Module 6

Module Six – Outsourcing Industry

ऑउट्सोर्सिंग उद्योग

Outsourcing Industry

Business Advantage

Module 6.1

ऑउट्सोर्सिंग उद्योग -1

व्यावसायिक आउटसोर्सिंग



आउटसोर्सिंग का अर्थ

आउटसोर्सिंग एक ऐसा समझौता है जिसमें किसी निश्चित कार्य, उत्पाद या उत्पाद के किसी भाग के विनिर्माण को देश में या देश के बाहर किसी बाहरी संस्था को निष्पादित करने हेतु सौंप दिया जाता है। आउटसोर्सिंग करने के विकल्प का चयन फ़र्म के हित को ध्यान में रखकर किया जाता है जिससे कि समय, शक्ति तथा धन का बेहतरीन उपयोग किया जा सके। दिन प्रतिदिन के कार्य, प्रबन्धन कार्य, अथवा सम्पूर्ण व्यापारिक गतिविधियों का किसी बाहरी सेवा-प्रदाता को हस्तान्तरित करना आउटसोर्सिंग कहलाता है। इन कंपनियों को बी.पी.ओ. कंपनियां भी कहा जाता है। बी.पी.ओ. अंग्रेज़ी के बिज़नेस प्रोसैसिंग आउटसोर्सिंग का संक्षिप्त रूप है।

आउटसोर्सिंग तथा ऑफशोरिंग इन दोनों शब्दों के मध्य कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर होने के बावजूद भी वे शब्द एक दूसरे की जगह प्रयोग किए जाते हैं। जब आउटसोर्स इकाई किसी अन्य देश में स्थित होता है तो इस अभ्यास को  ऑफशोरिंग भी कहा जाता है। आम तौर पर ऑफशोरिंग का मतलब होता है जब व्यावसायिक संगठन अपने कुछ कार्यों को किसी अन्य देश में स्थानान्तरित करते हैं जहां टैक्स या विनिर्माण आदि में बचत हो।

एक प्रकार से यह श्रम का विभाजन है और ग्राहक एवम् सेवा-प्रदाता के मध्य एक संविदात्मक समझौता है। व्यापार खण्डों द्वारा की जाने वाली आउटसोर्सिंग में सूचना तकनीकी, मानव-संसाधन सुविधाएँ, रियल स्टेट प्रबन्धन, लेखांकन आदि सम्मिलित हैं। बहुत सी कम्पनियाँ अपने वर्तमान या भावी ग्राहकों के प्रश्नों का समाधान करने के लिए या अपने उत्पाद को बेचने के लिए अपने कॉल-सेन्टर दूसरे देशों में रखते हैं जहां उन्हें स्थानीय कर्मचारियों को कम वेतन देना पड़ता है। इन कार्यों में टेलीमार्केटिंग, ग्राहक सेवा, बाज़ार अनुसंधान, निर्माण, डिज़ाइनिंग, वेब-विकास, तथ्य-लेखन, अभियान्त्रिकी आदि का आउटसोर्सिंग होता हैं। वैश्विक परिदृश्य के विस्तृत होने के कारण प्रक्रियाएँ अब सतत रूप से आउटसोर्स की जाती हैं और इसके लिए सूचना के परिपथों द्वारा सम्पूर्ण विश्व में इन्टरनेट पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध अवसरों को प्रयोग में लाया जाता है।

आउटसोर्सिंग और भारत

आउटसोर्सिंग एक अति लोकप्रिय एवम् काम में लायी जाने वाली कार्यनीति है जो 1980 से संपन्न देशों के बड़े बड़े व्यवसायों का एक अभिन्न अंग बन चुका है। यू.एस.ए., यू.के., आस्ट्रेलिया तथा कनाडा के अनेक व्यावसायिक क्षेत्र भारत को अपने काम का आउटसोर्स कर रहे हैं, जैसे कि सूचना तकनीकी, ग्राहक समर्थन, बैक-एण्ड कार्य आदि। बहुत सारी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अपने कार्य की व्यापारिक आवश्यकताओं को सस्ती लागत के कारण भारत में आउटसोर्स करती हैं। यदि किसी कार्य की लागत यू.एस.ए. में 100 डॉलर आती है, तो भारत में उसी की लागत 20 डॉलर आती है। इस कारण कई कम्पनियाँ अपना कार्य लागत बचाने हेतु आउटसोर्स कर रही हैं। भारतीय पेशेवर व्यक्तियों की सेवाएँ अमेरिकी पेशेवरों से 4 गुना सस्ती हैं। सर्वे बताते हैं कि विश्व के साफ़्टवेयर तथा बैक-एण्ड सेवाओं के आउटसोर्सिंग कार्य का 40 प्रतिशत कार्य भारत में होता है।

            वर्ल्ड बैंक के एक सर्वे के अनुसार आउटसोर्सिंग कार्य करवाने वालों की प्रथम पसन्द भारत है। यू.एस.ए. तथा भारत के समय में लगभग बारह घण्टे का अन्तर है। इस प्रका­­र का अन्तर काम की दृष्टि से बड़ा महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। कई काम ऐसे हैं जो दिन के अंत में कंपनियां इंटरनेट के माध्यम से भारत में स्थानांतरित करती हैं। उस समय भारत में सुबह का समय होता है। जब अमेरिका के लोग सोते हैं तब भारत के लोग दिन में काम पूरा करके अमेरिकनों के उठने तक उन्हें इंटरनेट के द्वारा वापस कर देते हैं। कुछ परियोजनाएं ऐसी हैं जिनकी अनुरक्षण-समस्या को दूर बैठे हुए वीडियो कान्फ्रेन्सिंग द्वारा दूर किया जाता है। ऐसे ही कंप्यूटर के साफ़्टवेयर की मरम्मत हज़ारों मील दूर बैठकर की जाती है। कंप्यूटर अमेरिका के किसी घर में है और उसको ठीक करने वाला भारत में या फ़िलीपीन में बैठा होता है।

कॉल-सेन्टर पहली ऐसी सेवाएँ हैं जिन्हें भारत को आउटसोर्स किया गया था। जबसे बीपीओ सेवाओं का भारत में उछाल आया है इस सेक्टर ने भारत की भारी जनसंख्या को  रोज़गार प्रदान किया है तथा विश्व के नक्शे पर भारत को एक अलग पहचान दिलाई है।

यदा-कदा यह विश्वास किया जाता रहा है कि केवल वही कार्य आउटसोर्स किये जाते रहे हैं जो अपनी कार्यशैली की दृष्टि से यांत्रिक या किसी निश्चित ढांचे में संपन्न होने वाले अल्पबौद्धिक कार्यों से संबंधित हों। परन्तु अब परिदृश्य बदल रहा है और आउटसोर्स के क्षेत्र में भारत जैसे देश को आउटसोर्स करने वाले देश अपने बहुत सर्जनशील, गंभीर तथा गोपनीय कार्य भी आउटसोर्स करना शुरू कर रहे हैं।                       

अउटसोर्सिंग के मामले में भारत तीव्रता से यू.ए.ए.स तथा यूरोप की कम्पनियों की दृष्टि में प्राथमिकता के स्तर तक पहुँच चुका है। भारत में साक्षरता का स्तर संतोषजनक है जो आउटसोर्स कार्य के लक्ष्य को स्पष्ट करता है। भारत जैसे देश में जनसंख्या का अच्छा प्रतिशत शिक्षित तथा अंग्रेजी-भाषी है, तो यह आउटसोर्स करने वाली कंपनियों के कार्य को और सरल कर देता है। भारतीय पेशेवर व्यक्ति उच्च रूप से कुशल तथा योग्य हैं तथा अच्छी गुणवत्ता की सेवाएँ प्रदान करते हैं। सस्ते कुशल कर्मचारी, बड़ी मात्रा में अंग्रेजी-भाषी जनसंख्या तथा समुचित संरचना के कारण कम्पनियाँ अपने कार्यों को भारत को आउटसोर्स करने लगी हैं। भारत में इस सेवा-उद्योग के फलने-फूलने के कारण मानव संसाधन एवं भौतिक संरचना का पूँजीकरण करने हेतु अधिक से अधिक कम्पनियों ने अपने कार्यों को मैट्रो शहरों में स्थापित किया है। कम्पनियों के वृहद् विस्तार के परिणामस्वरूप मैट्रो शहरों में प्रतिस्पर्धा ने गम्भीर रूप धारण कर लिया है और भारत आज एक बड़ा आउटसोर्स कार्य करने वाला देश बन चुका है।

उपयोगी शब्दार्थ

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समझौता m

विनिर्माण m

निष्पादित करना

विकल्प m

चयन  m

बेहतरीन उपयोग m

प्रबन्धन m

व्यापारिक गतिविधि f

हस्तान्तरित करना

व्यावसायिक संगठन m

स्थानान्तरित करना

श्रम का विभाजन m

संविदात्मक समझौता m

मानव-संसाधन सुविधाएँ  f.pl.

तथ्य-लेखन m

अभियान्त्रिकी m

वैश्विक परिदृश्य  m

परिपथ  m

प्रचुर मात्रा f

पेशेवर व्यक्ति m

परियोजना f

अनुरक्षण समस्या f

यदा कदा

कार्यशैली f

यांत्रिक

अल्पबौद्धिक कार्य m

परिदृश्य m

सर्जनशील

गोपनीय

प्राथमिकता f

साक्षरता का स्तर m

समुचित संरचना f

भौतिक संरचना f

पूँजीकरण m

वृहद् विस्तार m

agreement, compromise

manufacturing

to accomplish

alternative

selection

excellent use

management

commercial activity

to transfer (to another agency)

commercial organization

to transfer (to another place)

division of labor

contractual agreement

human resources facilities

writing/transcription of facts

engineering

global scenario

circuit

sufficient quantity, abundant

professional person

project

maintenance problem

sometime(s)

working style

mechanical

low intellectual work

scenario

creative

confidential

priority

literacy level

appropriate structure

material structure

capitalization

wide expansion

Linguistic and Cultural Notes

1. The passive voice is an important linguistic device used in Hindi primarily for agent-less sentences. When the agent is not clear to the writer/speaker or when the writer/speaker prefers not to mention the agent, passive voice is very useful.

2. India has been a vital destination for outsourced services by multi-nationals in Western nations.  India’s annual revenue from outsourcing is more than 10 billion dollars, which is almost 1% of India’s GDP. There are a large number of research papers, videos, and feature films on this subject.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

निष्पादित करना

व्यापारिक

मानव

प्रचुर

कार्यशैली

उपयोग

विभाजन

संपन्न करना

व्यवसायिक, व्यावसायिक

मनुष्य, व्यक्ति, आदमी

पर्याप्त

कार्यपद्धति

प्रयोग

तकसीम

Structurally Related words (Derivatives)

बेहतर, बेहतरीन

प्रबंध, प्रबंधन, प्रबंधक

हस्त, हस्तान्तरित

व्यवसाय, व्यवसायी, व्यवसायक, व्यवसायिक, व्यावसायिक

स्थान, स्थानान्तरित

श्रम, परिश्रम, श्रमिक, श्रमदान

साधन, संसाधन

अभियन्ता, अभियान्त्रिकी

पथ, परिपथ

रक्षा, सुरक्षा, रक्षण, रक्षक, संरक्षण, अनुरक्षण, आरक्षण

यंत्र, यांत्रिक, संयंत्र

सर्जन, सर्जनशील, सृजन, सर्जनात्मक, सृजनात्मक

प्रथम, प्राथमिक, प्राथमिकता

रचना, रचनात्मक, रचनात्मकता, रचनाकार, संरचना

पूंजी, पूंजीपति, पूंजीवाद, पूंजीवादी, पूँजीकरण

Comprehension Questions

1. Based on the text, what makes India a preferred place for outsourcing?

a. low wages

b. time difference

c. quality service

d. all of the above

2. Based on the text, which task is not outsourced to India?

a. manufacturing

b. market analysis

c. online problem fixing

d. creative tasks

N.P.O. & K.P.O. in India

Module 6.2

ऑउट्सोर्सिंग उद्योग – 2

ग्रामीण बी.पी.ओ.


भारत में ग्रामीण बी.पी.ओ.

छोटे शहरों की ओर से चुपके से ग्रामीण बी.पी.ओ. का आगमन शुरू हो चुका  है। आउटसोर्सिंग चलन में परिवर्तन हो रहा है, तथा ग्रामीण आउटसोर्सिंग लागत कम करने वाला विकल्प है। कुछ बी.पी.ओ. नॉन-एयरकण्डीशन भवनों से संचालित हो रहे हैं, जो कि स्कूली भवन अथवा मैरिज हॉल हैं। इनके कर्मचारी अपनी शिफ़्ट समाप्त होने पर दूध काढ़ने घर भाग जाते हैं, ग्रामीण बी.पी.ओ. प्लास्टिक की कुर्सियों के सस्ते ढाँचे पर चल रहे हैं। अन्य केन्द्र बायोमैट्रिक आई-डी पर संचालित हो रहे हैं, जहाँ के टीम लीडर पोस्ट ग्रेज्युएट हैं। इनकी भौगोलिक स्थिति बड़े शहरों से दूर स्थित होती है। यह अर्द्ध शहरी ग्रामीण समुदाय होते हैं जैसे कि आन्ध्र प्रदेश राज्य का इथाकोटा, केरल का मुन्नार तथा कर्नाटक राज्य का सिंगाओ। आधे से अधिक कर्मचारी महिलाएँ हैं जो 19 से 35 के आयु वर्ग की हैं।

            बहुत से कर्मचारी बी.पी.ओ. कम्पनियों को लघु नियोजन की भाँति देखते हैं जब उच्च शिक्षा या योजनाओं हेतु उनके पास पर्याप्त धन आ जाता है तो वह बी.पी.ओ. को छोड़ कर अपने कार्य में लग जाते हैं। इस चलन ने बी.पी.ओ. कम्पनियों के कर्मचारियों के आवर्तन में वृद्धि कर दी है। बढ़ती बुनियादी लागत, रियल स्टेट लागत तथा बढ़ते वेतनों के कारण बी.पी.ओ. कम्पनियों की लागतें असाधारण रूप से बढ़ी हैं तथा इसके परिणामस्वरूप कम्पनियां टीयर –1 शहरों को छोड़कर अपने कार्य टीयर –2 तथा टीयर –3 शहरों में ले जाने की सोच रहे हैं।

            अधिकांश ग्रामीण बी.पी.ओ. में या तो कॉलिज से निकले लोग हैं या प्रारम्भिक शिक्षा-प्राप्त लोग हैं। टीम के नेता की भूमिका होती है कि ऐसे बी.पी.ओ. में शहर के उन शिक्षित लोगों को भर्ती करना उचित है जिनका कहीं न कहीं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ाव होता है और जो ग्रामीण संस्कृति से भली प्रकार से अवगत होते हैं। वे आमतौर पर एक ग्रामीण बी.पी.ओ. में काम करके अपने परिवार से दूर न रहकर पर्याप्त बचत कर सकते हैं क्योंकि शहर में रहने की लागत निश्चित ही अधिक होती है।

ग्रामीण भारत में बी.पी.ओ. स्थानान्तरण के फ़ायदे

ग्रामीण क्षेत्र आउटसोर्सिंग एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि इसकी लागत कम होती है। ग्रामीण आउटसोर्सिंग अपेक्षाकृत सस्ता है। सम्पूर्ण वेतनमान भी शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में कम है। बी.पी.ओ. कम्पनियों के संदर्भ में ग्रामीण बी.पी.ओ. के कारण बी.पी.ओ.  की संचालन लागत कम है तथा कर्मचारियों का आवर्तन भी कम है। शहरी बी.पी.ओ. के कर्मचारियों के जॉब बदलने/छोड़ने का प्रतिशत 50 है जबकि ग्रामीण बी.पी.ओ. में ऐसा कुछ नहीं है। यही  ग्रामीण बी.पी.ओ. के प्रमुख लाभ हैं। यह एक बहुत बड़ा लाभ सिद्ध हो रहा है क्योंकि सम्पूर्ण विश्व में अनेक और विकल्प मौजूद हैं जहाँ बढ़ते वेतन लागत-संवेदनशील बी.पी.ओ. के लिए कम आकर्षक हो रहे हैं। परिणामस्वरूप भारत के ग्रामीण क्षेत्र आकर्षक विकल्प के रूप से उभर रहे हैं। कर्मचारियों का ग्रामीण बी.पी.ओ. में औसत वेतन 70 से 100 डॉलर है जबकि शहरी बी.पी.ओ. में कर्मचारियों का वेतन 150 से 220 डॉलर के आसपास है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण बी.पी.ओ. में शहरी लागत के मुकाबले 30 से 40% कम संचालन लागत है।

ग्रामीण भारत का रूपान्तरण

ग्रामीण बी.पी.ओ. यह प्रक्रिया शिक्षित जनशक्ति को बड़े बड़े नगरों की ओर भागने से रोकने में सहायक है। विशेष रूप से शिक्षित महिलाओं को जो अपने निवास क्षेत्र से बाहर आसानी से नहीं जा सकती हैं, इस प्रकार के अवसर बड़े उत्साहवर्धक हैं। इससे उच्चाशिक्षा के लिए महत्वाकांक्षाएं बढ़ रही हैं। इसी संदर्भ में विभिन्न राज्य सरकारें ग्रामीण बी.पी.ओ. को देश में स्थापित करने हेतु अनेक लाभदायक योजनाएँ प्रस्तावित कर रही हैं।

छोटे नगरों और गांवों की स्थानीय आबादी का एक भाग हाईटेक सेक्टर में रोज़गार पा रहा है जोकि वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं था। ग्रामीण बी.पी.ओ. के कारण रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है जिसमें ग्रामीण समाज की समृद्धि देखी जा सकती है तथा सर्वविध विकास में भी सहायता हो रही है। इस दिशा में यदि और प्रगति होती है तो ग्रामीण भारत को देश की मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिशों में वृद्धि होगी। इसमें कोई सन्देह नहीं कि ग्रामीण भारत का रूपान्तरण अन्य कारणों से भी प्रारम्भ हो चुका है।

ग्रामीण बी.पी.ओ. की चुनौतियां

ग्रामीण बी.पी.ओ. की मुख्य चुनौती यह है कि ग्राम/कस्बों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है जैसे कि बिजली की कमी, खराब टेली-संप्रेषण, परिवहन, शिक्षा तथा अन्य सहायक सुविधाएँ। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के बी.पी.ओ. धीमी गति के इन्टरनेट कनेक्शन की समस्या से जूझते हैं। बी.पी.ओ. स्टॉफ़ की योग्यता में परिवर्धन करना भी एक गम्भीर चुनौती है। इस अन्तर को कम करने के लिए ग्रामीण भारत को मुख्य शहरों के समकक्ष लाने हेतु भारत सरकार निजी निकायों के साथ मिलकर प्रयास कर रही है जिससे कि शिक्षा सुविधाओं की उपलब्धता को सुधारा जा सके तथा ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं को नगरों के समकक्ष लाया जा सके।

यदि इन समस्याओं का वृहद् पैमाने पर हल निकाला जा सके तो आई.टी. सेवा सेक्टर नियोजन के अन्तर को समाप्त करके कम लागत पर विदेशी ग्राहकों को सुविधाएँ दे पाएगा। वास्तव में ग्रामीण जनशक्ति को खींचकर सम्पूर्ण कर्मचारी आवर्तन को कम किया जा सकेगा तथा योग्यताओं के अभाव से भी निपटा जा सकेगा।

भारत में ग्रामीण बी.पी.ओ. के कुछ उदाहरण

1.         देशी क्रू सोल्यूशन्स प्रा.लि. एक ग्रामीण बी.पी.ओ. कम्पनी आर.टी.बी.आ.ई. एवं आई.आई.टी. मद्रास द्वारा संचालित ।

2.         रूरल सोर्स नामक फ़र्म जोकि बी.पी.ओ. आउटसोर्सिंग के व्यापार के सेटअप को कर्नाटक के बेगपल्ली जिले से दो घण्टे दूर आन्ध्रप्रदेश में एक घर से संचालित कर रहे हैं।

3.         पिलानी भारत में पहला और एकमात्र ग्रामीण बी.पी.ओ. जोकि उच्च मेडीकल ट्रान्सक्रिप्सन का हब है। 

4.         दृष्टि डेवलपमेन्ट एण्ड कम्युनिकेशन लि. दिल्ली के निकट नोयडा में स्थापित पहली ग्रामीण बी.पी.ओ. कम्पनी है।

5.         चिडा सॉफ्ट बी.पी.ओ. खिजानपुर गाँव  में स्थापित तमिलनाडु के थिरुवल्लूर ज़िले में स्थित है । इसके बी.पी.ओ. ऑपरेशन्स को भारत में चेन्नई में लार्सन इण्डिया द्वारा संचालित किया जाता है।

उपयोगी शब्दार्थ

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ग्रामीण

परिवर्तन m

संचालित होना

भौगोलिक स्थिति f

आयुवर्ग m

प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त

जुड़ाव m

ग्रामीण संस्कृति f 

अवगत

जनशक्ति f

लागत-संवेदनशील

वेतनमान m

रूपान्तरण m

आवर्तन m

मुख्यधारा f

रूपान्तरण m

अवसर m

उपलब्ध

समृद्धि f

उत्साहवर्धक

महत्वाकांक्षाएं f.pl.

लाभदायक योजनाएँ f.pl.

प्रस्तावित करना

चुनौती f

उपलब्धता f

सुधारना

बुनियादी सुविधा f

अभाव m

योग्यता f

परिवर्धन m

समकक्ष m

निजी निकाय m

वृहद् पैमाने पर

निपटाना

हल m

rural

change

to be operative

geographical location

age group

who have received elementary education

attachment

rural culture

familiar

manpower

cost-sensitive

salary scale

transformation

rotation, turn-around

mainstream

transformation

opportunity

available

prosperity

encouraging

ambitions

profitable plans

to propose

challenge

availability

to improve

basic facility

shortage

ability

increase

being at an equal level

private corporation

on a large scale

to accomplish

solution

Linguistic and Cultural Notes

1. In professional discourse semantic convergence between Hindi and English is constantly growing, mainly at the level of vocabulary. Undoubtedly, the convergence is in the direction of English. Examine the following expessions from this unit. ग्रामीण बी.पी.ओ, बुनियादी सुविधाएं, परिवहन, सहायक सुविधाएँ, योग्यता में परिवर्धन, शहरों के समकक्ष, निजी निकाय, शिक्षा सुविधाओं की उपलब्धता

2. According to a report in the Wall Street Journal, India’s outsourcing industry generated $69 billion in revenue from exports in the fiscal year 2011-12. With an increasing demand for engineering graduates, outsourcing companies are beginning to tap the pool of graduates in small towns and villages which constitute more than 70% of India’s population. This move is likely to become a great leveler between urban and rural India.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

ग्रामीण

परिवर्तन

जनशक्ति

अवसर

उपलब्ध

समृद्धि

बुनियादी

अभाव

योग्यता

समकक्ष

हल

देहाती

बदल

लोकबल

मौका

प्राप्त

संपन्नता

आधारभूत

कमी

काबलियत

समस्तरीय

समाधान

Structurally Relaed Words (Derivatives)

गाँव, ग्राम, ग्रामीण, ग्राम्य

भूगोल, भौगोलिक

प्रारम्भ, प्रारम्भिक, आरम्भ, आरम्भिक

संवेदना, संवेदनशील

उत्साह, उत्साही, उत्साहवर्धन ,उत्साहवर्धक, उत्साहजनक, प्रोत्साहन, प्रोत्साहित

प्रस्ताव, प्रस्तावित, प्रस्तावक

Comprehension Questions

 1. Which statement is not based on the text?

a. Women in rural areas are inspired to get higher education.

b. Rural BPOs reduce the gap between cities and villages.

c. Finding qualified workers is a challenge in rural areas.

d. Rural BPOs are also attracting city dwellers for jobs.

2. Which statement is closest to the text?

a. Improvement in technology in rural India is the best outcome.

b. Employees from rural India are seen changing their jobs often.

c. Companies are providing incentives for working in rural BPOs,

d. Relocation of BPOs in rural areas has not proved an easy task.

Rural B.P.O.

Module 6.3

ऑउट्सोर्सिंग उद्योग – 3

भारत में एल.पी.ओ. और के.पी.ओ.


विषय-परिचय

एल.पी.ओ. और के.पी.ओ. दो अंग्रेज़ी वाक्यांशों के संक्षिप्त रूप हैं। ये वाक्यांश हैं – लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग। एल.पी.ओ. एवं के.पी.ओ. आउटसोर्सिंग की दो अलग शाखाएं हैं। एल.पी.ओ प्रबन्धन तथा संचालन क्षेत्र में भारतीय कानूनी/वैधानिक कार्य करने वाली फर्में कर सकती हैं, जबकि के.पी.ओ. हेतु विशेषज्ञता एवम् कुशलता की आवश्यकता पड़ती है जोकि कुछ ही फ़र्मों के पास होती है।

भारत में लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग बहुत लाभकारी और चुनौतीपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र हैं। भारतीय कानून संबंधी आउटसोर्सिंग उद्योग परिपक्व हो रहा है और बहुत जल्द ही विदेशी कानूनी फ़र्में तथा कानूनी उद्योग के उद्यमी भारत से अपना व्यापार संचालित करेंगे। ऐसी परिस्थितियों में भारत के एल.पी.ओ. और के.पी.ओ. सेवा-प्रदाताओं को अपनी योग्यता एवम् विशेषज्ञता को आवश्यकताओं के समकक्ष लाने के लिए विशेष प्रयास करना होगा।

एल.पी.ओ.

एल.पी.ओ. को एक ऐसे अभ्यास के रूप में जाना जाता है जिसमें एक कानूनी वैधानिक कार्य करने वाली फ़र्म अपने कार्य को किसी अन्य फ़र्म को करने हेतु दे देती हैं अथवा यूं कहें कि बाहरी फ़र्म से कानूनी सहायता प्राप्त करती है।

1997 में एल.पी.ओ. की अवधारणा के उदय के बाद से एल.पी.ओ. सेवाएँ सतत प्रयास के पश्चात् भी अभी प्रारम्भिक अवस्था में हैं। एल.पी.ओ. सेवा-प्रदाता स्वयं को कनाडा, भारत, फिलीपींस संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और लैटिन अमेरिका में स्थापित कर चुके हैं। इन फ़र्मों में कई हज़ार कर्मचारी नियोजित हैं, तथा उनके अनेक कर्मचारी कंपनी के विदेशी कार्यालयों में वहां के ग्राहकों के साथ लगातार संबंध बनाए रखने में व्यस्त रहते हैं।

यह परम्परागत रूप से दस्तावेज़-समीक्षा, कानूनी अनुसंधान और लेखन, वादविवाद और मसौदा तैयार करने एवं पेटेन्ट सेवाएँ प्रदान करते हैं। प्रमुख बहुराष्ट्रीय निगमों के आन्तरिक कानूनी/वैधानिक विभाग अपने कुछ कार्यों की लागत को सीमित करने हेतु ऐसे काम आउटसोर्स कर देते हैं।

            भारत की प्रमुख दस एल.पी.ओ. फ़र्में हैं बोधि ग्लोबल, क्लच ग्रुप, कोबरा लीगल साल्यूशन्ज़, सी.पी.ए. ग्लोबल लिमिटिड, इंटिग्रोन मैनेज्ड साल्यूशन्ज़, लॉ स्क्राइब, माइन्डक्रेस्ट, पैनजिआ 3, क्विस्लेक्स, यूनाइटेडलेक्स।

            इन कंपनियों के कार्यों में अधिग्रहण के प्रपत्रों  की समीक्षा करना, संविदा प्रबन्धन, विश्लेषण तथा संविदाओं को बनाना, संविदाओं के आंकड़ों का प्रबन्धन, पट्टे के संविदाओं का सार निकालना, जटिल पट्टे की संविदाओं के मुख्य अवयवों का पता लगाना, वैधानिक विवाद  में मध्यस्थता तथा सम्बन्धित वैधानिक क्षेत्र एवम् अनुसंधान करना सम्मिलित हैं।       

            इन कंपनियों के कर्मचारी अनुभवी वकील, वैज्ञानिक, अभियन्ता तथा पेशेवर व्यक्ति हैं जो मूल्यवान वैधानिक/कानूनी सेवाएँ प्रदान करने हेतु भारत तथा विदेशों के कार्यालयों में कार्यरत हैं।

के.पी.ओ.

के.पी.ओ. आउटसोर्सिंग का भिन्न स्वरूप है। बी.पी.ओ. की तुलना में यह कम संरचित तथा अधिक विशिष्ट है। के.पी.ओ. बृहद् रूप से उन सेवाओं में व्यवहार करते हैं जो कि बुद्धि-प्रधान हैं जैसे कि पेटेन्ट आवेदन हेतु अनुसंधान, वैधानिक तथा चिकित्सकीय सेवाएँ, प्रशिक्षण, सलाहकार सेवाएँ तथा फार्माक्यूटिकल एवम् बायोटेक्नालाजी एवम् एनीमेशन तथा डिजाईन हेतु अनुसन्धान एवम् विकास कार्य।

            भारत की प्रमुख दस एल.पी.ओ. फ़र्में हैं जेनपेक्ट, इवेल्यूसर्व, उगम, WNS ग्लोबल सेवा, 24/7 कस्टमर, फर्स्ट सोर्स, ईएक्सएल सर्विस, कोपाल पार्टनर्स, पैंजिया 3, टेकबुक्स।

            इन कंपनियों की सेवाओं की विस्तृत शृंखला है। जिसमें वित्त, आई.टी. ढांचा, आपूर्ति प्रबन्धन तथा विश्लेषण आदि आता है। अपनी बहु-आयामी सेवाओं में उच्च स्तर का विश्लेषण, रिपोर्ट लेखन, सर्वे की प्रोग्रामिंग, प्रोजेक्ट प्रबन्धन तथा अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन तथा टेलीफोन डाटा एकत्रीकरण की सेवा प्रदान करना है।

            व्यापार प्रक्रिया आउटसोर्सिंग की तुलना में बौद्धिक प्रक्रिया आउटसोर्सिंग अधिक चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इसमें अधिक विद्वान, गतिशील, विश्लेषणात्मक कुशलता रखने वाले कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ती है। भारत इस क्षेत्र में कार्य  हेतु पूर्णतः तैयार है और भारत  ग्राहकों  की माँग के अनुरूप वहनीय दरों पर सेवाएँ प्रदान कर सकता है।  

वैश्विक विकास के कारण एल.पी.ओ. तथा के.पी.ओ. कार्यों में भविष्य में और वृद्धि की संभावना है। कार्पोरेट घराने तथा निवेशकर्त्ता बैंक भारतीय एल.पी.ओ. उद्योग की ओर वैधानिक सलाह हेतु रुख कर रहे हैं। वर्तमान वैश्विक संसार में भारत निश्चित रूप से एक नूतन प्रारम्भ की ओर अग्रसर है।

उपयोगी शब्दार्थ

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वाक्यांश m  

संक्षिप्त रूप m

वैधानिक कार्य m

विशेषज्ञता f

चुनौतीपूर्ण 

परिपक्व

अवधारणा f

सतत प्रयास m

प्रारम्भिक अवस्था f

नियोजित

परम्परागत रूप से 

दस्तावेज समीक्षा f

कानूनी अनुसंधान m

वाद-विवाद m

मसौदा तैयार करना 

निगम m

अधिग्रहण m 

प्रपत्र m

समीक्षा करना

संविदा प्रबन्धन m

विश्लेषण m

अवयव  m

वैधानिक विवाद m  

मध्यस्थता f

संरचित 

अधिक विशिष्ट 

वृहद रूप m

बुद्धि-प्रधान 

विस्तृत शृंखला f

आपूर्ति प्रबन्धन m

विश्लेषण m

बहु-आयामी सेवा f

विश्लेषणात्मक कुशलता f

वहनीय दर m

निवेशकर्त्ता m/f   

phrase

abridged form

legal work

expertise

challenging

mature

concept

continuous effort

beginning stage

appointed

traditionally

document critique

legal research

discussion

to prepare a draft

corporation

acquisition

form

to critique

contract management

analysis

part

legal dispute

mediation

structured

very specialized

large form 

intellectual

extensive chain

supply management

analysis

multi-dimensional service

analytic expertise

sustainable rate

investor

Linguistic and Cultural Notes

1. Here are some alternate forms of conjuncts as they appear in writing. The choice is up to the individual but the first alternative of writing these conjuncts as seen in the following pairs is gaining currency due to their simpler formation.

इक्विपमेंट/इक्विपमेंट, परास्नातक/परास्नातक, टेक्नीकल/टेक्नीकल, धक्का-मुक्की/धक्का-मुक्की. There are a couple of others such as श्च (श्+च)as in पश्चात and क्त (क्+त) as in संयुक्त but their alternate forms are not possible in computer writing. Five other conjuncts क्ष (क्+ष), त्र (त्+र), ज्ञ (ज्+ञ), श्र (श्+र), द्य (द्+य) are fixed forms. If we need to write श्+ऋ, we can write शृ or else श्र with the hanging र removed from it and the vowel sign of ऋ added to it. Since current computer fonts do not produce that form, many writers are taking the liberty of writing it as श्रृ (which really is a combination of श+र+ऋ).

2.The process of outsourcing legal document preparation to foreign countries is at an early stage and is constantly growing. India is a big beneficiary of this business. Various time consuming processes are delegated to paralegals, document reviewers or interns in other countries where the cost of their services is much lower than in countries like the United States.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

वैधानिक

अवधारणा

सतत

प्रयास

प्रारम्भिक

समीक्षा

वादविवाद

निगम

अवयव

वृहद

कानूनी

अंकल्पना

निरंतर, लगातार

प्रयत्न, यत्न

आरम्भिक

समालोचना

तर्क-वितर्क

निकाय

अंग, हिस्सा

विशाल

Structurally Related Words (Derivatives)

रूप, रूपान्तर, रूपान्तरण

वाक्य, वाक्यांश                                     

विधान, वैधानिक

विशेष, विशेषता, विशेषज्ञ, विशेषज्ञता, विशिष्ट, विशिष्टता, वैशिष्ट्य

धारणा, अवधारणा

प्रारम्भ, प्रारम्भिक, आरम्भ, आरम्भिक

परम्परा, परम्परागत, पारम्परिक

ग्रहण, अधिग्रहण, परिग्रहण, परिग्रह, अपरिग्रह, परिग्रहवादी

पत्र, प्रपत्र, पत्रकार, पत्रकारिता

मध्य, मध्यस्थ, मध्यस्थता

पूर्ति, आपूर्ति, संपूर्ति

विश्लेषण, विश्लेषणात्मक

कुशल, कुशलता, कौशल

निवेश, निवेशक, निवेशकर्त्ता

Comprehension Questions

1. What is the status of LPOs and KPOs in India?

a. LPOs and KPOs are well-established in India.

b. LPOs and KPOs are struggling for more work.

c.  KPOs in India are not attracting enough business.

d. LPO agencies are doing better than KPOs there.

2. Which statement is based on the text?

a. Indian professionals are working in many countries.

b. Indian companies are very competitive in prices.

c. There is no dearth of qualified Indian professionals.

d. Indian service-providers may lose their clients in the near future.

Future of Outsourcing

Module 6.4

ऑउट्सोर्सिंग उद्योग – 4

ऑउट्सोर्सिंग का भविष्य


परिचय

बी.पी.ओ. के क्षेत्र में उल्लेखनीय निर्यात के कारण भारत के लिए आउटसोर्सिंग राष्ट्रीय आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। आज आउटसोर्सिंग में उच्चस्तरीय सफलता के बावजूद हर किसी के दिमाग में यही सवाल उठ रहा है कि क्या आउटसेार्सिंग का भविष्य अगले 10 या 20 सालों तक चलेगा। हालांकि भारत एक प्रमुख आउटसोर्सिंग हब के रूप में कामयाब रहा है लेकिन फिर भी प्रश्न इसके भविष्य में भी बने रहने का है क्योंकि वैश्विक बाजार की गतिशीलता को आउटसोर्सिंग बदल रही है। वर्तमान और भविष्य का व्यावसायिक रुझान आउटसोर्सिंग बाजार को निश्चित प्रभावित करेगा।

भारत के नामी संस्थान नैस्कॉम की भविष्यवाणी है कि आने वाले वर्षों में बी.पी.ओ. कारोबार में 6 प्रतिशत और 8 प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी। नैस्कॉम के अनुसार बी.पी.ओ. के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए भारत में इस वर्षानुवर्ष विकास को जारी रखने के लिए कारोबार की लागत कम रखना, गुणवत्ता और क्षमता को बढ़ाना बहुत महत्वपूर्ण होगा। इसमें कोई शक नहीं कि भारत व्यापार, ज्ञान, शोध, कानूनी और संबंधित उच्च अंतःप्रक्रियाओं की आउटसोर्सिंग करने का उत्कृष्ट स्थान और विदेशी कंपनियेां की मांग बन चुका है। परंतु यह भी उतना ही सत्य है कि आने वाले वर्षों में चुनौतियां बढ़ेंगी और इसलिए अपनी वर्तमान उपलब्धियों को बरकरार रखने के लिए नए उपाय ढूंढने होंगे।

भविष्य की चुनौतियां

विश्लेषक भविष्यवाणी कर रहे हैं कि उद्योग के लिए खरीददार बेहतर गुणवत्ता और कम लागत पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं और इसलिए ऐसा होने की संभावना है कि विदेशी कंपनियां अधिक लचीले मूल्यों के ठेके को निर्धारित करके सेवा-प्रदाताओं पर दबाव डालेंगी। ऐसा भी लग रहा है कि विदेशी कंपनियां अधिक मानकीकृत समाधान की तलाश में हैं जिससे वे अपनी खुद की अलग पहचान बना सकेंगे और यह प्रवृति अभी जारी है।

            एक सर्वेक्षण कम्पनी प्राइसवॉटर हाउस कूपर्स और ड्यूक यूनीवर्सिटीज़ रिसर्च नेटवर्क के मुताबिक आउटसोर्सिंग नए सेवा-प्रदाताओं को जन्म दे रहा है। उद्योग के विशेषज्ञों का अनुमान है कि लैटिन अमेरिका और यूरोप निकट भविष्य में आउटसोर्सिंग के गन्तव्य स्थान होंगे। ब्राज़ील और रूस के वैश्विक आउटसोर्सिंग बाज़ार में इनकी उपस्थिति को महसूस किया जा रहा है। इसके इलावा चीन भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अपने प्रयास बढ़ा रहा है। हालांकि भारत आउटसोर्सिंग कारोबार में दुनिया का अग्रणी देश है पर निकट भविष्य में दक्षिणपूर्वी एशियाई देश जैसे इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, वियतनाम और थाईलैण्ड आदि अपनी स्थिति को इस उद्योग में सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। भारत को इण्डोनेशिया जैसे देशों से प्रतिद्वंद्विता का सामना करना पड़ रहा है जहां श्रम सस्ता है जबकि भारत में श्रम लागत में वृद्धि हो रही है।

            भारतीय मैट्रो शहरों में श्रम लागत में वृद्धि के कारण कंपनियों का रुख छोटे शहरों की ओर हो रहा है और इसके कारण सुशिक्षित और सक्षम कर्मचारियों के उन इलाकों में हमेशा उपलब्ध होने में सन्देह पैदा हो रहा है।

   अमेरिका और ब्रिटेन जैसे बाजारों में आर्थिक स्थिति और राजनीतिक संकट के कारण भी आउटसोर्सिंग को कुछ हद तक प्रतिबन्धित किया जा सकता है। मंदी के दौर में जिस तरह से दुनिया में सोच बदल रही है उसका असर भी आउटसोर्सिग पर अवश्यंभावी है।

भारत के लिए अवसर

भारतीय आउटसोर्सिंग उद्योग का अभूतपूर्व विकास हुआ है। दुनियाभर के बाजार ज्ञान पर आधारित होते जा रहे हैं| भारत ज्ञान पर आधारित सेवाओं के लिये सबसे पसंदीदा गन्तव्य बन गया है। आउटसोर्सिंग सेवाओं के लिए बेहतर अंग्रेजी की आवश्यकता हेाती है जो भारत में प्रचुर मात्रा में है। भारत उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखेगा । नैस्कॉम के अनुसार सन् 2015 तक भारत उत्कृष्ट  सेवाओं का दुनिया के केन्द्र के रूप में उभरेगा। नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग जल्द ही भारत में सबसे बड़ी राजस्व कमाई होने की संभवाना है। भारत में कुशल जनशक्ति चाटर्ड-एकांउटेन्टस,  एम.बी.ए., डॉक्टर, वकील आदि का एक बड़ा पूल है जिनको अनुसंधान, विश्लेषण  और ज्ञान-सेवा क्षेत्र में महारत हासिल है।

            भारत कई फॉर्च्यून 500 कंपनियों को पहले से ही आउटसोर्सिंग सेवाएँ प्रदान कर रहा है जिनमें आई.बी.एम.,ए.टी.सी.एस.,ए.सी.एस.आदि प्रमुख हैं। भारत क्लीनिकल रिसर्च, एवं उत्पादन के मामले में फार्मास्युटिकल का एक बड़ा बाजार है। भारत में प्राप्य उच्च गुणवत्ता, परीक्षण और डेटा प्रबन्धन के लिए प्रतिभा की उपलब्धता प्रतिद्वंद्वियों से बढ़त प्राप्त करने में सहायक होगी।

भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रबन्धन सेवा की विशेषज्ञता का होना एक बड़ी उपलब्धि है। यहां आई.टी. इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रबंधन की कुशल व्यवस्था, आवेदन, संचालन और सुरक्षा के लिए प्रबन्धन सेवाओं की एक विस्तृत शृंखला है।

उपयोगी शब्दार्थ

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

उल्लेखनीय

महत्वपूर्ण स्रोत m

गतिशीलता f 

भविष्यवाणी f

वैश्विक प्रतिस्पर्धा f

वर्षानुवर्ष 

गुणवत्ता f

क्षमता f

अंतःप्रक्रिया f

उपलब्धि f

बरकरार रखना

विश्लेषक m/f

लचीले मूल्य m

निर्धारित करना 

मानकीकृत समाधान m

प्रवृत्ति f

गन्तव्य स्थान m

प्रतिद्वंद्विता f

श्रम लागत f

सक्षम

आर्थिक स्थिति f

राजनीतिक संकट m

प्रतिबन्धित करना 

मंदी के दौर में 

अवश्यंभावी 

अभूतपूर्व 

पसंदीदा 

प्रचुर मात्रा f

उत्कृष्टता f

राजस्व m

महारत f

प्रतिभा f

remarkable

important source

mobility

forecast

global competition

year after year

quality

capacity, capability

interaction

achievement

to maintain

analyst

flexible prices

to fix, assign                                       

standardized solution

trend

destination

rivalry

labor cost

capable

economic situation

political crisis

to ban

during the depression phase

bound to happen

unprecedented

favorite

abundant quantity

superiority

revenue

expertise

talent

Linguistic and Cultural Notes

1. Acronyms in Hindi are almost always taken directly from English. There are three reasons for this preference that would explain most examples. First, the full name is almost always in English and hence the link between the acronym and the full name is obvious. Secondly, the English writing system is letter based while the Hindi writing system is syllable based, which means that acronyms will come out to be longer in Hindi than in English. For example Business Processing Overseas is BPO in English but it will be बी.प्रो. which is not easy to pronounce. The third reason is the obvious one that English acronyms come with the names they stand for and hence are meaningful across borders. Acronyms are often understood in familiar contexts.

2. According to industry experts, the future of outsourcing is secure due to the benefits that it brings to both parties. As long as outsourcing provides the benefit of low-wage services, it is likely to continue.  India will continue to be a preferred place for many multinational corporations in the developed world, because of the level of education of Indian workers, their facility in English, and the efficient use of technology.

Language Development

The two following vocabulary categories are designed for you to enlarge and strengthen your vocabulary.  Extensive vocabulary knowledge sharpens all three modes of communication, With the help of dictionaries, the internet and other resources to which you have access, explore the meanings and contextual uses of as many words as you can in order to understand their many connotations.

Semantically Related Words

Here are words with similar meanings but not often with the same connotation.

महत्वपूर्ण

वैश्विक

प्रतिस्पर्धा

वर्षानुवर्ष 

क्षमता

उपलब्धि

मूल्य

निर्धारित करना

समाधान

सक्षम

स्थिति

प्रचुर

उत्कृष्टता

महारत

अहम

सार्वभौमिक

स्पर्धा, प्रतिद्वन्द्विता, मुकाबला

प्रतिवर्ष

सामर्थ्य

प्राप्ति

दाम, कीमत

निश्चित करना

हल

समर्थ

हालत

पर्याप्त

श्रेष्ठता

कुशलता, कौशल

Structurally Related Words (Derivatives)

लिख, लेख, उल्लेख, उल्लेखनीय, अभिलेख

गति, गतिशील, गतिशीलता, प्रगति

स्थान, संस्थान

भविष्यवाणी, भविष्यवक्ता

उपलब्ध, उपलब्धि, उपलब्धता, सुलभ, दुर्लभ

विश्लेषण, विश्लेषक, विश्लेषणात्मक

निर्धारण, निर्धारित, निर्धारक                                           

मानक, मानकीकरण, मानकीकृत

वृत्ति, प्रवृत्ति

द्वंद्व¸ प्रतिद्वंद्वी, प्रतिद्वंद्विता

शिक्षा, शिक्षक, शिक्षिका, शिक्षण, प्रशिक्षण, शिक्षित, सुशिक्षित, अशिक्षित, शैक्षिक

Comprehension Questions

1. Which of the following options is not correct according to the text?

a. India is a place of knowledge for foreign companies.

b. India is already a hub of BPOs for foreign companies.

c. Indian agencies are indispensable for foreign companies.

d. India specializes in infrastructure and management services.

2. India can be left behind by other competing countries because

a. the Indian wage structure is gradually increasing.

b. India is gradually moving on to manufacturing.

c. Moving BPO agencies to rural areas may reduce quality.

d. Advanced nations may outsource work only to  friendly nations.

Supplementary Materials Module 6

Reading

1.Business process outsourcing to India – Wikipedia, the free

https://www.google.co.in/search?q=outsourcing+in+india&oq=outsourcing&aqs=chrome.3.69i57j0j5j0j69i61.17992j0j1&sourceid=chrome&ie=UTF-8

2. Career in केपीओ / बीपीओ , Careers and Career Option

Listening

1. India’s fast growing rural BPO market

Uploaded on Jul 20, 2010

Money Mantra: In this show, Biplab Saha, Business Head of Source for

Change; Dhiraj Tolwani, CEO of B2R Technologies; Sachin Bhatia, co-founder of Drishti Soft Solutions and Murli Vullaganti, CEO of Rural Shores, share their views about the scope and future of  India’s rural BPO market. eMagazines: Online magazines from India, e-Magazines list fast growing rural BPO market.

2.India’s fast growing rural BPO market              https://www.youtube.com/watch?v=5CMONdJZrTM

3.The role of BPO industry in jobs creation        https://www.youtube.com/watch?v=7_ScGTLzmJA

Uploaded on Jun 8, 2011

Pramod Bhasin, the founder of Genpact, shares his views on how the Information and Communication Technology (ICT) industry is playing a major role in boosting employment in the country and acting as a feeder service to other services sector.

4.India – Infinite Opportunities: An overview of the Indian IT-BPO Industry

https://www.youtube.com/watch?v=j3gDthDnOYI

5.Glimpse of the India IT BPO Industry (NASSCOM).wm

https://www.youtube.com/watch?v=re3s3NFGkzg

Discussion Ideas Module 6

1.  In pairs, discuss the costs and benefits to Indian society of the rapid growth in the outsourcing industry.

2.  Assume the role of the Sarpanch of a village Panchayat. Deliver a 5 minute presentation to a potential BPO company persuading them to select your village as their next expansion site   

3.  What are the threats that India will lose its advantage in the BPO industry?  In pairs, have one person argue for India’s long term/sustained advantages (e.g. English language) and one for the potential threats or disadvantages (e.g. time difference from US and Europe).

4.  Discuss the opportunity to raise the standard of living in rural India through providing basic BPO services to big Indian companies rather than western companies. Can a company like Reliance or Airtel use rural workers to staff some of their call centers?

5.  Discussion:  Other countries are becoming more competitive with India’s rates for outsourcing.  Is this a cause for concern?  Why or why not?

6.  Discussion:  Beyond India’s economic growth, outsourcing has had cultural and societal implications within India (due to the odd hours worked, quick turnover, and other aspects of “BPO Life.”)  Discuss the positive and negative consequences – does one side outweigh the other?

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