्ञापन बिना किसी लाग लपेट के सीधे सपाट हैं। हालांकि डाबर ने अपने विज्ञापनों के लिए जब अमिताभ बच्चन को साइन किया, तब भी  कंपनी को काफ़ी फ़ायदा हासिल हुआ।

ज्यादातर कंपनियां फिल्मी सितारों को अपने विज्ञापनों में तब लेने की सोचती हैं, जब उन्हें तुरंत उपभोक्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचना हो। पाफिल्म के निर्देशक और लो लिंटास नामक एजेंसी के क्रिएटिव चीफ़ बाल्कि हैं, जिन्होंने टाटा चाय‘, ‘सर्फ एक्सेलऔर फ़ेयर ऐंड लवलीजैसे ब्रांड्स के विज्ञापन सोचे। एक सामान्य से उत्पाद का ऐसा विज्ञापन, जो उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दे।

बाल्कि के मुताबिक, ‘‘कोई भी कंपनी, जो अपना विज्ञापन बनाती है, उस का उद्देश्य है – उस उत्पाद की बिक्री। लेकिन कंपनी के उस उत्पाद की खासियत क्या है? दूसरे उत्पादों से वह कैसे अलग है? कंपनी का मुख्य आइडिया क्या है? इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए हम विज्ञापन की कहानी सोचते हैं। कंपनियां हमारे पास अपनी मार्केटिंग समस्याएं ले कर आती हैं और हम उन्हें विज्ञापन की स्ट्रैटेजी सुझाते हैं।

लुभावने विज्ञापन

हाल के बेहतरीन मार्केटिंग स्ट्रैटेजी वाले विज्ञापनों में वाडाफोन का विज्ञापन एक बड़ा अच्छा उदाहरण है। कंपनी उपभोक्ताओं को यह बताना चाहती थी कि हम हमेशा आपके साथ हैं। हमारा नैटवर्क हर जगह मिलेगा। एक छोटे बच्चे के साथ कुत्ते की वफादारी ने लोगों का दिल जीत लिया। इस विज्ञापन ने उपभोक्ताओं का कंपनी पर भरोसा जमा दिया। आइडिया का वाक ऐंड टाकभी इन में से एक है। आइडिया के ज्यादातर विज्ञापन बनाने वाले क्रोम पिक्चर्स के डाइरैक्टर अमित शर्मा कहते हैं – “ एक निर्देशक के लिए सब से जरूरी होता है स्टोरी को अच्छी तरह से कह पाना। हर आदमी की पहचान उसका नाम न हो कर एक नंबर है। आइडिया के हमारे इस विज्ञापन से लखनऊ में एक व्यक्ति इतना प्रभावित हुआ कि हमें खबर मिली उन्होंने शादी के कार्ड पर नवयुगल का नाम लिखने के बजाय सिर्फ उन के नंबर दिए थे।

विज्ञापनों  का बाजार पूरी तरह से कंपीटिशन का बाजार है। कुछ महीनों पहले होली के पास रिन और टाइड  का कंपीटिशन खुल्लमखुल्ला दर्शकों  ने देखा। जब रिन यानी हिंदुस्तान लीवर ने अपने विज्ञापन में सीधे तौर पर कहा कि रिन की धुलाई, टाइड से ज्यादा चमकदार है। हालांकि यह गैरकानूनी था। 3-4 दिन बाद इस विज्ञापन पर रोक लगा दी गई। लेकिन तब तक दर्शक मजा ले चुके थे।

कैडबरी, ईनो, डोकोमो जैसी ऐड फिल्मों के डाइरैक्टर पीयूष रागनी के मुताबिक, ‘‘विज्ञापन का काम है ग्राहक के मन में उत्पाद की जरूरत पैदा करना। दरअसल, कंपनी मार्केट में अपने उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के लिए कई तरह के दावों  का सहारा लेती है। एजेंसी सोचती है, उन दावों को पेश करने के तरीके, जिन से वे बिलकुल सच लगें और लोगों का भरोसा जीत सकें – इसके लिए निर्देशक अपनी विज्ञापन बनाने की कला पेश करता है।

रेस में फिल्मी सितारे आगे

एक बड़ा उदाहरण लक्स का विज्ञापन है। लक्स साबुन मात्र 15-18 रूपए की कीमत का है। लेकिन इस के विज्ञापन में हमेशा ही बड़ी फ़िल्म अभिनेत्रियां ली गई हैं। ऐड एजेंसी में ही काम करने वाले एक सूत्र ने नाम न बताने का हवाला देते हुए कहा, ‘‘आज के दौर में बौलीवुड  अभिनेत्रियां करीब  1-2 करोड़ रुपए तक लेती हैं, जबकि विज्ञापन जगत में अभिनेताओं का ज्यादा दबदबा है। अभिनेता करीब 6-7 करोड़ चार्ज करते हैं। कीमत उन की मार्केट डिमांड पर निर्भर करती है। दरअसल कंपनियों का फ़िल्मी सितारों के साथ साल में करीब 3 या 4 दिन का कांटैक्ट होता है। इन दिनों कंपनियां चाहे उन से विज्ञापन की शूटिंग करा लें, उन्हें मीटिंग्स के लिए बुला लें या किसी और तरह से अपने ब्रांड की पब्लिसिटी करा लें।

लक्स का नया विज्ञापन, जिस में अभिषेक, ऐश्वर्या को पकड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऐश की मुलायम त्वचा इतनी मुलायम है कि अभिषेक के हाथ में ही नहीं आ रही। पहली बार किसी विज्ञापन में ऐश-अभि साथ साथ नज़र आ रहे थे। माना जा रहा है कि गोल्डन कपल का यह पैकेज कंपनी को करीब साढ़े 7 करोड़ रुपए का पड़ा। लेकिन यह बजट भी काफी विवादित रहा। कई वैबसाइट्स के मुताबिक असलियत में इस जोड़े ने करीब 25 करोड़ रुपए लिए हैं। विज्ञापन बनाने का खर्च अलग है। यह विज्ञापन विदेशी डाइरैक्टर स्टीफ़न ने डाइरैक्ट किया। म्यूजिक कंपोज किया शंकर एहसान लाय ने।

हालांकि ऐसे बहुत से विज्ञापन और उदाहरण हैं, जिन्हें बिना किसी फ़िल्मी सितारे के सफलता मिली। अपने आप में मील का पत्थर साबित हुए विज्ञापनों में, ‘सर्फ़ की खरीदारी में ही समझदारी‘, ‘बजाज हमारा बजाज‘, ‘चल मेरी लूना‘, ‘निरमा वाशिंग पाउडर निरमावगैरह ऐसे ही विज्ञापन हैं।

चैनलों के भी वारे न्यारे

कुल मिला कर कहा जा सकता है कि विज्ञापन की दुनिया में पैसा बहुत है और सभी अच्छा कमा रहे हैं। एक विज्ञापन बनाने का बजट करीब 5 लाख से 50 लाख रुपए तक भी हो सकता है। इन विज्ञापनों को चैनल पर प्रसारित करने का खर्च तो कंपनियों को और भी भारी पड़ता है। स्टारन्यूज़ या ऐसे ही कुछ अन्य चैनलों पर सिर्फ़  एक बार 30 सैकेंड का विज्ञापन देने के लिए कंपनी को करीब 21-22 हजार रुपए का खर्च आता है। चैनल किसी विज्ञापन को 5 बजे से 11 बजे रात तक भी चला सकता है। लेकिन अगर कंपनी किसी खास वक्त पर ही विज्ञापन प्रसारित कराना चाहे तो खर्च और भी बढ़ जाएगा। अगर सिर्फ़ 7 दिन भी विज्ञापन प्रसारित हो तो कंपनी को करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं। अगर ऐंटरटेनमैंट चैनलों की बात करें तो मात्र 10-15 सैकेंड की कीमत 50 हज़ार रुपए से ले कर 2-3 लाख रूपए तक जा सकती है। टेलीविजन के हिट शोज़ के बीच में विज्ञापन देने का खर्च 11-12 लाख रुपए तक भी जा सकता है।                                 

(साभार)

 गृहशोभा , अक्तूबर ; (प्रथम) 2010 अंक में प्रकाशित

सुश्री सुजाता शुक्ल के मूल लेख पर आधारित

उपयोगी शब्दार्थ

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)     

विज्ञापन m

इज़ाफ़ा  m

निष्कर्ष  m

एड़ीचोटी का जोर लगाना

बदनामी f

विवाद m

ढर्रा m

प्रसारित करना

पारंपरिक

नजाकत f

लाग लपेट f

सपाट

खासियत f

लुभावना

प्रभावित

खुल्लमखुल्ला

दर्शक m/f

दरअसल

दावा m

अभिनेत्री f

सूत्र m

हवाला m

अभिनेता m

दबदबा m

विवादित

मील का पत्थर m

वारे न्यारे

कुल मिला कर

advertisement, commercial

increase

conclusion

to do one’s best

infamy, bad name

dispute

structure, style

to transmit, broadcast, telecast

traditional

delicate behavior

showiness, ostentation

flat

speciality

attractive

influenced

openly

viewer, spectator

in fact

claim

actress

source, formula

reference (of someone)

actor

dominance

disputed

milestone

excellent advantage/profit

in all

Linguistic and Cultural Notes

1. Rules of punctuation in Hindi are not yet standardized yet. Commas and hyphens in particular depend on the individual writer. Commas often appear where we see a pause in speech. See a few examples from this unit –

जहां अखबारों में विज्ञापनों पर खर्च करीब 30% प्रतिशत  बढ़ा, वहीं टेलीविजन इंडस्ट्री में 26% का इजाफ़ा हुआ, जो एशिया पैसेफिक की 12 मार्केट्स में सब से ज्यादा है।

अक्सर ऐसे कारणों से जब कोई कंपनी विज्ञापन लांच करती है, तो उस से पहले मार्केट सर्वे या रिसर्च भी कराती है।

भारत में वे विज्ञापन ज्यादा पसंद किए जाते हैं, जिन्हें लोग अपने परिवार के साथ बैठ कर देख सकें।

In all these three examples, use of the comma in the middle of the sentences is avoidable according to a brief survey.

2. Ads and commercials in India are known for their creativity. Ads are found in magazines, newspapers, billboards, and also on public walls. The huge diversity in popular culture is reflected in these ads and commercials. Printed ads mix both languages and writing systems, while commercials use humor and cultural sentiments. Ads for rural areas are different from ads trying to capture the imagination of city folks. Family oriented ads generally have been popular across all regions in India.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

विज्ञापन

इज़ाफ़ा

बदनामी

निष्कर्ष

विवाद

खासियत

लुभावना

दरअसल

दबदबा

इश्तहार

वृद्धि

अपयश

नतीजा

झगड़ा

विशेषता

आकर्षक

असल में, वास्तव में

प्रभुत्व

Structurally Related Words (Derivatives)

परंपरा, पारंपरिक, परंपरागत

प्रभाव, प्रभावित, प्रभावी

विवाद, विवादित, विवादग्रस्त, वादविवाद, निर्विवाद

असल, असलियत

Comprehension Questions

1. What kind of ads/commercials Indian consumers like?

a. those that suggest the least wastage

b. those that include glamorous people

c. those that a family can watch together

d. those that are supported by research

2. Based on the text, which is the most expensive factor in advertising?

a. charges of advertising agencies

b. charges by actors/actresses

c. charges paid to the media

d. charges incurred for production

Ads Media

Module 5.2

विज्ञापन उद्योग – 2

विज्ञापन के माध्यम



विज्ञापन और संचार-मीडिया

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विज्ञापनों का जितना महत्व हैं, उतना ही महत्व इन संदेशों के वाहक यानी संचार-मीडिया का भी है, ताकि संदेश अपने सम्पूर्ण रूप में उपभोक्ता तक पहुँचे। ये वाहक तकनीकी उपकरण हैं जिनके माध्यम से संदेश प्रेषित किए जाते हैं। ये माध्यम निर्माता और उपभोक्ता के बीच मध्यस्थ का कार्य करते हैं। वैश्वीकरण के इस युग में विज्ञापन माध्यमों का महत्व और बढ़ गया है क्योंकि बाजार एक ही जैसे उत्पादों से भरा पड़ा है और अपने उत्पादों की सफलता पर हर कंपनी का अस्तित्व निर्भर करता है। विज्ञापन के क्षेत्र में व्यावसायिक दक्षता के कारण इस क्षेत्र में गुणवत्ता काफी बढ़ी है, जिसके फलस्वरूप विज्ञापनों के संदेश के प्रस्तुतीकरण का तरीका दिनोंदिन निखरा है।

संचार-माध्यम और उपभोक्ता-वर्ग

एक बात और ध्यान देने योग्य है। हर माध्यम का अलग-अलग उपभोक्ता-वर्ग है। जैसे – इंटरनेट कम्प्यूटर साक्षरों को, रेडियो ग्रामीणजनों को, फिल्में सिनेप्रेमियों को, और पत्र-पत्रिकाएं शिक्षित वर्ग को अधिक प्रभावित करते हैं। मगर यह कोई जरूरी नहीं कि एक ही माध्यम से दिया गया संदेश अपने लक्ष्य तक पहुँचे। इसीलिए एक साथ अनेक माध्यमों का चुनाव करके भी उत्पाद-निर्माता बहुसंख्यक मध्यवर्ग तक पहुँचने की कोशिश करता है। अब तो विज्ञापन माध्यमों के दायरे में परम्परागत माध्यमों से लेकर जनसंचार की चौथी लहर के माध्यम जैसे इंटरनेट, मोबाइल आदि भी शामिल हो चुके हैं।

प्रमुख विज्ञापन माध्यमों का वर्गीकरण

प्रेस/मुद्रित माध्यम –         समाचारपत्र, पत्रिकाएं, हैंण्डबिल, ब्रोशर आदि।

प्रसारण माध्यम –            रेडियो, टी.वी., सिनेमा, लाउडस्पीकर, केबल नेटवर्क आदि।

परंपरागत माध्यम –        हाथी पर प्रचार, कठपुतली, मेले और प्रदर्शनियाँ, डुगडुगी, नौटंकी, लोक-नृत्य आदि।

आउटडोर माध्यम –         होर्डिंग, बैनर, दीवार लेखन, पोस्टर, पी.ओ.पी.

दुकानों पर प्रचार-सामग्री –  शोकेस, पैकेजिंग, ग्लो साइन, बैलून, लैंपपोस्ट  आदि।

आधुनिक माध्यम –          इंटरनेट, मोबाइल (एम.एम.एस.) , टेलीफोन, लेड डिस्प्ले।

उपहार माध्यम –             बैग, डायरी, पेन, कैलेंडर जैसी उपहार सामग्रियों पर विज्ञापन।

डाक माध्यम –               डायरेक्ट मेल

वाहनों पर विज्ञापन –      बस, ट्रेन, वैन आदि  

लोकप्रिय खेलों या फ़िल्मी समारोहों में खिलाड़ियों के कपड़े/जूते, खेल के सामान और मंच-सज्जा पर, कार, बस, ट्रेन और अन्य वाहनों पर लगाए स्टिकर, होर्डिंग (बिलबोर्ड), पोस्टर आदि कई अन्य प्रकार के विज्ञापनों का प्रवेश भी हो गया है। इनके अतिरिक्त टेलीमार्केटिंग, व्यक्तिगत विपणन, डाक द्वारा विपणन, टेलीविजन स्काई शापके माध्यम से विपणन और इन्टरनेट के माध्यम से ऑनलाइन विपणनभी प्रचलित हो रहे हैं।

टेलीमार्केंटिंग

टेलीमार्केंटिंग यानी टेलीफोन के माध्यम से की जाने वाली मार्केटिंग में कम्पनियाँ ग्राहकों के डेटाबेसहासिल करके उनसे सीधे सम्पर्क करती हैं और अपने उत्पाद का विज्ञापन तथा विपणन करती हैं। टेलीफोन के माध्यम से ग्राहकों से सम्पर्क साधा जाता है, उन्हें उत्पाद के बारे में सूचना दी जाती है और यदि ग्राहक की प्रतिक्रिया उत्साहजनक होती है तो कम्पनी का प्रतिनिधि उस संभावित ग्राहक से मिलता है और उत्पाद या सेवा को खरीदने के लिए उसे प्रेरित करता है। देश में 1800 और 1600 से शुरू होने वाले निःशुल्क और सशुल्क टेलीफोन नम्बर का ये व्यावसायिक कम्पनियां ग्राहकों के लिए उत्पाद के ऑर्डर देने या सेवा उपलब्ध कराने और सेवा या उत्पाद की जानकारी पाने के लिए इस्तेमाल करती हैं।

ऑनलाइन शापिंग

इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन विपणनमें उत्पादक अपने उत्पादों के विज्ञापन इंटरनेट पर देते हैं । उसके बारे में तकनीकी जानकारी व उपयोग का तरीका आदि दिखाते हैं। साथ ही क्रेडिट कार्ड व अन्य भुगतान के तरीकों से ऑर्डर इंटरनेट पर ही बुक करके उपभोक्ताओं के घर व्यक्तिगत रूप से या डाक और कोरियर द्वारा भिजवाते हैं। ई-बेऔर फ़्लिपकार्ट डाट काम नामक कम्पनी और बहुत दूसरे पोर्टल ई-शॉपिंग की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।

स्काई शॉप

टेलीविजन के माध्यम से विपणन भारत में निजी टेलीविजन चैनलों के आगमन के साथ ही शुरू हो गया था और अब तो दूरदर्शन पर भी स्काईशॉप के विज्ञापन देखे जा सकते हैं। ये स्काईशॉप दरअसल उपभोक्ता के घर से दूर, लेकिन मात्र एक टेलीफोन कॉल की दूरी पर स्थित दुकानें हैं जहां से उपभोक्ता अपनी पसंद का सामान खरीद सकता है। चूँकि उपभोक्ता इस स्काईशॉपतक नहीं पहुँच सकता, इसलिए उपभोक्ताओं को टेलीविजन पर ही उत्पादन की जानकारी दी जाती है। इसमें उत्पाद का प्रदर्शन, उसके उपयोग की जानकारी, उसके फ़ायदे आदि सब वैसे ही बताये जाते हैं जैसे किसी दुकान पर आने वाले ग्राहक को जानकारी दी जाती है। टेलीविजन पर आने वाले स्काईशॉप के विज्ञापन इसीलिए काफ़ी लम्बे और कभी कभी तो एकाध घण्टे के भी होते हैं। विज्ञापनों में लगातार टेलीफ़ोन नम्बर भी दिखाए जाते हैं साथ ही साथ उपभोक्ताओं को प्रेरित करने और उकसाने के लिए यदि आप अभी ऑर्डर बुक करते हैं तो आपको मिलेगा इसके साथ यह मुफ्तजैसे वाक्य भी दोहराए जाते हैं। इसमें उत्पाद को इस्तेमाल करने वालों के अनुभव भी दिखाए जाते हैं। विशेष रूप से बने इंफ़ोमर्शियल भी प्रसारित होते हैं जो केवल टेलीमार्केटिंग के उद्देश्य से ही बनते हैं। कई लोकप्रिय कलाकार और खिलाड़ी भी इसमें प्रचार करते मिल जाएंगे।

(इस माड्यूल  की सामग्री हेना नक़वी कृत पत्रकारिता एवं जनसंचार (उपकार प्रकाशन) के अध्याय 18, पृ.सं 167-169 पर आधारित है। विस्तृत जानकारी के लिए उपर्युक्त पुस्तक पढ़ें)

उपयोगी शब्दार्थ

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

विज्ञापन m

वर्तमान

परिप्रेक्ष्य m

वाहक m/f

सम्पूर्ण रूप में

तकनीकी उपकरण m

प्रेषित करना

मध्यस्थm/f

अस्तित्व m

निर्भर करना

व्यावसायिक दक्षता f

फलस्वरूप

प्रस्तुतीकरण m

निखरना

ग्रामीणजन m/f

शिक्षित वर्ग m

बहुसंख्यक m

परम्परागत

जनसंचार m

वर्गीकरण m

प्रसारण m

कठपुतली f

प्रदर्शनी f

डुगडुगी f

नौटंकी   f

लोकनृत्य m

इनके अतिरिक्त

व्यक्तिगत

विपणन m

प्रचलित होना

सम्पर्क साधा जाता है

प्रतिक्रिया f

उत्साहजनक

प्रतिनिधि m/f

संभावित ग्राहक m/f

निःशुल्क

सशुल्क 

आगमन m

प्रदर्शन   m

प्रेरित करना

उकसाना

advertisement, commecial

present

perspective

carrier

completely

technical instrument

to send

mediator

existence

to depend

business related efficiency

consequently

presentation

to emerge in its inner beauty

rural folks

educated class

majority

traditional

public media

classification

transmission

puppet

exhibition

a kind of small drum

folk drama

folk dance

besides these

personal

marketing

to be in wide use

contact is made

reaction

encouraging

representative

prospective customer

free of charge

subject to charge

coming, incoming

demonstration

to inspire

to excite

Linguistic and Cultural Notes

1. Notice the use of the hyphen in some examples of this unit – अलग-अलग, उपभोक्ता-वर्ग, ई-बे, ई-शॉपिंग, स्काई-शॉप. While in the first two examples, the use of the hyphen is considered superfluous, it is recommended for the last three compound words from English to provide clarity.

2.  Businesses keep in mind relevant ways to attract the consumers’ attention through ads while keeping the ads cost effective. Consequently, writing on public walls is a much cheaper form of advertising as the advertiser very often does not have to pay for the use of of these walls. In rural areas, personal announcements delivered by a town-crier on a rikshaw using a handheld mike is a common pratice and a part of the same strategy.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

विज्ञापन

इजाफ़ा

बदनामी

निष्कर्ष

विवाद

खासियत

लुभावना

दरअसल

दबदबा

इश्तहार

वृद्धि

अपयश

नतीजा

झगड़ा

विशेषता

आकर्षक

असल में, वास्तव में

प्रभुत्व

Structurally Related Words (Derivatives)

ज्ञापन, विज्ञापन

वहन, वाहन, वाहक

पूर्ण, पूर्णता, संपूर्ण, संपूर्णता

प्रेषण, संप्रेषण, प्रेषित, प्रेषक

मध्य, मध्यस्थ, मध्यस्थता

व्यवसाय, व्यवसायी, व्यवसायक, व्यवसायिक, व्यावसायिक

प्रस्तुति, प्रस्तुतीकरण

शिक्षा, शिक्षक, शिक्षिका, शिक्षण, प्रशिक्षण, शिक्षित, सुशिक्षित, अशिक्षित, शैक्षिक

परम्परा, परम्परागत, पारम्परिक

वर्ग, वर्गीकरण

प्रसार, प्रसारण

दर्शन, दर्शक, दृश्य, दृश्यता, प्रदर्शन, प्रदर्शनी, प्रदर्शक, प्रदर्शनकारी, दार्शनिक

लोक, लौकिक

क्रिया, प्रक्रिया, प्रतिक्रिया, प्रतिक्रियात्मक, सक्रिय, सक्रियता, निष्क्रिय, निष्क्रियता

संभावना, संभावित

शुल्क, निःशुल्क, सशुल्क

प्रेरणा, प्रेरणाप्रद, प्रेरणादायक, प्रेरित

Comprehension Questions

1. Based on the text, which medium has proved most effective in marketing?

a. telemarketing

b. internet

c. broadcasting media

d. none of the above

2. Based on the text, which factor has proved to be more effective in e-shopping?

a. use of credit card and home delivery

b. providing detailed product information

c. additional incentives for tele-shoppers

d. no comparative information in the text

Ads and Employment

Module 5.3

विज्ञापन उद्योग – 3

विज्ञापन और रोज़गार


भारत का विज्ञापन-जगत

भारत  रचनात्मकता के लिए एक महान स्रोत माना जाता है और यहाँ के लोगों की विदेश में हर तरफ मांग  है | अंतरराष्ट्रीय विज्ञापन समुदाय में उनका बहुत सम्मानजनक स्थान है और देश अब इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर है। भारतीय विज्ञापन उद्योग का न केवल व्यावसायिक योग्यता के कारण वैश्विक प्रभाव  देखा जा रहा है बल्कि दुनिया भर में उनकी सराहना भी की जा रही है। भारत में विज्ञापन क्षेत्र में स्थानीय प्रतिभा अपने दिलचस्प विचारों और अवधारणाओं के साथ उच्च उत्पादन मूल्यों का दावा भी करती है। दुनिया इस तथ्य को जानने लगी है कि  भारत विज्ञापन की बड़ी संभावनाओं वाला बाजार है। हर संभव वैश्विक ब्रांड को हमने भारत में उपलब्ध देखा है। विज्ञापन उद्योग के लिए यह सम्मान का विषय है कि इस नए अवसर का यह अधिकतम उपयोग कर पा रहा है। एक वैश्विक ब्रांड पर काम करने का अवसर मिलने से स्थानीय प्रतिभा को अपने विचारों को लागू करने और सारी दुनिया के आगे रखने का मौका मिल रहा है। इस ज्ञान-संचालित उद्योग में भारतीय विज्ञापन उद्योग के विचारों और ज्ञान ने सफलता की कई कहानियों और पटकथाओं को साकार किया है। दुनिया भर में अन्य उद्योगों की तरह  विज्ञापन उद्योग में भी  अपने काम की थोक आउटसोर्सिंग के लिए भारतीय कर्मचारियों की भर्ती की बेहद माँग है। विज्ञापन उद्योग के लिए आवश्यक योग्यताएं
विज्ञापन कैरियर में विविधता है और कई विभागों तक इसका क्षेत्र फैला हुआ है। रचनात्मक विभाग, उत्पादन, मीडिया, और अनुसंधान के क्षेत्र में अलग अलग पदों की पेशकश की जाती है। हर पद का अंतिम लक्ष्य एक ही है कि यथासंभव क्लाइंट  की  ज़रूरत को पूरा करते हुए बिक्री बढ़ाने का लक्ष्य पूरा करना। हालांकि कुछ विशेष शैक्षिक पृष्ठभूमि विज्ञापन के व्यवसाय की तह तक पहुँचने में  सहायक होती है लेकिन नियोक्ता पर्यवेक्षी स्तर पर सबसे ज़्यादा ऐसे उम्मीदवारों को पसंद करते हैं जिनमें रचनात्मकता, उच्च प्रेरणा, लचीलापन, तनाव व दबाव के वातावरण में काम करने का सामर्थ्य, प्रस्तुति-प्रबंधन, अन्य प्रबंधकों, पेशेवर कर्मचारियों, ग्राहक कंपनियों और जनता के साथ अपनी बात मनवाने में संवाद करने की क्षमता (मौखिक और लेखन दोनों में), और अच्छा निर्णय लेने का कौशल हो। शैक्षिक योग्यताओं में समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, साहित्य, पत्रकारिता, दर्शन में स्नातक डिग्री आदि का विशेष महत्व है। अब तो मीडिया या जनसंचार-माध्यमों में योग्यता भी महत्वपूर्ण है। मूल रूप से आवश्यक योग्यता काम के प्रकार पर निर्भर करती है।  

विज्ञापन उद्योग बहुत जटिल है। कई अलग अलग प्रकार के कार्यों के  सफल अभियान के लिए कुशल लोगों की आवश्यकता होती है। कैरियर की संभावनाओं को देखते हुए विश्लेषणात्मक, अधिक रचनात्मक, कल्पनाशील, लेखन कुशल , कलात्मक स्वभाववाले लोगों के लिए यहाँ अधिक अवसर हैं।

इस क्षेत्र में नौकरी के आवेदकों को अधिक स्थिर वातावरण लेकिन एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी बाजार का सामना करना पड़ता है। आगामी वर्षों के लिए पूर्वानुमान करनेवाले विपणन अनुसंधान विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में विज्ञापन प्रबंधक, और दृश्य कलाकारों की अधिक से अधिक मांग बढ़ने की संभावनाएं हैं। इस संबंध में प्रेरित, ऊर्जावान, श्रेष्ठ विश्लेषणात्मक और संप्रेषण कौशल के साथ कुशल आयोजन करनेवाले उम्मीदवारों को सबसे अच्छी नौकरी प्राप्त होगी।


विज्ञापन-क्षेत्र में कैरियर-चयन

विज्ञापन के छात्रों के लिए कैरियर का चयन के विभिन्न विकल्प हैं, जैसे विज्ञापन मीडिया नियोजक, मीडिया शोधकर्ता, कॉपीराइटर/इलस्ट्रेटर, खाता योजना, क्रिएटिव विभाग, उत्पादन प्रबंधक, विज्ञापन  निदेशक, सार्वजनिक संबंध निदेशक, कलाकार।

  • विज्ञापन मीडिया नियोजक एजेंसियों की मदद से सबसे अच्छे आउटलेट या माध्यम का चयन करता है। उसके सामने विकल्प हैं प्रिंट मीडिया (अखबार,पत्रिका ) बाह्य )होर्डिंग्स, कियोस्क और बस पैनल), और रेडियो, टीवी, इंटरनेट। इच्छित ग्राहक तक पहुँचने के लिए उचित माध्यम का चयन और वहां सटीक समय और स्थान को खरीदना उनका मुख्य काम है। उन्हें गणना में अच्छे होने के साथ साथ कुशल वार्ताकार भी होना चाहिए. ताकि वे कंपनी के बजट की देखभाल और अपने ग्राहक के पैसे खर्च करने में बुद्धिमानी और जिम्मेदारी का परिचय दे सकें।
  • मीडिया शोधकर्ता अनुसंधान विभाग के लिए विज्ञापन अभियान की प्रभावशीलता को मापने की कोशिश करता है। यह अनुसंधान द्वारा रचनात्मकता को अपनी कार्यनीति पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक वैज्ञानिक और औसत दर्जे का आधार प्रदान करता है।
  • रचनात्मक विभाग विज्ञापन की संकल्पना करता है। इसमें  कॉपी राइटिंग  विभाग और कला विभाग  होते हैं।
  • कॉपीराइटर एक संपूर्ण  विज्ञापन अभियान को शब्दों में उतारते हैं। टेलीविज़न-विज्ञापन  के लिए कहानी की स्टोरी बोर्ड बनाने और रेडियो-विज्ञापन के लिए पूरे कथ्य और जिंगल के निर्माण के लिए ज़िम्मेदार होते हैं – अर्थात् सारे विज्ञापन लेखन की ज़िम्मेवारी इनकी होती है।
  • योजना खाता सर्विसिंग विभाग में वरिष्ठ स्तर का पद  है। यह बजट सहित समग्र कार्यनीतिक योजना तैयार करने, सही मीडिया और संचार संदेश में ग्राहक के साथ बातचीत के बाद उसे घेरने और आंतरिक रचनात्मक टीम के साथ मीडिया नियोजन विभाग और यदि आवश्यक हो तो बाजार अनुसंधान एजेंसी के साथ ताल-मेल बनाता है।
  • खाता विभाग में एक लेखा कार्यकारी होता है जो ग्राहक सेवा विभाग में काम करता है और सभी के व्यवहार का ख्याल रखता है। उसे सबसे प्रभावी तरीका पता है, मीडिया और उनकी लागत, प्रभावशील ग्राहक के उत्पाद या सेवा को विज्ञापित करना आदि।
  • विज़ुअलाइर्ज़ (visualizers) दृश्य अवधारणाओं पर काम करते हैं और फैसला लेते हैं कि ग्राफ़िक्स सहित संदेश का समग्र ले-आउट अर्थात् चित्र विज्ञापन में कैसे पेश किया जाएगा।

उपयोगी शब्दार्थ

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

रचनात्मकता f

स्रोत m

सम्मानजनक

सराहना f

तथ्य m

संभावना f

उपलब्ध

स्थानीय प्रतिभा f

ज्ञान-संचालित उद्योग m

पटकथा f

साकार करना

विविधता f

अनुसंधान m

पेशकश करना

यथासंभव

शैक्षिक पृष्ठभूमि f

नियोक्ता m/f

पर्यवेक्षी स्तर m

लचीलापन m

सामर्थ्य  m

प्रस्तुति-प्रबंधन  m

पेशेवर कर्मचारी m/f

मौखिक

समाजशास्त्र m

मनोविज्ञान m

पत्रकारिता f

दर्शन m

स्नातक डिग्री f

अभियान m

विश्लेषणात्मक

कल्पनाशील

आवेदक m/f

प्रतिस्पर्धी बाजार m

पूर्वानुमान m

दृश्य कलाकार m/f

ऊर्जावान

संप्रेषण कौशल m

विकल्प m

सटीक

कुशल वार्ताकार m/f

प्रभावशीलता f

कार्यनीति f

संकल्पना f

मीडिया नियोजन विभाग m

creativity

source

respectable

praise

fact

possibility, probability

available

local talent

knowledge-driven industry

filmscript

to realize

diversity

research

to offer

as much as possible

educational background

employer

supervisor level

flexibility

capability

management of presentations

professional employee

oral

sociology

psychology

journalism

philosophy

graduate degree

campaign

analytical

imaginative

applicant

competitive market

forecast

visual artist

energetic

communicative proficiency

alternative

appropriate

skilled conversationalist

impact-making

strategy

concept

media appointment department

Linguistic and Cultural Notes

1. The following is a typical formal written text which will change drastically if transformed to the spoken style. English words are likely to replace many of the nouns and adjectives in this segment.

आगामी वर्षों के लिए पूर्वानुमान करनेवाले विपणन अनुसंधान विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में विज्ञापन प्रबंधक, और दृश्य कलाकारों की अधिक से अधिक मांग बढ़ने की संभावनाएं हैं। इस संबंध में प्रेरित, ऊर्जावान, श्रेष्ठ विश्लेषणात्मक और संप्रेषण कौशल के साथ कुशल आयोजन करनेवाले उम्मीदवारों को सबसे अच्छी नौकरी प्राप्त होगी.

2. . India’s diversity of languages and cultures seems to have enriched the vision of many professionals in India’s advertising sector. The creativity of many such professionals is beginning to be noticed beyond India’s borders and foreign firms are therefore outsourcing adverstising related work to India.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

सम्मानजनक

सराहना

ज्ञान

अनुसंधान

मौखिक

मान, इज़्ज़त

प्रशंसा, तारीफ़

विद्या

शोध

ज़बानी, मुंहज़बानी

Structurally Related Words (Derivatives)

रचना, रचनात्मक, रचनात्मकता, रचनाकार, संरचना                     

मान, सम्मान, माननीय, सम्माननीय, सम्मानजनक, मानद

शिक्षा, शिक्षक, शिक्षिका, शिक्षण, प्रशिक्षण, शिक्षित, सुशिक्षित, अशिक्षित, शैक्षिक

नियुक्त, नियुक्ति, नियोक्ता

समर्थ, सामर्थ्य

मुख, मौखिक, मुख्य, मुख्यतः

पत्र, प्रपत्र, पत्रकार, पत्रकारिता

दर्शन, दर्शक, दृश्य, दृश्यता, प्रदर्शन, प्रदर्शनी, प्रदर्शक, प्रदर्शनकारी, दार्शनिक                       

स्नान, स्नातक

विश्लेषण, विश्लेषक, विश्लेषणात्मक

आवेदन, आवेदक

प्रतिस्पर्धा, प्रतिस्पर्धी

कला, कलात्मक, कलाकार

चयन, चयनात्मक

कुशल, कुशलता, कौशल

कल्पना, परिकल्पना, काल्पनिक, संकल्पना

Comprehension Questions

1. Which factor has brought greater prominence to Indian adverstising agencies in the international market?

a. professional qualifications

b. ideas, insight and creativity

c. knowledge about the profession

d. communicative competence

2. Which professional in advertising agencies deals directly with the product marketers?

a. accountant

b. visualizer

c. copyrighter

d. media manager

Ads Market Move to Rural India

Module 5.4

विज्ञापन उद्योग 4

विज्ञापन बाज़ार अब चला गांव की ओर


भारतीय बाज़ार एक नई करवट ले रहा है। उसका विस्तार चौंकाने वाला है और समृद्धि चौंधियानेवाली। पिछले दस सालों में भारतीय बाज़ार का विस्तारवाद कई तरह से निंदा और आलोचना के केंद्र में भी है। बावजूद इसके यह बढ़ता जा रहा है और रोज नई संभावनाओं के साथ और विस्तार ले रहा है। बाज़ार की भाषा, उसके मुहावरे, उसकी शैली और शिल्प सब कुछ बदल गए हैं। यह भाषा आज की पीढ़ी समझती है और काफी कुछ उस पर चलने की कोशिश भी करती है। विज्ञापन बाजार के नियंता अब इसलिए ग्रामीण भारत की ओर चल पड़े हैं।

भारतीय बाज़ार इतने संगठित रूप में और इतने सुगठित तरीके से कभी दिलोदिमाग पर नहीं छाया था, लेकिन उसकी छाया आज इतनी लंबी हो गई है कि उसके बिना कुछ संभव नहीं दिखता। भारतीय बाज़ार अब सिर्फ़ शहरों और कस्बों तक केंद्रित नहीं रहे। वे अब गाँव में नई संभावनाएं तलाश रहे हैं। भारत गाँव में बसता है, इस सच्चाई को हमने भले ही न स्वीकारा हो, लेकिन भारतीय बाज़ार को कब्जे में लेने के लिए मैदान में उतरे प्रबंधक इसी मंत्र पर काम कर रहे हैं। शहरी बाज़ार अपनी हदें पा चुका है। वह संभावनाओं का एक विस्तृत आकाश प्राप्त कर चुका है, जबकि ग्रामीण बाज़ार एक नई और जीवंत उपभोक्ता शक्ति के साथ खड़े दिखते हैं। बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा, अपनी बढ़त को कायम रखने के लिए मैनेजमेंट गुरुओं और कंपनियों के पास इस गाँव में झाँकने के अलावा और विकल्प नहीं है।

एक अरब आबादी का यह देश जिसके 73 फ़ीसदी लोग आज भी हिंदुस्तान के पांच लाख, 72 हजार गाँवों में रहते हैं, अभी भी हमारा बाज़ार प्रबंधकों की जकड़ से बचा हुआ है। पर जाहिर है निशाना यहीं पर है। तेज़ी से बदलती दुनिया, विज्ञापनों की शब्दावली, जीवन में कई ऐसी चीज़ों की बनती हुई जगह, जो कभी बहुत गैरज़रूरी थी शायद इसीलिए प्रायोजित की जा रही है। भारतीय जनमानस में फैले लोकप्रिय प्रतीकों, मिथकों को लेकर नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। ये प्रयोग विज्ञापन और मनोरंजन दोनों दुनियाओं में देखे जा रहे हैं। भारत का ग्रामीण बाज़ार अपने आप में दुनिया को विस्मित कर देने वाला है। परंपरा से संग्रही रही महिलाएं, मोटा खाने और मोटा पहनने की सादगी भरी आदतों से जकड़े पुरुष आज भी इन्हीं क्षेत्रों में दिखते हैं। शायद इसी के चलते जोर उस नई पीढ़ी पर है, जिसने अभी-अभी शहरी बनने के सपने देखे हैं। भले ही गाँव में उसकी कितनी भी गहरी जड़ें क्यों न हों। गाँव को शहर जैसा बना देना, गाँव के घरों में भी उन्हीं सुविधाओं का पहुँच जाना, जिससे जीवन सहज भले न हो, वैभवशाली ज़रूर दिखता हो। यह मंत्र नई पीढ़ी के गले उतारे जा रहे हैं। आज़ादी के छह  दशकों में जिन गाँवों तक हम पीने का पानी तक नहीं पहुँचा पाए, वहाँ कोला और पेप्सी की बोतलें हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मुँह चिढ़ाती दिखती हैं।

गाँव में हो रहे आयोजन आज लस्सी, मठे और शरबत की जगह इन्हीं बोतलों के सहारे हो रहे हैं। ये बोतलें सिर्फ़ संस्कृति का विस्थापन नहीं हैं, यह सामूहिकता का भी गला घोंटती हैं। गाँव में हो रहे किसी आयोजन में कई घरों और गाँवों से मांगकर आई हुई दही, सब्जी या ऐसी तमाम चीजें अब एक आदेश पर एक नए रूप में उपलब्ध हो जाती हैं। दरी, चादर, चारपाई, बिछौने, गद्दे और कुर्सियों के लिए अब टेंट हाउस हैं। इन चीज़ों की पहुँच ने कहीं न कहीं सामूहिकता की भावना को खंडित किया है। भारतीय बाज़ार की यह ताकत हाल में अपने पूरे विद्रूपता के साथ प्रभावी हुई है। सरकारी तंत्र के पास शायद गाँव की ताकत, उसकी संपन्नता के आंकड़े न हों, लेकिन बाज़ार के नए बाजीगर इन्हीं गाँवों में अपने लिए राह बना रहे हैं। नए विक्रेताओं को ग्रामीण भारत की सच्चाइयाँ जानने की ललक अकारण नहीं है। वे इन्हीं जिज्ञासाओं के माध्यम से भारत के ग्रामीण ख़जाने तक पहुँचना चाहते हैं। उपभोक्ता सामग्री से अटे पड़े शहर, मेगा माल्स और बाज़ार अब यदि ग्रामीण भारत में अपनी जगह तलाश रहे हैं, तो उन्हें उन्हीं मुहावरों का इस्तेमाल करना होगा, जिन्हें भारतीय जनमानस समझता है।

विविधताओं से भरे देश में किसी संदेश का आख़िरी आदमी तक पहुँच जाना साधारण बात नहीं है। कंपनियां अब ऐसी कार्यनीति बना रही हैं, जो उनकी इस चुनौती को हल कर सकें। चुनौती साधारण वैसे भी नहीं है, क्योंकि पांच लाख, 72 हजार गाँव भर नहीं, वहाँ बोली जाने वाली 33 भाषाएं, 1652 बोलियाँ, संस्कृतियाँ, उनकी उप संस्कृतियाँ और इन सबमें रची-बसी स्थानीय भावनाएं इस प्रसंग को बेहद दुरूह बना देती हैं। यह ग्रामीण भारत, एक भारत में कई भारतों के सांस लेने जैसा है। कोई भी विपणन कार्यनीति इस पूरे भारत को एक साथ संबोधित नहीं कर सकती। गाँव में रहने वाले लोग, उनकी ज़रूरतें, खरीद और उपभोग के उनके तरीके बेहद अलग-अलग हैं। शहरी बाज़ार ने जिस तरह के तरीकों से अपना विस्तार किया वे फ़ार्मूले इस बाज़ार पर लागू नहीं किए जा सकते। शहरी बाज़ार की हदें जहाँ खत्म होती हैं, क्या भारतीय ग्रामीण बाज़ार वहीं से शुरू होता है, इसे भी देखना ज़रूरी है। ग्रामीण और शहरी भारत के स्वभाव, संवाद, भाषा और शैली में जमीन आसमान का फ़र्क है। देश के मैनेजमेंट गुरु इन्हीं विविधताओं को लेकर शोधरत हैं। यह रास्ता भारतीय बाज़ार के अश्वमेध जैसा कठिन संकल्प है। जहाँ पग-पग पर चुनौतियाँ और बाधाएं हैं।

भारत के गाँवों में सालों के बाद झाँकने की यह कोशिश भारतीय बाज़ार के विस्तारवाद के बहाने हो रही है। इसके सुफल प्राप्त करने की कोशिशें हमें तेज़ कर देनी चाहिए, क्योंकि किसी भी इलाके में बाज़ार का जाना वहाँ की प्रवृत्तियों में बदलाव लाता है। वहाँ सूचना और संचार की शक्तियां भी सक्रिय होती हैं, क्योंकि इन्हीं के सहारे बाज़ार अपने संदेश लोगों तक पहुँचा सकता है। जाहिर है यह विस्तारवाद सिर्फ़ बाज़ार का नहीं होगा, सूचनाओं का भी होगा, शिक्षा का भी होगा। अपनी बहुत बाज़ारवादी आकांक्षाओं के बावजूद वहाँ काम करने वाला मीडिया कुछ प्रतिशत में ही सही, सामाजिक सरोकारों का ख्याल ज़रूर रखेगा, ऐसे में गाँवों में सरकार, बाज़ार और मीडिया तीन तरह की शक्तियों का समुच्चय होगा, जो यदि जनता में जागरूकता के थोड़े भी प्रश्न जगा सका, तो शायद ग्रामीण भारत का चेहरा बहुत बदला हुआ होगा।

भारत के गाँव और वहाँ रहने वाले किसान बेहद ख़राब स्थितियों के शिकार हैं। उन्हें भूमिहीन बनाने के कई तरह के प्रयास चल रहे हैं। इससे एक अलग तरह का असंतोष भी समाज जीवन में दिखना शुरू हो गया है। भारतीय बाज़ार के नियंता इन परिस्थितियों का विचार कर अगर मानवीय चेहरा लेकर जाते हैं, तो शायद उनकी सफलता की दर कई गुना हो सकती है। फिलहाल तो आने वाले दिन इसी ग्रामीण बाज़ार पर कब्जे के कई रोचक दृश्य उपस्थित करने वाले हैं, जिसमें कितना भला होगा और कितना बुरा इसका आकलन होना अभी बाकी है।

आज भारत में ग्रामीण बाज़ार तेज़ी से उभर रहा है. ग्रामीण बाज़ार के 78 करोड़ लोग, 50% योगदान देते हैं. पिछले 10 वर्षों में 10 करोड़ ग्रामीण जनसंख्या, गरीबी से बाहर आई है. रु. 65,000 करोड़ की उपभोक्ता वस्तुएं, रु. 45,000 करोड़ के कृषि उत्पाद, रु.8,000 करोड़ के वाहन गांवों में बिक रहे हैं. किसान क्रेडिट कार्डों की संख्या 5 करोड़ तक पहुंच गयी है. 4.8 करोड़ लोगों के पास टीवी हैं. कोलगेट और पेप्सोडेंट ने तो अपना ब्रांड भी हिंदी में पंजीकृत करवाया है. टेलिकॉम में विकास का अगला चरण ग्रामीण बाज़ारों से ही आयेगा।

साभार – लेख– संजय द्विवेदी  http://www.swatantraawaz.com/sanjay_diwedi.htm

उपयोगी शब्दार्थ

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

करवट f

चौंकाने वाला

समृद्धि f

चौंधियाने वाला

निंदा f

आलोचना f

शैली f

शिल्प m

नियंता

ज़ाहिर है

शब्दावली f

प्रायोजित करना

जनमानस m

विविधता f

प्रतीक m

मिथक m

विस्मित

वैभवशाली

लोकतांत्रिक व्यवस्था f

मुँह चिढ़ाना

विस्थापन m

सामूहिकता f

विद्रूपता f

संपन्नता f

जिज्ञासा f

स्थानीय भावनाएं f.pl.

दुरूह

संबोधित करना

संकल्प m

प्रवृत्ति f

सामाजिक सरोकार m

समुच्चय  m

जागरूकता f

आकलन m

पंजीकृत

posture of sleeping on one side

startling

prosperity

dazzling

condemning, disapproval

criticism

style

architecture

controller

it’s obvious

vocabulary

to sponsor

popular mind

diversity

symbol

myth

surprised

prosperous

democratic system

to make fun of something/someone

displacement

collectivism

disfigurement

prosperity

desire to know

local emotions

abstruse

to address

determination

attitude

social concern

collection

awakening

evaluation

registered

Linguistic and Cultural Notes

1.  The literary style of this essay is characterized by frequent use of figurative language, thereby making the reading somewhat florid for those whose first language is not Hindi. The authorial voice often transcends the literal meaning.

2. In spite of the emphasis on English education in India, use of English language is not common for most people. This is especially true of rural India which is home to more than 70% of the Indian population. For more information on this aspect see the chapter on language in the National Knowledge Commission Report (2006) http://knowledgecommission.gov.in/downloads/report2009/eng/report09.pdf

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

समृद्धि

निंदा

विस्मित

वैभवशाली

संकल्प

जागरूकता

आकलन

संपन्नता, धनाढ्यता

आलोचना

चकित, आश्चर्य-चकित, अचंभित

संपन्न, धनाढ्य

दृढ़ निश्चय

जागृति

मूल्यांकन

Structurally Related Words (Derivatives)

समृद्धि, समृद्ध, समृद्धिशाली

निंदा, निंदात्मक, निंदक

आलोचना, आलोचक

शिल्प, शिल्पी, शिल्पकार

शब्द, शब्दावली, शब्दसूची, शाब्दिक, शब्दशः

प्रयोजन, प्रायोजित करना

विविध, विविधता, विविधीकरण, वैविध्य

प्रतीक, प्रतीकात्मक

विस्मय, विस्मित

लोकतंत्र, लोकतांत्रिक

समूह, सामूहिक, सामूहिकता

संपन्न, संपन्नता, संपत्ति

स्थान, स्थानीय

संबोधन, संबोधित

वृत्ति, प्रवृत्ति

समाज, सामाजिक

जागरूक, जागरूकता

Comprehension Questions

1.  Who is overjoyed about the markets expanding into rural India?

a. companies which make products

b. advertisement agencies

c. people in rural parts of Indis

d. None of the above

2. What is the general outlook of the author?

a. happy

b. sad

c. critical

d. cynical

Supplementary Materials Module 5

Reading

1.द ग्रेट इंडियन विज्ञापन बाज़ार-आनंद मिश्र

http://www.moneymantra.net.in/detailsPage.php?id=8427&title=Cover%20Story&page=cs

2.आईपीएल से काटा विज्ञापन जगत ने माल

http://hindi.business-standard.com/storypage.php?autono=4253

3.चुनावी विज्ञापन : मीडिया जगत के लिए संजीवनी बूटी

http://mediakhabar.com/election-advertisement-sanjivni-buti-for-media-industry/ 

4. विज्ञापन का बाज़ार-एक दृष्टि

Posted on 8 May, 2013 जनरल डब्बान्यूज़ बर्थ,

http://rajanidurgesh.jagranjunction.com/2013/05/08/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A5%9B%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D/

5.विज्ञापन बाज़ार अब चला गांव की ओर

http://www.swatantraawaz.com/sanjay_diwedi.htm

5.विज्ञापन क्षेत्र में रोजगार  की  बहार

http://www.nayaindia.com/buniyad/advertising-jobs-in-springtime-273823.html

6.जन संचार के  पारंपरिक  माध्यम

http://ec2-50-16-192-254.compute-1.amazonaws.com/jansanchar-ke-paramprik-madhyam-dr-muktinath-jha-book-9788176670593

7.विज्ञापन के  माध्यम

https://www.google.co.in/search?q=viGyapan+ke+madhyam&oq=vi&aqs=chrome.4.69i60l3j69i57j69i59l2.5856j0j1&sourceid=chrome&ie=UTF-8

8.विज्ञापन Outdoor Advertising

http://www.tntpads.com/outdoor_hoardings.html

Listening 1.विज्ञापनों की  हिंदी लक्ष्मीनारायण बैजल – ppt

2.“व्यवसाय और हमारी भाषाएँ “टीवी चैनलों द्वारा  अपने उत्पादों के  

टेलीमार्केटिंग /टेलीशॉपिंग के हिंदी  इंफमर्शिअल्स”

डा. वशिनी शर्मा

3. वरदान साबित हुई पहले की विज्ञापन बुकिंग

http://www.moneymantra.net.in/detailsPage.php?id=1707&title=Cover%20Story&page=cs

4. वित्तीय विज्ञापनों का तिलिस्मी संसार

http://www.moneymantra.net.in/detailsPage.php?id=3889&title=&page=cs

Discussion Ideas Module 5

1.  There are hundreds of professionally produced ads on the internet. Please watch the following two and critique them from the viewpoint of marketing.  How are they supposed to catch the imagination of consumers?

Vicco Turmeric Cream Ad

http://www.youtube.com/watch?v=2BRYGTqouuE

Coming Home AirTel

http://www.youtube.com/watch?v=-DIfgb3wTYM

2.  Watch the video The Facebook Obsession or, if you cannot find it, read about it on the Internet and explain the issue and your own views about it. There is some controversy about the privacy concerns of its members, which are manipulated by the social media.

3.  In pairs, debate whether Indian businesses should allocate a sizeable proportion of their advertising budget to social media and online advertising

4.  Individually, develop a television slogan for a product of your choice and describe to the class what the ad would look like (i.e. setting, actors, action, product aspects that are emphasized).

5.  In teams, debate the state of advertising in India. Are products simply sensationalized through celebrity endorsements (such as Pepsi by Shah Rukh Khan) or else, is there a true skill in the way creative advertising is done in India (e.g. Times of India corruption ad)?

6.  In pairs, write and act out a television commercial targeted at rural consumers about either a) a hair oil that maintains black hair, or b) a cream that makes your complexion fair?

7.  Role play:  Split into groups and come up with competing advertisements for a given product.  Make a pitch to the room including a storyboard for the ad.

8.  Presentation:  Find an example of different ads for the same product.  Which different demographics are targeted?  What does that say about Indian society/consumers?

9.As a Media Marketing Strategist, what suggestions would you have for your team members in order to promote your company’s product by tapping social media like Facebook?

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