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Module 9

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Module Nine – Business Statistics

व्यावसायिक आंकड़े

Business Statistics

a. Some commodity prices (for numbers)

Module 9.1

 

व्यावसायिक आंकड़े

Business Statistics

 

 

कुछ वस्तुओं के मूल्य

Prices of Some commodities

     

Text Level

Advanced

Modes

Interpretive

 

What will students know and be able to do at the end of this lesson?

Understanding Indian system of numbers to use them accurately

Text

नितीन किरीट पारिख कमेटी रिपोर्ट की स्याही अभी सूखी नहीं है, लेकिन तेल सब्सिडी और महंगाई दर पर सरकार की उलझन खुलकर सामने आ गई है । अगर सरकार तेल की कीमतें बढ़ाती है तो महंगाई दर के और बढ़ने का खतरा पैदा हो जाएगा । सरकार पहले से ही इस मोर्चे पर बेहाल नजर आ रही है । जब भारत खुद को दुनिया के रिफाइनिंग हब की चौखट पर खड़ा था तो वैश्विक मंदी ने उसके ख्वाबों पर करारी चोट की ।

साल 2009 में वैश्विक तेल मांग में 2 एमएमबीडी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि 3.3 एमएमबीडी की नई क्षमता ने दुनिया भर में अतिरिक्त क्षमता को 11.7 एमएमबीडी पर पहुंचा दिया । रिफाइनिंग मार्जिन साल 2007 में 7.6 डॉलर प्रति बैरल से 60 फीसदी लुढ़ककर 2009 में 3 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया । वैश्विक स्तर पर मंदी ने 3 एमएमबीडी रिफाइनिंग क्षमता को बंद होने की कगार तक पहुंचा दिया है ।

    आगे की ओर देखें तो अगले पांच साल में 7 एमएमबीडी रिफाइनिंग क्षमता जुड़ेगी, जबकि इंक्रीमेंटल मांग 6.4 एमएमबीडी से आगे बड़ी मुश्किल से पहुंचेगी । रिफाइनिंग मार्जिन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में बेहतर रिफाइनरियां ही मैदान में डटी रह पाएंगी । अपनी तेल से जुड़ी मांग का 70 फीसदी हिस्सा अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर आयात करने के लिए मजबूर देश (2,70,000 करोड़ रुपए का सालाना प्राइस टैग) तेल की उठापटक करती कीमतों से निपटने के लिए भारत की रणनीति जैसे उदाहरण दुनिया के ज्यादा हिस्सों में नहीं दिखते ।

    भारत के अलावा, केवल बांग्लादेश और श्रीलंका ने ही सब्सिडी का बोझ अपनी सरकारी तेल कंपनियों पर डालकर अस्थिरता का सामना करने का तरीका अपनाया । और ऐसा साल के अंत में एकाउंटिंग और वित्तीय प्रबंधन के अंश के तौर पर किया जाता है । अंत में जाकर कितना फंड सही रहेगा, यह निश्चित नहीं होता, इस वजह से सरकारी तेल कंपनियां को नए इंफ्रास्ट्रक्चर या उपकरणों के आधुनिकीकरण तथा अपग्रेड में आवश्यक निवेश की योजना बनाते वक्त काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है ।

     एक एक्सपर्ट ग्रुप के मुताबिक, अगर कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल रहते हैं, तो भी अकेले डीजल के लिए सब्सिडी बिल 2020 तक 71,000 करोड़ रुपए पर पहुंच जाएगी । लेकिन अगर क्रूड 150 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छू गया तो यह बिल बढ़कर 3,38,000 करोड़ रुपए का स्तर छू जाएगा । डीजल उपभोग का केवल 12 फीसदी हिस्सा लेने वाला कृषि क्षेत्र काफी हद तक मूल्य बढ़ाने की वजह से बचा हुआ है । जहां तक ट्रांसपोर्ट सेक्टर का सवाल है, उत्पादों की कुल कीमत में ईंधन का खर्च केवल 1.5 फीसदी है, ऐसे में डीजल के दामों में इजाफा इस पर काफी कम असर डालेगा ।

2.निर्यात में सरकारी राहत

 (जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली)

निर्यात में पिछड़ रहे क्षेत्रों को मदद देने के लिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बचे हुए हिस्से में 500 करोड़ रुपये की और राहत देने का ऐलान किया है । इसके तहत रोजगार पैदा करने वाले उद्योगों के करीब 2 हजार उत्पादों को निर्यात में रियायत देने का फैसला किया गया है । विदेश व्यापार नीति में नए देशों में निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली सूची में चीन और जापान को भी जोड़ दिया गया है ।

 केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने मंगलवार को इस पैकेज का ऐलान करते हुए कहा कि काटन से बने कपड़ों, हैंडीक्राफ्ट और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है । चालू वित्त वर्ष 2009 -10 में इन क्षेत्रों का प्रदर्शन निर्यात के मोर्चे पर अच्छा नहीं रहा है । इन क्षेत्रों के उत्पादों को फोकस प्रोडक्ट स्कीम में शामिल किया गया है । यह स्कीम पिछले साल विदेश व्यापार नीति में घोषित की गई थी । शर्मा ने कहा कि इन प्रोत्साहनों से निर्यात को और बढ़ावा मिलेगा । साथ ही उन क्षेत्रों को भी लाभ होगा, जहां निर्यात में गिरावट निरंतर जारी है । यह पैकेज पहली जनवरी से प्रभावी माना जाएगा ।

 पिछले 13 महीने में नकारात्मक दायरे में रहने के बाद निर्यात ने कुछ बड़े देशों में मांग बढ़ने से नवंबर व दिसंबर माह में बढ़त दिखाई है । निर्यातकों के लिए इस प्रोत्साहन का एलान ऐसे समय किया गया है, जब वित्त मंत्रालय ने नए प्रोत्साहन की संभावना के खिलाफ राय दी है । वित्त मंत्रालय आगामी बजट में राजकोषीय घाटा नियंत्रित करने पर ध्यान दे रहा है । पैकेज के तहत हैंडलूम समेत 113 उत्पादों को फोकस प्रोडक्ट स्कीम में जोड़ा गया है । इन्हें ड्यूटी में कुल आयातित कीमत के 5 प्रतिशत के बराबर रियायत दी जाएगी । इसके अलावा काटन से बने कपड़े और मशीनरी समेत 1837 उत्पादों को मार्केट लिंक्ड फोकस प्रोडक्ट स्कीम में शामिल किया गया है । इन्हें ड्यूटी पर एफओबी कीमत के 2 प्रतिशत के बराबर छूट मिलेगी ।

 इस प्रोत्साहन पर आने वाले खर्च की पूर्ति वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के आंतरिक बजट से की जाएगी । इसका मकसद निर्यात में शुरू हुई वृद्धि की गति को निरंतरता प्रदान करना है । प्रोत्साहन पैकेज के तहत शुल्क-मुक्त आयात का अधिकार वाहन उपकरणों (आटो कंपोनेंट), इलेक्ट्रानिक्स, प्लास्टिक्स, मशीनरी और रसायन समेत अन्य उत्पादों को उपलब्ध कराया जाएगा । साथ ही जापान तथा चीन को भी मार्केट लिंक्ड फोकस प्रोडक्ट स्कीम के देशों की सूची में शामिल कर लिया गया

Glossary

( shabdkosh.com is a link for an onine H-E and E-H dictionary for additional help)

मोर्चा m battle front
बेहाल out of shape
चौखट f threshold
वैश्विक मंदी f global depression
कगार m edge, verge
उठापटक f ups and downs
वित्तीय प्रबंधन m financial management
आधुनिकीकरण m modernization
उपभोग m consumption
कृषि क्षेत्र m agriculture field
इजाफा m increase, enhancement
महत्वपूर्ण संसाधन m important resource(s)
प्रोत्साहन m encouragement
नकारात्मक दायरा m negative circle
राजकोषीय घाटा m exchequer deficit
मैदान में डटे रहना to stay steadfast in a situation

Structural Review

1. खतरा पैदा हो जाएगा पैदा होना/पैदा हो जाना – This is a pseudo verb and हो जाना is a compound verb where the second member जाना adds the connotation of ‘change of state’.
2. वैश्विक मंदी ने उसके ख्वाबों पर करारी चोट की The verb की is the perfective feminine (किया masc.)  form of the verb करना and is transitive (because it is capable of admitting an object). The fulfillment of these two prerequisites triggers ने after the subject मंदी.
3. दर्ज की गई

 

 

This is a passive form of the verb. The main verb करना is in the perfective feminine form and the passive marker जाना is conjugated in past tense here.
4. ज्यादा हिस्सों में नहीं दिखते

 

The word दिखना (to be seen) is intransitive as it cannot take an object. Three words देखना, दिखाना, दिखवाना are morphologically related to दिखना. देखना is a transitive verb (हमने उसे वहां देखा था) where उसे is the object. दिखाना is also a transitive verb but takes two objects – one direct object and another indirect object (आपने उसे अपना घर दिखाया) where उसे is the indirect object and घर is the direct object. दिखवाना is also transitive and takes two objects – one direct object and another indirect object – but the act of showing is caused by a third person (आपने नौकर से उसे अपना घर दिखवाया).

Cultural Notes

1. Numbers

 

For large numbers , India and other South Asian countries use a different number system. Thus national budgets are publicized using lakhs and crores, even in English writing.

 

1,00,000  एक लाख

1,00,00,000 एक करोड़

1, 00,00,00,000 एक अरब

and it goes to खरब, नील, पद्म, शंख (the last three are uncommon)

Since both Indian and American number systems are used in India, it is important to be able to relate to them. So, एक लाख is a hundred thousand, दस लाख would make one million, and एक करोड़ would be ten millions. In India, rich people are known as लखपति or करोड़पति, not millionaires.

Practice Activities (all responses should be in Hindi)

1. Say the following first in Hindi numbers and then in the American number system.

1000000, 5678034, 918.3, 747 3/4

2. How will you the say the following in the American number system?

270 हज़ार करोड़, 71 हज़ार करोड़, 338 हज़ार करोड़, 500 करोड़

3. What is the history of a British billion? Is it different from the American billion? How many zeros other non-English speaking countries in Europe have in a billion?
4. Compare the two numbering systems – the Hindi system and the English system.
5. What are the Hindi words for the following:

decimal, percent, zero, 1½, 2½, 3½

Comprehension Questions

1. What is the worst oil-related implication for India?

a. An increase in oil prices will cause price rise everywhere.

b. Reduced refining margins will affect investment in refineries.

c. Increased oil prices will affect the agriculture sector badly.

d. Increased oil pricew will affect the transportation sector badly.

2. What is the central objective of the abatement in export taxes?

a. helping certain regions

b. promoting certain products

c. to maintain the increase in exports

d. all of the above

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